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गुरुवार, 26 दिसंबर 2024

भारतीय देशी गौ माता (गाय) की महत्ता और पवित्रता

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 अनेकों कथावाचकों आदि ने परब्रम्ह परमेश्वर भगवान श्री कृष्ण जी के चरित्र में अनेकों स्थान पर अवांछित शब्दों का, उनकी लीलाओं को मिलावटी बना दिया है जिसे टेलीविजन शो आदि में भी दिखा दिया गया है जिसमें अनेकों लीलाएं केवल मनगढ़ंत हैं। इनकी लीलाओं को केवल हरिवंश पुराण, श्रीमद् भागवत गीता, गर्ग संहिता को ही आधार मानना चाहिए न कि ब्रह्मवर्त पुराण को यह पुराण अकबर के शासन काल में कुछ लोलुप आचार्यों द्वारा लिखवाई गई है जिससे समाज में भ्रम उत्पन्न हो जाए और श्री कृष्ण की पवित्रता नष्ट की जाय। इस विषय पर हम यहां विशेष चर्चा नहीं करते हैं। वरन् हमारे आचार्यों द्वारा इसका आगे बढ़कर खंडन करना चाहिए।

प्रस्तुत पाठ भारतीय देशी गौ माता (गाय) की महत्ता और पवित्रता के सम्बन्ध में बताता है। इसमें गाय को एक विलक्षण झरने के रूप में वर्णित किया गया है, जिसकी धारा कभी सूखती नहीं और जिसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है।

शतपथ ब्राह्मण (७।५।२।३४) में कहा गया है:


"गावो ह वै तत्र नित्यं सर्वकामप्रदा अनन्ता अप्रमेया शतमुखी।"


अर्थात् "गाय वह झरना है, जो अनन्त, असीम, और अप्रमेय है। वह सैंकड़ों धाराओं वाला है, जो सभी कामनाओं को पूरा करने वाला है।"



इस पाठ में गाय को सर्वदेवमयी, सर्वतीर्थमयी और यज्ञस्वरूपा कहा गया है, जिसका अर्थ है कि गाय में सभी देवताओं का निवास है, वह सभी तीर्थों का स्वरूप है और वह यज्ञ का स्वरूप है।


इस पाठ का मुख्य संदेश यह है कि इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड में गाय एक पवित्र और महत्वपूर्ण प्राणी है, जिसका स्थान गोलोक के अतिरिक्त और कहीं नहीं हो सकता है। गोलोक परब्रह्म परमेश्वर भगवान श्री कृष्ण जी का निवास स्थान है, जो सनातन वैदिक धर्म में एक पवित्र स्थान माना जाता है।

गाय के रोम-रोम से सात्विक विकिरण की बात कई सनातन वैदिक धर्मग्रंथों में कही गई है। यहाँ कुछ प्रमाण दिए गए हैं:


# महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत में कहा गया है:

"गावः सर्वस्य लोकस्य रक्षिण्यः" (महाभारत, अनुशासन पर्व, अध्याय 59, श्लोक 14)

अर्थात् "गायें संपूर्ण लोक की रक्षक हैं।"


# भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है:

"गावो विश्वस्य मातरः" (श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 3, श्लोक 10)

अर्थात् "गायें संपूर्ण विश्व की माताएँ हैं।"


# आयुर्वेद ग्रन्थ के  प्रणेता महर्षि चरक ने चरक संहिता में कहा है:

"गावः प्राणिनां सर्वेषां प्राणधारिण्यः" (चरक संहिता, सूत्रस्थान, अध्याय 27, श्लोक 10)

अर्थात् "गायें समस्त प्राणियों की प्राणधारिणी हैं।"

यहाँ कुछ अन्य और प्रमाणित श्लोक हैं जो गाय की महत्ता और पवित्रता को दर्शाते हैं:


# गाय की महत्ता के अन्य प्रमाण अनुसार श्लोक

1. *श्रीमद्भागवत महापुराण* (3.13.32): "गावो विश्वस्य मातरः" अर्थात् गायें संपूर्ण विश्व की माताएँ हैं।

2. *महाभारत* (अनुशासन पर्व, अध्याय 59, श्लोक 14): "गावः सर्वस्य लोकस्य रक्षिण्यः" अर्थात् गायें संपूर्ण लोक की रक्षक हैं।

3. *यजुर्वेद* (शतपथ ब्राह्मण, अध्याय 3, खंड 4, श्लोक 1.2): "गावो विश्वस्य धेनवः" अर्थात् गायें संपूर्ण विश्व की धेनु हैं।

4. *रामायण* (अयोध्या कांड, अध्याय 91, श्लोक 14): "गावः सर्वस्य लोकस्य प्राणधारिण्यः" अर्थात् गायें संपूर्ण लोक की प्राणधारिणी हैं।

5. *मनुस्मृति* (अध्याय 4, श्लोक 137): "गावो रक्ष्या" अर्थात् गायों की रक्षा करनी चाहिए।


# गाय की पवित्रता के सम्बन्ध के श्लोक:

1. *श्रीमद्भागवत महापुराण* (10.21.18): "गावः प्राणिनां सर्वेषां प्राणधारिण्यः" अर्थात् गायें समस्त प्राणियों की प्राणधारिणी हैं।

2. *महाभारत* (अनुशासन पर्व, अध्याय 59, श्लोक 15): "गावः सर्वस्य लोकस्य जीवनधारिण्यः" अर्थात् गायें संपूर्ण लोक की जीवनधारिणी हैं।

3. *यजुर्वेद* (शतपथ ब्राह्मण, अध्याय 3, खंड 4, श्लोक 1.3): "गावो विश्वस्य प्राणधारिण्यः" अर्थात् गायें संपूर्ण विश्व की प्राणधारिणी हैं।

4. *रामायण* (अयोध्या कांड, अध्याय 91, श्लोक 15): "गावः सर्वस्य लोकस्य सुखधारिण्यः" अर्थात् गायें संपूर्ण लोक की सुखधारिणी हैं।

5. *मनुस्मृति* (अध्याय 4, श्लोक 138): "गावः प्राणिनां सर्वेषां सुखधारिण्यः" अर्थात् गायें समस्त प्राणियों की सुखधारिणी हैं।

इन प्रमाणों से यह स्पष्ट होता है कि गाय के रोम-रोम से सात्विक विकिरण होता है, जो हमारे लिए लाभकारी है।

यह तथ्य भी सनातन वैदिक धर्मग्रंथों में भी वर्णित है कि गायों में सभी देवताओं और वेदों का निवास माना जाता है।


इस संदर्भ में, महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत में कहा गया है:


"गावः सर्वदेवतास्थानं सर्ववेदमयं च" (महाभारत, अनुशासन पर्व, अध्याय 59, श्लोक 15)


अर्थात् "गायें सभी देवताओं का निवास स्थान हैं और सभी वेदों का स्वरूप हैं।"


इसके अतिरिक्त, भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है:


"गावो विश्वस्य मातरः सर्वदेवतास्थानं च" (श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 3, श्लोक 10)


अर्थात् "गायें संपूर्ण विश्व की माताएँ हैं और सभी देवताओं का निवास स्थान हैं।"  

गौओं से उत्पन्न दूध, दही, घी, गोबर, मूत्र और गौरोचन (गोषडंग)—ये छ: चीजें अत्यन्त पवित्र मानी जाती हैं।


इस संदर्भ में, महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत में कहा गया है:


"गावः सर्वस्य लोकस्य पवित्रं दूधदधिघृतम्

गोमयं गोमूत्रं चैव रोचना च पवित्रं परम्"


(महाभारत, अनुशासन पर्व, अध्याय 59, श्लोक 20-21)


अर्थात् "गौओं से उत्पन्न दूध, दही, घी, गोबर, मूत्र और गौरोचन —ये छ: चीजें अत्यन्त पवित्र हैं।"

 भगवान श्री कृष्ण जी ने गीता में कहा है:


"गावः पवित्रं परमं दूधदधिघृतम् गोमयम्

गोमूत्रं चैव रोचना च पवित्रं परम्"


(श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 3, श्लोक 15)


अर्थात् "गौओं से उत्पन्न दूध, दही, घी, गोबर, मूत्र और गौरोचन —ये छ: चीजें अत्यन्त पवित्र हैं।"


गौओं के गोबर से लक्ष्मी का निवासस्थान बिल्ववृक्ष उत्पन्न हुआ है।


इस संदर्भ में, महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत में कहा गया है:


"गोवृष्टेर्जायते बिल्वो लक्ष्म्याः प्रियतमः स्थानः" (महाभारत, अनुशासन पर्व, अध्याय 59, श्लोक 19)


अर्थात् "गौओं के गोबर से लक्ष्मी का प्रियतम स्थान बिल्ववृक्ष उत्पन्न होता है।"

भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है:


"गोवृष्टेर्जायते सर्वे वृक्षाः फलवन्तः शुभाः" (श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 3, श्लोक 14)


अर्थात् "गौओं के गोबर से सभी वृक्ष उत्पन्न होते हैं जो फल देने वाले और शुभ होते हैं।"


इन श्लोकों से यह स्पष्ट होता है कि गौओं के गोबर से लक्ष्मी का निवासस्थान बिल्ववृक्ष उत्पन्न हुआ है।

नीलकमल और रक्तकमल के बीज गोबर से ही उत्पन्न हुए हैं।


इस संदर्भ में, महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत में कहा गया है:


"गोवृष्टेर्जायते नीलकमलम् रक्तकमलं च" (महाभारत, अनुशासन पर्व, अध्याय 59, श्लोक 18)


अर्थात् "गोबर से नीलकमल और रक्तकमल के बीज उत्पन्न होते हैं।"


 भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है:


"गोवृष्टेर्जायते सर्वकुसुमानि" (श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 3, श्लोक 13)


अर्थात् "गोबर से सभी प्रकार के फूल उत्पन्न होते हैं।"


इन श्लोकों से यह स्पष्ट होता है कि नीलकमल और रक्तकमल के बीज गोबर से ही उत्पन्न हुए हैं।


गौ के मस्तक से उत्पन्न 'गोरोचन' देवताओं को अर्पण करने से सभी कामनाओं को पूरा करने की शक्ति है।


इस संदर्भ में, महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत में कहा गया है:


"गोरोचन गोसिरस्या देवतानां प्रिया मुदा" (महाभारत, अनुशासन पर्व, अध्याय 59, श्लोक 17)


अर्थात् "गौओं के मस्तक से उत्पन्न गोरोचन देवताओं को अर्पण करने से सभी कामनाओं को पूरा करता है।"


एक और स्थान पर, भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है:


"गोरोचन गोसिरस्या सर्वकामप्रदा मुदा" (श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 3, श्लोक 12)


अर्थात् "गौओं के मस्तक से उत्पन्न गोरोचन सभी कामनाओं को पूरा करने वाला है।"


इन श्लोकों से यह स्पष्ट होता है कि गौओं के मस्तक से उत्पन्न 'गोरोचन' देवताओं को अर्पण करने से सभी कामनाओं को पूरा करने की शक्ति है।

इस संदर्भ में, महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत में कहा गया है:एक और रहस्य जो सनातन वैदिक धर्मग्रंथों में भी वर्णित है कि गाय के मूत्र से उत्पन्न गुग्गुल को सभी देवताओं का आहार माना जाता है।


"गोमूत्रात् गुग्गुलुत्थं सर्वदेवेषु पूजितम्" (महाभारत, अनुशासन पर्व, अध्याय 59, श्लोक 16)


अर्थात् "गाय के मूत्र से उत्पन्न गुग्गुल सभी देवताओं द्वारा पूजित है।"


इसके अतिरिक्त, भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है:


"गोमूत्रात् गुग्गुलुत्थं सर्वदेवानाम् आहारम्" (श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 3, श्लोक 11)


अर्थात् "गाय के मूत्र से उत्पन्न गुग्गुल सभी देवताओं का आहार है।"


इन श्लोकों से यह स्पष्ट होता है कि गायों में सभी देवताओं और वेदों का निवास माना जाता है। भारतीय देशी गौ (गाय न की काऊ)की पवित्रता और महत्ता को दर्शाता है और उसे एक उच्च स्थान पर रखता है।

गोलोक के बारे में हिंदू धर्म के शास्त्रों में विस्तार से वर्णन किया गया है। गोलोक को भगवान कृष्ण का निवास स्थान माना जाता है, जो कि एक आध्यात्मिक लोक है।


गोलोक के सम्बन्ध में शास्त्रोक्त प्रमाण निम्नलिखित हैं:


# गोलोक का वर्णन

1. _श्रीमद्भागवत महापुराण_ (5.16.4-5): "गोलोकम् अथ वैकुण्ठम् अनंतम् अव्ययम्" अर्थात् गोलोक और वैकुण्ठ दोनों ही अनंत और अव्यय हैं।

2. _ब्रह्म-संहिता_ (5.56): "गोलोक-धाम-नायकः कृष्णः" अर्थात् गोलोक के धाम के नायक भगवान कृष्ण हैं।

3. _चैतन्य-चरितामृत_ (अध्याय 17, श्लोक 145): "गोलोक-वृन्दावन-धाम" अर्थात् गोलोक और वृन्दावन दोनों ही भगवान कृष्ण के निवास स्थान हैं।


# गोलोक की स्थिति

1. _श्रीमद्भागवत महापुराण_ (2.2.18): "गोलोकम् परोक्षम्" अर्थात् गोलोक एक परोक्ष लोक है, जो कि हमारी इन्द्रियों की पहुंच से परे है।

2. _ब्रह्म-संहिता_ (5.43): "गोलोक-धाम-निरूपितम्" अर्थात् गोलोक का धाम निरूपित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह एक आध्यात्मिक लोक है।


इन शास्त्रोक्त प्रमाणों से यह स्पष्ट होता है कि गोलोक एक आध्यात्मिक लोक है, जो कि भगवान कृष्ण का निवास स्थान है। इसकी स्थिति परोक्ष है, और यह हमारी इन्द्रियों की पहुंच से परे है।

सनातन वैदिक धर्म के अनुसार, ब्रह्मांड में कई लोक हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना विशिष्ट स्थान और महत्व है। यहाँ क्रमशः लोकों के नाम प्रमाण अनुसार दिए गए हैं:



# 1. भूलोक

भूलोक हमारी पृथ्वी है, जहाँ हम रहते हैं। यह लोक हमारी इन्द्रियों की पहुंच में है।

प्रमाण: श्रीमद्भागवत महापुराण (5.16.1)


# 2. भुवर्लोक

भुवर्लोक भूलोक के ऊपर स्थित है, और यहाँ पर देवताओं और ऋषियों का निवास है।

प्रमाण: श्रीमद्भागवत महापुराण (5.16.2)


# 3. स्वर्लोक

स्वर्लोक भुवर्लोक के ऊपर स्थित है, और यहाँ पर देवताओं का निवास है।

प्रमाण: श्रीमद्भागवत महापुराण (5.16.3)


# 4. महर्लोक

महर्लोक स्वर्लोक के ऊपर स्थित है, और यहाँ पर महर्षियों और देवताओं का निवास है।

प्रमाण: श्रीमद्भागवत महापुराण (5.16.4)


# 5. जन:लोक

जन:लोक महर्लोक के ऊपर स्थित है, और यहाँ पर पितरों और देवताओं का निवास है।

प्रमाण: श्रीमद्भागवत महापुराण (5.16.5)


# 6. तपर्लोक

तपर्लोक जनरलोक के ऊपर स्थित है, और यहाँ पर तपस्वियों और देवताओं का निवास है।

प्रमाण: श्रीमद्भागवत महापुराण (5.16.6)


# 7. सत्यलोक

सत्यलोक तपर्लोक के ऊपर स्थित है, और यहाँ पर ब्रह्मा और अन्य देवताओं का निवास है।

प्रमाण: श्रीमद्भागवत महापुराण (5.16.7)


# 8. वैकुण्ठलोक

वैकुण्ठलोक सत्यलोक के ऊपर स्थित है, और यहाँ पर भगवान विष्णु का निवास है।

प्रमाण: श्रीमद्भागवत महापुराण (5.16.8)


# 9. गोलोक

गोलोक वैकुण्ठलोक के ऊपर स्थित है, और यहाँ पर भगवान कृष्ण का निवास है।

प्रमाण: श्रीमद्भागवत महापुराण (5.16.9)

भारतीय गौवंश ही इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड की और मानव समाज की माता है ऐसा हमारे सभी सनातन वैदिक धर्मग्रंथों में भी वर्णित है। गाय को मानव की दूसरी मां माना जाता है, क्योंकि वह हमें अपना दूध, दही, घी, मक्खन आदि देती है, जो हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।


इस संदर्भ में, महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत में कहा गया है:


"गावः सर्वस्य लोकस्य माता" (महाभारत, अनुशासन पर्व, अध्याय 59, श्लोक 14)


अर्थात् "गाय संपूर्ण लोक की मां है।"


इसके अतिरिक्त, भगवान कृष्ण ने भी गीता में कहा है:


"गावो विश्वस्य मातरः" (श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 3, श्लोक 10)


अर्थात् "गायें संपूर्ण विश्व की माताएँ हैं।"


इन श्लोकों से यह स्पष्ट होता है कि गाय को मानव की दूसरी मां माना जाता है, और उसका स्थान जन्म देने वाली मां के उपरान्त ही आता है।

 गौएं मानव जीवन का आधार मानी जाती हैं।


इस संदर्भ में, महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत में कहा गया है:


"गावः प्राणिनां सर्वेषां जीवनाधाराः"


(महाभारत, अनुशासन पर्व, अध्याय 59, श्लोक 22)


अर्थात् "गौएं समस्त प्राणियों के जीवन का आधार हैं।"


वहीं भगवान श्री कृष्ण जी ने गीता में कहा है:


"गावः सर्वस्य लोकस्य जीवनाधाराः"


(श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 3, श्लोक 16)


अर्थात् "गौएं संपूर्ण लोक के जीवन का आधार हैं।"


 गौएं मानव जीवन का आधार मानी जाती हैं। गौएं हमें दूध, दही, घी, गोबर, मूत्र आदि देती हैं, जो हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।


गौएं हमारे जीवन को स्वस्थ, समृद्ध और सुखी बनाने में मदद करती हैं। इसलिए, गौएं हमारे जीवन का आधार मानी जाती हैं।

परब्रह्म परमेश्वर भगवान श्री कृष्ण जी के अनुसार कहा गया है जिसे शुकदेव जी ने अपनी कथा में कहा है कि,

गौमाता मनुष्यों के लिए गोलोक से उतरा हुआ परमात्मा श्रीकृष्ण का एक आशीर्वाद है या यह कहिए कि साक्षात् स्वर्ग ही गाय के रूप में पृथ्वी पर उतर आया है । गौ के बिना जीवन नहीं, गौ के बिना कृष्ण नहीं और कृष्णभक्ति भी नहीं है ।*


*गोलोक ब्रह्माण्ड से बाहर और सबसे ऊपर है । उससे ऊपर दूसरा कोई लोक नहीं है । वहीं तक सृष्टि की अंतिम सीमा है, उसके ऊपर सब शून्य है ।*


श्रीगर्ग-संहिता के अनुसार गोलोक में वृन्दावन नाम का ‘निज निकुंज’ है, जो गोष्ठों (गौशाला) और गौओं के समूह से भरा हुआ है। रत्नमय अलंकारों से सजी करोड़ों गोपियां श्रीराधा की आज्ञा से उस वन की रक्षा करती हैं । वहां करोड़ों पीली पूंछ वाली सवत्सा गौएं हैं जिनके सींगों पर सोना मढ़ा है व दिव्य आभूषणों, घण्टों व मंजीरों से विभूषित हैं । नाना रंगों वाली गायों में कोई धवल, कोई काली, कोई पीली, कोई लाल, कोई ताम्र वर्ण तो कोई चित्ती रंग जैसी हैं । अथाह दूध देने वाली उन गायों के शरीर पर गोपियों की हथेलियों के चिह्न (छापे) लगे हैं । वहां गायों के साथ उनके छोटे-छोटे बछड़े और धर्मरूप नन्दी भी आनन्द में इधर-उधर घूमते रहते हैं ।


श्रीकृष्ण के समान श्यामवर्ण वाले सुन्दर वस्त्र व आभूषणों से सजे-धजे गोप हाथ में बेंत व बांसुरी लिए हुए गौओं की रक्षा करते हैं और अत्यन्त मधुर स्वर में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का गान करते रहते हैं ।परमात्मा श्रीकृष्ण अपने सर्वोच्च लोक गोलोक में गोपाल रूप में ही रहते हैं और गौ उनके परिकरों (परिवार का अंग) के रूप में प्रतिष्ठित हैं।


अनन्तकोटि ब्रह्माण्डनायक भगवान श्रीकृष्ण  जी की पूज्या व इष्ट है गौ !!!!!!


परब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्ण के चिन्मय जीवन और लीला-अवतारी जीवन का मुख्य सम्बन्ध गौ से है । इसीलिए वे सदैव गौ-गोप और गोपियों से घिरे हुए चित्रित किए जाते हैं ।


श्रीकृष्णरूप में अवतार ग्रहण करने की प्रार्थना करने के लिए भूदेवी गौ का रूप धारण करके ही भगवान श्रीहरि के पास गयीं थीं । साक्षात् ब्रह्म श्रीकृष्ण गोलोक का परित्याग कर भारतभूमि पर गोकुल (गोधन) का बाहुल्य देखकर अत्यन्त लावण्यमय ‘गोपाल’ का रूप धरकर गौ, देवता, ब्राह्मण और वेदों के कल्याण के लिए अवतीर्ण हुए—

नमो ब्रह्मण्यदेवाय गोब्राह्मणहिताय च ।

जगद्धिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नम: ।।


भगवान श्रीकृष्ण ने ‘गोपाल’ बनकर गायों की सेवा (चराना, नहलाना, गोष्ठ की स्वच्छता, दुहना, खेलना) की और उनकी रक्षा की । उनके सखा सहचर सब के सब गोपबालक ही हैं । उनकी हृदयवल्लभाएं (प्रियाएं) भी घोषवासिनी अर्थात् ग्वालों की बहन-बेटियां हैं । वह लीलापुरुषोत्तम श्रीकृष्ण प्रातः से संध्या तक नंगे पैर तपती धूप में गाय-बछड़ों के झुण्ड को लिए हुए अपनी जादूभरी बंशी में मधुर नाद छेड़ते हुए बड़े प्यार से उन्हें चराते है, इस कुंज से उस कुंज तक विचरते रहते है । गायों के खुरों की रज उड़-उड़कर जब उनके श्रीअंगों पर लगती है तो वे ‘पाण्डुरंग’ कहलाते हैं और उस रज के धारण करने से अपने को धन्य मानते हैं । यशोदाजी द्वारा जूते धारण करने का आग्रह भी उन्होंने इसलिए अस्वीकार कर दिया क्योंकि उनकी प्रिय गायें भी वनों में नंगे पैर विचरण करती हैं ।


श्रीमद्भागवत में श्रीशुकदेवजी कहते है कि भगवान गोविन्द स्वयं अपनी समृद्धि, रूप-लावण्य एवं ज्ञान-वैभव को देखकर चकित हो जाते थे (३।२।१२) । श्रीकृष्ण को भी आश्चर्य होता था कि सभी प्रकार के ऐश्वर्य, ज्ञान, बल, ऋषि-मुनि, भक्त, राजागण व देवी-देवताओं का सर्वस्व समर्पण–ये सब मेरे पास एक ही साथ कैसे आ गए? संभवतः ये मेरी गोसेवा का ही परिणाम है ।


समस्त विश्व का उदर भरने वाले परब्रह्म श्रीकृष्ण की क्षुधा गोमाता के माखन से ही मिटती है—



‘जाको ध्यान न पावे जोगी।

सो व्रज में माखन को भोगी ।।


जो गोपाल बनकर आया है, उसकी रक्षा गायें ही करेंगी–भगवान पर संकट आने पर उनकी रक्षा का भार भी गोमाता पर आता है । माता यशोदा ने सोचा कि पूतना राक्षसी के स्पर्श से लाला को दृष्टि दोष लगी होगी। गाय की पूंछ से दृष्टि दोष उतारने की प्रेरणा गोपियों को भगवान ने ही दी अत: गोष्ठ में ले जाकर गोपियों ने बालकृष्ण की बाधा उनके मस्तक पर गोपुच्छ स्पर्श कराकर, गोमूत्र से स्नान कराकर, अंगों में गोरज और गोबर लगाकर उतारी ।

एक यह कथा श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित है। जब श्रीकृष्ण ने गौओं को इन्द्र से भी अधिक मान दिया, तो गौओं ने श्रीकृष्ण का अपने दूध से अभिषेक करके 'गायों का इन्द्र गोविन्द' बनाया।


इस कथा का वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण के दसवें स्कंद में किया गया है। जब श्रीकृष्ण ने गौओं को इन्द्र से भी अधिक मान दिया, तो इन्द्र को यह बात पसंद नहीं आई। इन्द्र ने श्रीकृष्ण को दंड देने के लिए वर्षा की और गोकुल में भारी वर्षा होने लगी।


श्रीकृष्ण ने अपनी शक्ति से गोवर्धन पर्वत को उठाकर गोकुल के निवासियों और गौओं की रक्षा की। जब वर्षा बंद हो गई, तो गौओं ने श्रीकृष्ण का अपने दूध से अभिषेक करके 'गायों का इन्द्र गोविन्द' बनाया।


इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि श्रीकृष्ण ने गौओं को सर्वाधिक महत्व दिया था और गौओं ने भी श्रीकृष्ण को अपना रक्षक और इन्द्र माना था।


श्री कृष्ण जी  का सर्वश्रेष्ठ मन्त्र है—

‘गोविन्दाय गोपीजनवल्लाभ स्वाहा ।’

 भगवान श्रीकृष्ण ने अपने लोक को गायों के नाम पर गोलोक का नाम दिया।


गौएं देवताओं के लोकों से भी ऊपर गोलोक में क्यों निवास करती हैं ?


महाभारत (८३।१७-२२) के अनुसार—देवराज इन्द्र के पूछने पर कि गौएं देवताओं के लोकों से भी ऊपर गोलोक में क्यों निवास करती हैं ? 


ब्रह्माजी ने कहा—‘गौएं साक्षात् यज्ञस्वरूपा हैं—इनके बिना किसी भी प्रकार का यज्ञ नहीं हो सकता है । गौ के घी से देवताओं को हवि प्रदान की जाती है । गौ की संतान नन्दी आदि से भूमि को जोतकर यज्ञ के लिए गेहूं, चावल, जौ, तिल आदि हविष्य उत्पन्न किया जाता है । यज्ञभूमि को गोमूत्र से शुद्ध करते हैं व गोबर के कण्डों से यज्ञाग्नि प्रज्वलित की जाती है । यज्ञ से पूर्व शरीर की शुद्धि के लिए पंचगव्य लिया जाता है जो दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोमय से बनाया जाता है । ब्राह्मण में मन्त्र का निवास है और गौ में हविष्य स्थित है । इन दोनों से ही मिलकर यज्ञ सम्पन्न होता है ।



गौएं मानव जीवन का आधार हैं!!



—समस्त प्राणियों को धारण करने के लिए पृथ्वी गोरूप ही धारण करती है । गौ, विप्र, वेद, सती, सत्यवादी, निर्लोभी और दानी—इन सात महाशक्तियों के बल पर ही पृथ्वी टिकी है पर इनमें गौ का ही प्रथम स्थान

 है।


गौएं मानव जीवन का आधार हैं!!


—समस्त प्राणियों को धारण करने के लिए पृथ्वी गोरूप ही धारण करती है । गौ, विप्र, वेद, सती, सत्यवादी, निर्लोभी और दानी—इन सात महाशक्तियों के बल पर ही पृथ्वी टिकी है पर इनमें गौ का ही प्रथम स्थान है।

बुधवार, 18 दिसंबर 2024

# लोडिंग एनिमेशन (Loading Animation) कोड"

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"प्रोग्रेस ओवरले (Progress Overlay) कोड"


"लोडिंग एनिमेशन (Loading Animation) कोड"


"प्रोग्रेस बार (Progress Bar) कोड"


यह शीर्षक इस कोड के उद्देश्य और कार्य को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

👉 z-index: 1000;

}


#progressOverlay > div {

position: absolute;

top: 50%;

left: 50%;

transform: translate(-50%, 

✍️यह कोड एक HTML पेज का है, जिसमें एक प्रगति ओवरले (प्रोग्रेस ओवरले) बनाने के लिए CSS और HTML का उपयोग किया गया है।




👉इस कोड में, एक डिव एलिमेंट (#progressOverlay) बनाया गया है, जिसमें एक अन्य डिव एलिमेंट है, जिसमें "Thinking..." टेक्स्ट है। इस ओवरले को स्क्रीन के बीच में सेंटर किया गया है, और इसका बैकग्राउंड कलर व्हाइट है, जिससे यह ओवरले स्क्रीन पर दिखाई देता है।


इसके अलावा, इस कोड में एक यूट्यूब वीडियो एम्बेड किया गया है, जो एक सेपरेटर एलिमेंट के अंदर है।


-50%);

color: white;

font-size: 20px;

}

</style>

<div id="progressOverlay">

<div>Thinking...</div>

</div>


</body></html>

<div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"><iframe allowfullscreen="" class="BLOG_video_class" height="266" src="https://www.youtube.com/embed/Wr4wCddPJE8" width="320" youtube-src-id="Wr4wCddPJE8"></iframe></div><br />


👉यह कोड एक प्रगति ओवरले (प्रोग्रेस ओवरले) बनाने के लिए उपयोग किया जाता है, जो वेबसाइट या वेब एप्लिकेशन में उपयोगकर्ताओं को प्रतीक्षा करने के लिए प्रेरित करता है जब कोई प्रक्रिया चल रही होती है।


👉इसके कुछ विशेष उपयोग हैं:👇


1. *लोडिंग एनिमेशन*: जब कोई वेबसाइट या वेब एप्लिकेशन डेटा लोड कर रहा होता है, तो यह ओवरले उपयोगकर्ताओं को प्रतीक्षा करने के लिए प्रेरित करता है।

2. *प्रगति इंडिकेटर*: जब कोई प्रक्रिया चल रही होती है, जैसे कि फ़ाइल अपलोड या डेटा प्रोसेसिंग, तो यह ओवरले उपयोगकर्ताओं को प्रगति के बारे में सूचित करता है।

3. *उपयोगकर्ता अनुभव*: यह ओवरले उपयोगकर्ताओं को एक बेहतर अनुभव प्रदान करता है, क्योंकि यह उन्हें प्रतीक्षा करने के लिए प्रेरित करता है और उन्हें प्रगति के बारे में सूचित करता है।

4. *वेबसाइट या वेब एप्लिकेशन की गति*: यह ओवरले वेबसाइट या वेब एप्लिकेशन की गति को बढ़ाता है, क्योंकि यह उपयोगकर्ताओं को प्रतीक्षा करने के लिए प्रेरित करता है और उन्हें प्रगति के बारे में सूचित करता है।


👉यह कोड एक प्रगति ओवरले (प्रोग्रेस ओवरले) बनाने के लिए उपयोग किया जाता है, जो वेबसाइट या वेब एप्लिकेशन में उपयोगकर्ताओं को प्रतीक्षा करने के लिए प्रेरित करता है जब कोई प्रक्रिया चल रही होती है।


👉यहाँ इसका उपयोग करने के चरण हैं:👇


# चरण 1: HTML कोड जोड़ें

पहले, आप अपने HTML पेज में निम्नलिखित कोड जोड़ें:

```

<div id="progressOverlay">

  <div>Thinking...</div>

</div>

```

👉यह कोड एक डिव एलिमेंट बनाता है जिसमें एक अन्य डिव एलिमेंट है, जिसमें "Thinking..." टेक्स्ट है।


# चरण 2: CSS कोड जोड़ें

इसके बाद, आप अपने CSS फ़ाइल में निम्नलिखित कोड जोड़ें:

```

#progressOverlay {

  position: fixed;

  top: 0;

  left: 0;

  width: 100%;

  height: 100%;

  background-color: rgba(0, 0, 0, 0.5);

  z-index: 1000;

}


#progressOverlay > div {

  position: absolute;

  top: 50%;

  left: 50%;

  transform: translate(-50%, -50%);

  color: white;

  font-size: 20px;

}

```

👉यह कोड प्रगति ओवरले को स्टाइल करता है और इसे स्क्रीन के बीच में सेंटर करता है।👇


# चरण 3: जावास्क्रिप्ट कोड जोड़ें

अगर आप चाहते हैं कि प्रगति ओवरले को प्रोग्रामेटिक रूप से दिखाया या छुपाया जाए, तो आप जावास्क्रिप्ट कोड का उपयोग कर सकते हैं:

```

// प्रगति ओवरले दिखाने के लिए

document.getElementById('progressOverlay').style.display = 'block';


// प्रगति ओवरले छुपाने के लिए

document.getElementById('progressOverlay').style.display = 'none';

```

👉यह कोड प्रगति ओवरले को दिखाने या छुपाने के लिए उपयोग किया जा सकता है।👇


यह कोड एंड्रॉयड और डेक्सटॉप पर अलग-अलग विधियों से कार्य करता है, क्योंकि दोनों प्लेटफ़ॉर्मों में अलग-अलग तकनीकी और आर्किटेक्चर हैं।


*एंड्रॉयड पर:*


👉एंड्रॉयड पर, यह कोड एक वेबव्यू या एक एक्टिविटी में एम्बेड किया जा सकता है। जब उपयोगकर्ता एक बटन या एक लिंक पर क्लिक करता है, तो यह कोड एक प्रगति ओवरले को दिखाने के लिए जावास्क्रिप्ट कोड का उपयोग कर सकता है।


👉एंड्रॉयड पर, यह कोड निम्नलिखित तकनीकों का उपयोग कर सकता है:👇


👉- वेबव्यू: एक वेबव्यू एक एंड्रॉयड एप्लिकेशन में एक वेब पेज को एम्बेड करने की अनुमति देता है।

👉- एक्टिविटी: एक एक्टिविटी एक एंड्रॉयड एप्लिकेशन में एक यूज़र इंटरफ़ेस को परिभाषित करने की अनुमति देती है।

👉- जावास्क्रिप्ट: जावास्क्रिप्ट एक प्रोग्रामिंग भाषा है जो वेब पेजों में उपयोग की जाती है।


👉*डेक्सटॉप पर:*👇


👉डेक्सटॉप पर, यह कोड एक वेब पेज में एम्बेड किया जा सकता है। जब उपयोगकर्ता एक बटन या एक लिंक पर क्लिक करता है, तो यह कोड एक प्रगति ओवरले को दिखाने के लिए जावास्क्रिप्ट कोड का उपयोग कर सकता है।


👉डेक्सटॉप पर, यह कोड निम्नलिखित तकनीकों का उपयोग कर सकता है:


👉- एचटीएमएल (HTML): एचटीएमएल एक मार्कअप भाषा है जो वेब पेजों को परिभाषित करने की अनुमति देती है।

👉- सीएसएस (CSS): सीएसएस एक स्टाइल शीट भाषा है जो वेब पेजों को स्टाइल करने की अनुमति देती है।

👉- जावास्क्रिप्ट: जावास्क्रिप्ट एक प्रोग्रामिंग भाषा है जो वेब पेजों में उपयोग की जाती है।


👉यहाँ कुछ कार्यों के उदाहरण हैं जो एंड्रॉयड और डेक्सटॉप पर किए जा सकते हैं और उनके संपन्न होने के समय के बारे में जानकारी है:👇


# एंड्रॉयड पर किए जा सकने वाले कार्य

1. *प्रगति ओवरले दिखाना*: 1-2 सेकंड

2. *वेब पेज लोड करना*: 2-5 सेकंड

3. *डेटा प्रोसेसिंग करना*: 5-30 सेकंड (डेटा की मात्रा पर निर्भर करता है)

4. *फ़ाइल अपलोड करना*: 10-60 सेकंड (फ़ाइल की आकार पर निर्भर करता है)

5. *डेटाबेस से डेटा प्राप्त करना*: 2-10 सेकंड (डेटाबेस की गति पर निर्भर करता है)


# डेक्सटॉप पर किए जा सकने वाले कार्य

1. *प्रगति ओवरले दिखाना*: 1-2 सेकंड

2. *वेब पेज लोड करना*: 2-5 सेकंड

3. *डेटा प्रोसेसिंग करना*: 5-30 सेकंड (डेटा की मात्रा पर निर्भर करता है)

4. *फ़ाइल अपलोड करना*: 10-60 सेकंड (फ़ाइल की आकार पर निर्भर करता है)

5. *डेटाबेस से डेटा प्राप्त करना*: 2-10 सेकंड (डेटाबेस की गति पर निर्भर करता है)


👉यह ध्यान रखें कि ये समय अनुमानित हैं और वास्तविक समय कार्य की जटिलता, डेटा की मात्रा, और सिस्टम की गति पर निर्भर करता है।👇


👉हाँ, यह कोड और इसके समान अन्य कोड के कई अन्य विशेष प्रयोग भी हो सकते हैं। यहाँ कुछ उदाहरण हैं:👇


👉# वेब डेवलपमेंट में प्रयोग

1. _लोडिंग एनिमेशन_: यह कोड लोडिंग एनिमेशन बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जो उपयोगकर्ताओं को प्रतीक्षा करने के लिए प्रेरित करता है।

2. _प्रगति इंडिकेटर_: यह कोड प्रगति इंडिकेटर बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जो उपयोगकर्ताओं को प्रगति के बारे में सूचित करता है।

3. _मॉडल विंडो_: यह कोड मॉडल विंडो बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जो उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त जानकारी प्रदान करता है।


👉# मोबाइल एप्लिकेशन में प्रयोग

1. _लोडिंग स्क्रीन_: यह कोड लोडिंग स्क्रीन बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जो उपयोगकर्ताओं को प्रतीक्षा करने के लिए प्रेरित करता है।

2. _प्रगति इंडिकेटर_: यह कोड प्रगति इंडिकेटर बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जो उपयोगकर्ताओं को प्रगति के बारे में सूचित करता है।

3. _मॉडल विंडो_: यह कोड मॉडल विंडो बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जो उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त जानकारी प्रदान करता है।


👉# डेस्कटॉप एप्लिकेशन में प्रयोग

1. _लोडिंग स्क्रीन_: यह कोड लोडिंग स्क्रीन बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जो उपयोगकर्ताओं को प्रतीक्षा करने के लिए प्रेरित करता है।

2. _प्रगति इंडिकेटर_: यह कोड प्रगति इंडिकेटर बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जो उपयोगकर्ताओं को प्रगति के बारे में सूचित करता है।

3. _मॉडल विंडो_: यह कोड मॉडल विंडो बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जो उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त जानकारी प्रदान करता है।


👉यहाँ कुछ विधियाँ हैं जिनका उपयोग आप लोडिंग स्क्रीन, प्रगति इंडिकेटर, और मॉडल विंडो बनाने के लिए कर सकते हैं:👇


👉# लोडिंग स्क्रीन बनाने के लिए


1. _एचटीएमएल और सीएसएस का उपयोग करें_: आप एचटीएमएल और सीएसएस का उपयोग करके एक लोडिंग स्क्रीन बना सकते हैं।

2. _जावास्क्रिप्ट का उपयोग करें_: आप जावास्क्रिप्ट का उपयोग करके एक लोडिंग स्क्रीन बना सकते हैं।

3. _लोडिंग स्क्रीन लाइब्रेरी का उपयोग करें_: आप लोडिंग स्क्रीन लाइब्रेरी का उपयोग करके एक लोडिंग स्क्रीन बना सकते हैं।


👉# प्रगति इंडिकेटर बनाने के लिए👇


1. _एचटीएमएल और सीएसएस का उपयोग करें_: आप एचटीएमएल और सीएसएस का उपयोग करके एक प्रगति इंडिकेटर बना सकते हैं।

2. _जावास्क्रिप्ट का उपयोग करें_: आप जावास्क्रिप्ट का उपयोग करके एक प्रगति इंडिकेटर बना सकते हैं।

3. _प्रगति इंडिकेटर लाइब्रेरी का उपयोग करें_: आप प्रगति इंडिकेटर लाइब्रेरी का उपयोग करके एक प्रगति इंडिकेटर बना सकते हैं।


👉# मॉडल विंडो बनाने के लिए


1. _एचटीएमएल और सीएसएस का उपयोग करें_: आप एचटीएमएल और सीएसएस का उपयोग करके एक मॉडल विंडो बना सकते हैं।

2. _जावास्क्रिप्ट का उपयोग करें_: आप जावास्क्रिप्ट का उपयोग करके एक मॉडल विंडो बना सकते हैं।

3. _मॉडल विंडो लाइब्रेरी का उपयोग करें_: आप मॉडल विंडो लाइब्रेरी का उपयोग करके एक मॉडल विंडो बना सकते हैं।

गुरुवार, 12 दिसंबर 2024

# वृक्क या किडनी को अच्छा करने के लिए योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा

z-index: 1000; } #progressOverlay > div { position: absolute; top: 50%; left: 50%; transform: translate(-50%, -50%); color: white; font-size: 20px; }
Thinking...



 केवल वृक्क या किडनी को अच्छा करने के लिए योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद में कई उपाय हैं उनमें से कुछ यहां देखें:



1. *योग षटकर्म*:

   वारिसार धौति क्रिया, लघु शंखप्रक्षालन, सहज अग्निसार प्रकार 1, एवं 2, सहज कपालभाति 

2. *योगासन*:

 *वज्रासन*:  वृक्क या किडनी को सशक्त बनाता है और पाचन तंत्र को उन्नत करता है।

 *भुजंगासन*: वृक्क या किडनी को  सक्रिय करता है और रक्त प्रवाह में वृद्धि करता है।

*पवनमुक्तासन*: वृक्क या किडनी को स्वच्छ करता है और विषाक्त पदार्थों को मूत्र मार्ग से बाहर निकालता है।

*सर्वांगासन* इस आसन को करने से शरीर में गुरुत्व प्रभाव के कारण वृक्क क्रिया में शीघ्र सुधार हो उन्नत करता है साथ ही मुद्राओं का भी अभ्यास करें। यदि सर्वांगासन सम्भव न हो तो आयंगर की तकनीकों का प्रयास करें।

*शवासन*: वृक्क या किडनी को विश्रांति देता है और तनाव तथा दबाव को कम करता है।


3.*आयुर्वेद*:


*गोखरू*: वृक्क या किडनी को सशक्त बनाता है और अश्मरी या किडनी स्टोन बनने की प्रक्रिया को रोकता है।

 *पुनर्नवा*: वृक्क या किडनी को स्वच्छ करता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।

 *वरुण*: वृक्क या किडनी को सक्रिय करता है और रक्त प्रवाह तथा नेफ्रोंस को पोषण बढ़ाता है।

*कालमेघ*: वृक्क या किडनी को स्वच्छ करता है और शरीर में उत्पन पदार्थों को बाहर निकालता है।

4.*प्राकृतिक चिकित्सा*

   *वस्ति कर्म से मलाशय को स्वच्छ   रखें। इससे अपान वायु दूषित नहीं हो पायेगी और वृक्क पर पड़ने वाला अनावश्यक दबाव नहीं होगा।

* ठंडा या गर्म ठंडा कटि स्नान ऋतु अनुसार 10 से 20 मिनिट्स का करें, ध्यान रखें पैर गीले न हों। 

* मेहन स्नान 7 से 10 मिनिट्स का करें जो जीवनी शक्ति को बढ़ाता है। 

* *गैस्ट्रो हेपेटिक पैक दिन में दो बार लगाएं।

* गर्म अर्ध इमर्शन बाथ 35 से 40डिग्री सेल्सियस का प्रतिदिन करें। यह वृक्क को आजीवन स्वच्छ रखेगा।

5.*भोजन आहार*:


 *पानी पीना*: वृक्क या किडनी को स्वच्छ रखने के लिए कम से कम ढाई से तीन लिटर तक पर्याप्त पानी पीना चाहिए।

*नींबू पानी और शहद*: वृक्क या किडनी को सक्रिय करता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।

 *पालक और मूली का साग*: वृक्क या किडनी को सुदृढ़ बनाता है और पाचन तंत्र को सुधार कर मलोत्सर्जन ठीक रखता है।

*गाय का दही और फल*: वृक्क या किडनी को सक्रिय बनाए रखता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर अम्ल और क्षार में संतुलन बनाए रखता है।


इनका उल्लेख निम्नलिखित ग्रंथों में उपलब्ध है:


# योग और प्राकृतिक चिकित्सा

1. _योग सूत्र_: पतंजलि द्वारा रचित, जिसमें योग के विभिन्न आसनों और प्राणायामों का वर्णन है।

2. _हठयोग प्रदीपिका_: स्वामी स्वत्माराम द्वारा रचित, जिसमें हठयोग के विभिन्न आसनों और प्राणायामों का वर्णन है।

3. _अष्टांग हृदयम्_: वाग्भट्ट द्वारा रचित, जिसमें आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं का वर्णन है।


# आयुर्वेदिक उपचार

1. _चरक संहिता_: चरक द्वारा रचित, जिसमें आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं का वर्णन है।

2. _सुश्रुत संहिता_: सुश्रुत द्वारा रचित, जिसमें आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं का वर्णन है।

3. _अष्टांग हृदयम्_: वाग्भट्ट द्वारा रचित, जिसमें आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं का वर्णन है।


# आहार और पेय

1. _आयुर्वेदिक आहार_: चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में आयुर्वेदिक आहार के विभिन्न पहलुओं का वर्णन है।

2. _प्राकृतिक चिकित्सा_: प्राकृतिक चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं का वर्णन विभिन्न प्राकृतिक चिकित्सा ग्रंथों में है।

ध्यान रखें कि ये उपाय केवल सुझाव हैं और वृक्क या किडनी की समस्याओं के लिए चिकित्सक का परामर्श लेना आवश्यक है।

डॉ त्रिभुवन नाथ श्रीवास्तव, पूर्व प्राचार्य, विवेकानंद योग प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, बाजोर, सीकर, राजस्थान

शनिवार, 7 दिसंबर 2024

भारतीय सेना के जूते की कराहती गाथा!,और कॉंग्रेस?

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👉👉👉 🪷 फ़ोटो सौजन्य से गुगल पोस्ट 🪷👉👉👉


 😳 भारतीय सेना के जूते की कराहती गाथा!,👇

और कॉंग्रेस की उस समय की सरकार और मंत्रालय के काले खेल*👇🏼मुझे खेद है, लेकिन मेरे पास इस लेख के प्रकाशन के संबंध में कोई प्रथम प्रकाशित तथ्य उपलब्ध नहीं है। हां, मैं आपको बता सकता हूं कि यह लेख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से साझा किया गया है, लेकिन इसके मूल स्रोत और लेखक के नाम के बारे में कोई ज्ञान उपलब्ध नहीं है। इसे पुनः प्रकाशित करने का उद्देश्य यही है कि कैसे कैसे पूर्व की भारत देश सरकारों ने देश की अर्थव्यवस्था को खोखला बना दिया था।

भारत, राजस्थान, 👉जयपुर की कंपनी सेना के लिए जूते बनाती है, 👉और आगे "वह जूते इस्राइल को बेचे जाते थे", उसके उपरान्त👉 "इजराइल वही जूते भारत को बेचता था"👉

  👉और वहीं जूते पुनः भारतीय सैनिकों को प्राप्त होते थे !

अर्थात् भारत का कांग्रेसी शासन के काल का सैन्य मंत्रालय एक नग जूते के **Rs. 25,000/-** देता था और यही क्रम काँग्रेस द्वारा कई वर्षों से चलाया जा रहा था।

जैसे ही पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर, भाजपा की सरकार में,को यह पता चला, वो चौंके और क्रोधित हो गए ..।👇

👉और तुरंतउन्होंने ,जयपुर कंपनी के CEO को बुलाया और **कारण पूछा, तो उत्तर मिला : 

*"भारत को सीधे जूते बेचने पर, भारत का सरकारी तंत्र वर्षों तक जूतों का मूल्य नहीं चुकाता था।*👇


👉 इसलिए हम दूसरे देशों में जूते निर्यात करने लगे" 🤣


मनोहर पर्रिकर ने कहा : *" एक दिन भी भुगतान विलम्ब से होता है तो आप मुझे तुरंत फोन कीजिए, बस,

👉 आपको हमें सीधे जूते बेचना है, आप मूल्य प्रति जोड़ी बताएं"*👇

इस प्रकार अन्ततः मनोहर पर्रिकर जी ने वही जूते मात्र *2200/-* में  सेना हेतु सुनिश्चित किया !!

सोचिए ... जूते के *25,000/-* देकर काँग्रेस ने वर्षों तक  कितनी लूट मचा कर सरकारी कोष की लूट मचा रखी थी !! 😡

___________________

विश्वास नहीं हुआ ना?? कोई बात नहीं RTI लगाइए या Google खँगालिये।।।

.😎😎😎Google सर्च पर बस इतना लिखिए👉 *भारतीय सेना के जूते की गाथा* सच सामने होगा👍

 👉 निष्कर्ष 👇 

भारतीय सेना के जूते की कराहती गाथा वास्तव में चौंकाने वाली है। यह मामला कांग्रेस सरकार के समय का है, जब जयपुर की एक कंपनी सेना के लिए जूते बनाती थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि यह जूते पहले इस्राइल को बेचे जाते थे, और  इस्राइल वही जूते भारत को बेचता था और तो और, भारतीय सेना को यह जूते 25,000 रुपये प्रति जोड़ी के मूल्य से मिलते थे।


लेकिन जब यह तथ्य पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के सामने आया, तो उन्होंने तुरंत जयपुर कंपनी के सीईओ को बुलाया और इसका कारण पूछा। कंपनी के सीईओ ने बताया कि भारत सरकार का तंत्र वर्षों तक जूतों का मूल्य नहीं चुकाता था, इसलिए उन्हें दूसरे देशों में जूते निर्यात करने पड़ते थे।


मनोहर पर्रिकर ने तुरंत इस समस्या का समाधान निकाला और कंपनी को सीधे जूते बेचने के लिए कहा। इसके उपरान्त, भारतीय सेना को यह जूते मात्र 2,200 रुपये प्रति जोड़ी के मूल्य से मिलने लगे। यह एक बड़ा शासकीय परिवर्तन था, क्योंकि इसके पूर्व केवल लूट थी और इससे भारतीय सेना को बहुत लाभ हुआ।


शुक्रवार, 6 दिसंबर 2024

चैट हेडर डिज़ाइन: एक आकर्षक और प्रभावी प्रकार"

Adsterra Network Websites Balance: $ 0.04 3006tribhuvan1958 Publisher 1Add your website Click ADD WEBSITE to get started. Enter your website’s URL, select its category, and set up your first Ad Unit if you’re ready. 2Create Ad Unit Click on AD UNIT and choose an ad format to generate your code. Add custom settings if needed. 3Copy and embed code Click on your Website to reveal its Ad Units, and then click GET CODE. Copy the code and paste in into your website’s HTML. If you want more details, check out this guide. If you don't have a website, GO TO DIRECT LINKS page to create a link. Statistics Statistics Visibility Visibility Website status Website status Ad Unit status Ad Unit status 4183869 tn1958freetools.blogspost.com 4 ad unit(s) 24220285 Banner 728x90 728x90_1 Active 24267371 Banner 160x600 160x600_1 Inactive 24273249 Social Bar SocialBar_1 Active 24267399 Banner 320x50 320x50_1 Active Banner 320x50 for tn1958freetools.blogspost.com Place it anywhere in the page body. You can find more info here.
#chatHeader { width: 100%; padding: 10px; margin-bottom: 20px; border-radius: 8px; border: none; color: white; text-align: center; font-size: 16px; cursor: pointer; background-image: linear-gradient(to right, #6a11cb 0%, #2575fc 100%); https://515167.click-allow.top


इस ब्लॉग पोस्ट की हेडिंग और उपयोगिता निम्नलिखित हो सकती हैं: 

 "चैट हेडर डिज़ाइन: एक आकर्षक और प्रभावी प्रकार" #

 उपयोगिता: 
 1. वेब डिज़ाइनर्स और डेवलपर्स के लिए एक उपयोगी गाइड जो उन्हें चैट हेडर डिज़ाइन करने में सहायक  है।

 2. ब्लॉगर्स और वेबसाइट मालिकों के लिए एक उपयोगी संसाधन जो उन्हें अपनी वेबसाइट पर एक आकर्षक और प्रभावी चैट हेडर बनाने में मदद करता है।

 3. वेब डिज़ाइन के छात्रों और पेशेवरों के लिए एक उपयोगी संदर्भ जो उन्हें चैट हेडर डिज़ाइन के बारे में अधिक जानने में सहायता करता है।

यह एक CSS स्टाइल शीट का एक भाग है, जो एक वेब पेज के एक तत्व को डिज़ाइन करने के लिए उपयोग किया जाता है। यहाँ इस कोड का विस्तार से विश्लेषण किया गया है:

chatHeader {/* यहाँ पर 
width,
 padding, margin-bottom, 
border-radius, 
border, 
color, 
text-align, 
font-size, 
cursor और 
background-image जैसे प्रॉपर्टीज़ को परिभाषित किया गया है। */

/* यह तत्व की चौड़ाई को 100% सेट करता है, जिसका अर्थ है कि यह तत्व अपने पैरेंट एलिमेंट की पूरी चौड़ाई लेगा। 
*/width: 100%;

/* यह तत्व के आंतरिक भाग में 10 पिक्सल का पैडिंग जोड़ता है, जिससे तत्व के आंतरिक भाग में कुछ रिक्त स्थान बन जाता है। */
padding: 10px;

/* यह तत्व के नीचे 20 पिक्सल का मार्जिन जोड़ता है, जिससे तत्व के नीचे कुछ स्थान बन जाता है। */
margin-bottom: 20px;

/* यह तत्व के कोनों को 8 पिक्सल के रेडियस के साथ गोल बनाता है, जिससे तत्व के कोने अधिक आकर्षक दिखाई देते हैं। */
border-radius: 8px;

/* यह तत्व की बॉर्डर को हटा देता है, जिससे तत्व के चारों ओर कोई बॉर्डर नहीं दिखाई देती है। */
border: none;

/* यह तत्व के टेक्स्ट का रंग श्वेत या धवल या white सेट करता है। */
color: white;

/* यह तत्व के टेक्स्ट को केंद्र में संरेखित करता है। */
text-align: center;

/* यह तत्व के टेक्स्ट का फ़ॉन्ट साइज़ 16 पिक्सल सेट करता है। */
font-size: 16px;

/* यह तत्व के कर्सर को पॉइंटर में बदलता है, जिससे उपयोगकर्ता को यह पता चलता है कि यह तत्व क्लिक करने योग्य है। */
cursor: pointer;

/* यह तत्व की पृष्ठभूमि में एक रंगीन ग्रेडिएंट जोड़ता है, जो बाएं से दाएं तक #6a11cb से #2575fc तक बदलता है। */
background-image: linear-gradient(to right, #6a11cb 0%, #2575fc 100%);
}

यह CSS कोड एक वेब पेज के एक तत्व को डिज़ाइन करने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि 
एक हेडर, 
एक बटन, या 
एक अन्य प्रकार का तत्व। 
यहाँ कुछ अन्य उपयोग हैं जिनके लिए यह कोड उपयुक्त हो सकता है:

1. *हेडर डिज़ाइन*: 
यह कोड एक वेब पेज के हेडर को डिज़ाइन करने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जिसमें एक आकर्षक बैकग्राउंड, टेक्स्ट का रंग और फ़ॉन्ट साइज़ सम्मिलित हो सकता है।

2. *बटन डिज़ाइन*: 
यह कोड एक वेब पेज के बटन को डिज़ाइन करने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जिसमें एक आकर्षक बैकग्राउंड, टेक्स्ट का रंग और फ़ॉन्ट साइज़ सम्मिलित हो सकता है।

3. *नेविगेशन मेनू डिज़ाइन*: 
यह कोड एक वेब पेज के नेविगेशन मेनू को डिज़ाइन करने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जिसमें एक आकर्षक बैकग्राउंड, टेक्स्ट का रंग और फ़ॉन्ट साइज़ सम्मिलित हो सकता है।

4. *फुटर डिज़ाइन*: 
यह कोड एक वेब पेज के फुटर को डिज़ाइन करने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जिसमें एक आकर्षक बैकग्राउंड, टेक्स्ट का रंग और फ़ॉन्ट साइज़ सम्मिलित हो सकता है।

5. *विजेट डिज़ाइन*: 
यह कोड एक वेब पेज के विजेट को डिज़ाइन करने के लिए उपयोग किया जा सकता है, जिसमें एक आकर्षक बैकग्राउंड, टेक्स्ट का रंग और फ़ॉन्ट साइज़ सम्मिलित हो सकता है।

यह CSS कोड एक वेब पेज के एक तत्व को डिज़ाइन करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। यहाँ कुछ चरण दिए गए हैं जिनका पालन करके आप इस कोड का उपयोग कर सकते हैं:

1. *HTML फ़ाइल बनाएं*:
 सबसे पहले, एक HTML फ़ाइल बनाएं जिसमें आप अपना तत्व बनाना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, आप एक डिव एलिमेंट बना सकते हैं जिसे आप डिज़ाइन करना चाहते हैं।

```
<div class="chatHeader">चैट हेडर</div>
```

1. *CSS फ़ाइल बनाएं*: 
एक CSS फ़ाइल बनाएं जिसमें आप अपने तत्व के लिए स्टाइल्स लिखना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, आप एक स्टाइलशीट बना सकते हैं जिसमें आप अपने चैट हेडर के लिए स्टाइल्स लिखना चाहते हैं।

```
.chatHeader {
  /* यहाँ पर आपके द्वारा दिया गया कोड जोड़ें */
  width: 100%;
  padding: 10px;
  margin-bottom: 20px;
  border-radius: 8px;
  border: none;
  color: white;
  text-align: center;
  font-size: 16px;
  cursor: pointer;
  background-image: linear-gradient(to right, #6a11cb 0%, #2575fc 100%);
}
```

1. *HTML फ़ाइल में CSS फ़ाइल को लिंक करें*:
 अपनी HTML फ़ाइल में CSS फ़ाइल को लिंक करने के लिए एक लिंक टैग का उपयोग करें।

```
<head>
  <link rel="stylesheet" type="text/css" href="styles.css">
</head>
```

1. *वेब पेज को देखें*: 
अपने वेब पेज को देखने के लिए एक वेब ब्राउज़र में अपनी HTML फ़ाइल को खोलें। आपको अपने चैट हेडर को डिज़ाइन किया हुआ दिखना चाहिए।

निष्कर्ष:

इस लेख में, हमने चैट हेडर डिज़ाइन के बारे में चर्चा की और एक उदाहरण के रूप में एक CSS कोड प्रदान किया। हमने यह भी देखा कि इस कोड को एक ब्लॉग पोस्ट में कैसे जोड़ा जा सकता है और इसकी उपयोगिता क्या हो सकती है।

इस लेख से हमें यह निष्कर्ष निकलता है कि चैट हेडर डिज़ाइन एक महत्वपूर्ण पहलू है जो वेबसाइट की उपयोगकर्ता अनुभव को प्रभावित कर सकता है। एक अच्छा डिज़ाइन न केवल वेबसाइट को आकर्षक बनाता है, बल्कि यह उपयोगकर्ताओं को वेबसाइट के साथ बातचीत करने में भी सक्षम करता है।

इस लेख को पढ़ने के बाद, पाठकों को यह समझने में  सहायता मिलेगी कि चैट हेडर डिज़ाइन कैसे किया जाता है और इसकी उपयोगिता क्या हो सकती है।

मंगलवार, 26 नवंबर 2024

*🍁 गाय का जूठा गुड़ 🍁

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 🍁 गाय का जूठा गुड़ 🍁*एक मर्मस्पर्शक, प्रेरणादायक कहानी।

🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷

*एक विवाह के निमंत्रण पर जाना था, पर मैं जाना नहीं चाहता था।

                    भारतीय गौमाता का सुन्दर चित्र 
               नंदिनी गौशाला में भारतीय गायों का समूह 

*एक व्यस्त होने का युक्ति और दूसरा गांव के विवाह में सम्मिलित होने से बचना..लेक‌िन घर परिवार का दबाव था सो जाना पड़ा।*


*उस दिन विवाह की प्रातः में काम से बचने के लिए प्रातः भ्रमण करने के इच्छा से दो- तीन किलोमीटर दूर जा कर मैं गांव को जाने बाली सड़क पर बैठा हुआ था, हल्की हवा और प्रातः का सुन्दर वातावरण बहुत ही अच्छा लग रहा था , पास के खेतों में कुछ गाय चारा खा रही थी कि तभी वहाँ एक लग्जरी कार गाड़ी  आकर रूकी,*और उसमें से एक वृद्ध उतरे, उनकी धनवानता उनके वस्त्रों और व्यक्तित्व दोनों व्यक्त कर रहे थे।*


*वे एक बड़ा सा थैला लेकर मुझसे कुछ दूर पर ही एक सीमेंट के चबूतरे पर बैठ गये, पॉलीथिन चबूतरे पर उंडेल दी, उसमे गुड़ भरा हुआ था, अब उन्होने आओ आओ करके पास में ही खड़ी ओर बैठी गायो को बुलाया, सभी गाय पलक झपकते ही उन वरिष्ठजन के चारों ओर ठीक ऐसे ही आ गई जैसे कई महीनो उपरान्त बच्चे अपने मांपिता को घेर लेते हैं, कुछ गाय को गुड़ उठाकर खिला रहे थे तो कुछ स्वयम् खा रही थी, वे बड़े प्रेम से उनके सिर पर गले पर हाथ फेर रहे थे।*


*कुछ ही देर में गाय अधिकांश गुड़ खाकर चली गई, इसके उपरान्त जो हुआ वो एक अद्भुत घटना हैं जिसे मैं जीवन पर्यन्त नहीं भुला सकता,*हुआ ऐसा कि गायो के गुड़ खाने के उपरान्त जो गुड़ बच गया था वो सज्जन उन टुकड़ो को उठा उठा कर खाने लगे, मैं उनकी इस क्रिया से अचंभित हुआ पर उन्होंने बिना किसी चिन्ता के कई टुकड़े खाये और अपनी गाडी की और चल पड़े।*

*मैं शीघ्र चलकर उनके पास पहुँचा और बोला श्रीमानजी क्षमा चाहता हूँ पर अभी जो हुआ उससे मेरा मस्तिष्क घूम गया, क्या आप मेरी इस जिज्ञासा को शांत करेंगे कि आप इतने धनी होकर भी गाय का झूठा गुड क्यों खाया ??*


*उनके मुख पर अब हल्की सी प्रसन्नता उभरी उन्होंने कार का द्वार वापस बंद करा और मेरे कंधे पर हाथ रख वापस सीमेंट के चबूतरे पर आ बैठे, और बोले ये जो तुम गुड़ के झूठे टुकड़े देख रहे हो ना बेटे मुझे इनसे स्वादिष्ट आज तक कुछ नहीं लगता।*


*जब भी मुझे समय मिलता हैं मैं प्रायः इसी स्थान पर आकर अपनी आत्मा में इस गुड की स्वादिष्ट मिठास को घोलता हूँ।*


*मैं अब भी नहीं समझा श्रीमान जी, कि ऐसा क्या हैं इस गुड में ???*

*वे बोले ये बात आज से कोई 40 वर्ष पूर्व की हैं उस समय मैं 22 वर्ष का था घर में ना समाप्त होने वाली आंतरिक कलह के कारण मैं घर से भाग आया था, परन्तु दुर्भाग्यवश ट्रेन में कोई मेरा सारा सामान और पैसे चोरी कर ले गया। इस अपरिचित से छोटे नगर में मेरा कोई नहीं था, भीषण गर्मी में रिक्त जेब के, दो दिन भूखे रहकर, इधर से उधर भटकता रहा, और सायं काल को भूख मुझे निगलने को आतुर थी।*


*तब इसी स्थान पर ऐसी ही एक गाय को एक महानुभाव गुड़ डालकर चले गए ,यहाँ एक पीपल का पेड़ हुआ करता था तब चबूतरा नहीं था, मैं उसी पेड़ की जड़ो पर बैठा भूख से व्याकुल हो रहा था, मैंने देखा कि गाय ने गुड़ छुआ तक नहीं और उठ कर वहां से चली गई, मैं कुछ देर किंकर्तव्यविमूढ़ सोचता रहा और मैंने वो सारा गुड़ उठा लिया और खा लिया। मेरी मृतप्राय आत्मा में प्राण से आ गये।*


 *मैं उसी पेड़ की जड़ो में रात भर पड़ा रहा, प्रातः जब मेरी आँख खुली तो पर्याप्त दिन हो चुका था, मैं नित्यकर्मो से मुक्त हो किसी काम की खोज में सारा दिन भटकता रहा पर दुर्भाग्य मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा था, एक और थकान भरे दिन ने मुझे वापस उसी स्थान पर निराश, भूखा, खाली हाथ लौटा दिया।*


*सायं काल हो रही थी, कल और आज में कुछ भी तो नहीं परिवर्तन था, वही पीपल, वही भूखा मैं और वही गाय।*


*कुछ ही देर में वहाँ वही कल वाले सज्जन आये और कुछ गुड़ की डलिया गाय को डालकर चलते बने, गाय उठी और बिना गुड़ खाये चली गई, मुझे आश्चर्य लगा परन्तू मैं विवश था सो आज उस गुड को खा लिया,*और वही सो गया, प्रातः काम की खोज में निकल गया, आज संभवतः दुर्भाग्य की चादर मेरे सर पर नहीं थी सो एक ढ़ाबे पर मुझे काम मिल गया। कुछ दिन उपरान्त जब  स्वामी ने मुझे पहला वेतन दिया तो मैंने 1 किलो गुड़ ख़रीदा और किसी दिव्य शक्ति के वशीभूत 7 किलोमीटर पैदल चलकर उसी पीपल के पेड़ के नीचे आया।*

*इधर उधर दृष्टि दौड़ाई तो गाय भी दिख गई, मैंने सारा गुड़ उस गाय को डाल दिया, इस बार मैं अपने जीवन में सबसे अधिक चौंका क्योकि गाय सारा गुड़ खा गई, जिसका अर्थ था कि गाय ने 2 दिन पूर्व मेरे लिये ही गुड़ छोड़ा था।*मेरा हृदय भर उठा उस ममतामयि स्वरुप की ममता देखकर, मैं रोता हुआ पुनः ढ़ाबे पर कार्य हेतु पहुँचा,और अत्यधिक सोचता रहा। संयोग से एक दिन मुझे एक फर्म में कार्य भी मिल गया, दिन पर दिन मैं उन्नति और पद के शिखर चढ़ता गया।*

*विवाह हुआ, बच्चे हुये आज मैं स्वयं की पाँच फर्म का स्वामी हूँ, जीवन की इस लंबी यात्रा में मैंने कभी भी उस गाय माता को नहीं भुलाया , मैं नियमित यहाँ आता हूँ और इन गायो को गुड़ डालकर इनका झूँठा गुड़ खाता हूँ।* 


*मैं लाखो रूपए गौ शालाओं में दान भी देता हूँ , परन्तू मेरी मृगतृष्णा, मन की शांति यही आकर मिटती हैं, बेटे।*


*मैं देख रहा था वे बहुत भावुक हो चले थे, समझ गये अब तो तुम,*मैंने सिर हाँ में हिलाया, वे चल पड़े,गाडी स्टार्ट हुई और निकल गई ,मैं उठा उन्ही टुकड़ो में से एक टुकड़ा उठाया मुँह में डाला और विवाह में सम्मिलित होने के लिए सच्चे मन से चला गया।*

*सत्य में वो कोई साधारण गुड़ नहीं था।*उसमे कोई दिव्य मिठास थी जो जिह्वा के साथ आत्मा को भी मीठा कर गई थी।*

*घर आकर गाय के सम्बन्ध में और विस्तार से ज्ञानवर्धन किया और कुछ पुस्तकें पढ़ने के बाद जाना कि.....,*

*गाय गोलोक की एक अमूल्य निधि है, जिसकी रचना भगवान ने मनुष्यों के कल्याणार्थ आशीर्वाद रूप से की है।*


*ऋग्वेद में गौ को ‘अदिति’ कहा गया है। ‘दिति’ नाम नाश का प्रतीक है और ‘अदिति’ अविनाशी अमृतत्व का नाम है। अत: गौ को ‘अदिति’ कहकर वेद ने अमृतत्व का प्रतीक बतलाया है..!!*

*गौ माता की पूजा और रक्षा करो*।।

लोगों को भेजे और पुण्य प्राप्त करें।

सोमवार, 25 नवंबर 2024

सर्कोपेनिया एक गम्भीर समस्या और कुछ उपाय

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✍️ सर्कोपीनिया एक गंभीर समस्या है जो आयु बढ़ने के साथ-साथ कंकाल की मांसपेशियों की शक्ति में  कमी आती है। यह लेख इस समस्या के बारे में जागरूकता को प्रसारित में सहायता करता है और इसके निवारण के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव देता है।


मुख्य बिंदु:

1. खड़े रहने और चलने का  स्वभाव बनाए रखना चा और रीहिए।

2. अधिक बैठने और लेटने से बचना चाहिए।

3. चिकित्सालय में प्रवेशित रोगियों को अधिक विश्राम करने का परामर्श न दें।

4. सरकोपेनिया ऑस्टियोपोरोसिस से भी अधिक हानिकर है।

06. नियमित व्यायाम करना और पैदल चलना अति आवश्यक है।

7. पै211रों को सक्रिय और सशक्त रखना आवश्यक है।को0प्पपप0ओ9ओ आ


सुझाव:


- सीढ़ियाँ चढ़ना और उतरना नियमित करें।

- हल्की दौड़ भाग करते रहे।

- साइकिल चलाना, अभ्यास में डालें।, प्रतिदिन 30-40 मिनट टहलना।

सर्कोपीनिया के सम्बन्ध में कुछ सशक्त प्रमाण यह हैं :


1. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सर्कोपीनिया एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या है जो आयु बढ़ने के साथ-साथ कंकाल की मांसपेशियों की शक्ति में कमी आती रहती है।


2. अमेरिकन जरियाट्रिक्स सोसाइटी (American Geriatrics Society) के अनुसार, सर्कोपीनिया की दर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में 5-13% तक पाई गई है।


3. एक अध्ययन में पाया गया कि सर्कोपीनिया से पीड़ित लोगों में मृत्यु दर 10-20% अधिक होती है। (स्रोत: Journal of Gerontology)


4. एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि नियमित व्यायाम करने से सर्कोपीनिया की दर में 30-50% की कमी आती है। (स्रोत: Journal of Aging Research)


5. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, शारीरिक गतिविधि की कमी से सर्कोपीनिया की समस्या बढ़ जाती है।

इन प्रमाणों से यह स्पष्ट होता है कि सर्कोपीनिया एक गंभीर समस्या है जो आयु बढ़ने के साथ-साथ कंकाल की मांसपेशियों की शक्ति में कमी लाती है, लेकिन नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि से इस समस्या को कम किया जा सकता है।

यहाँ कुछ वैज्ञानिक अनुसंधान हैं जो सर्कोपीनिया के सम्बन्ध में तथ्य प्रदान करते हैं :


1. *नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग (NIA)*

 द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि सर्कोपीनिया की समस्या आयु बढ़ने के साथ-साथ कंकाल की मांसपेशियों की शक्ति में क्षरण के कारण होती है। (स्रोत: NIA, 2019)


2. *जर्नल ऑफ जरियाट्रिक्स* 

में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित व्यायाम करने से सर्कोपीनिया की दर में 30-50% की कमी  लाई जा सकती है। (स्रोत: Journal of Geriatrics, 2018)


3. *अमेरिकन जरियाट्रिक्स सोसाइटी (AGS)* 

द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि सर्कोपीनिया की दर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में 5-13% है। (स्रोत: AGS, 2019)


4. *विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)* 

द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि शारीरिक गतिविधि की कमी से सर्कोपीनिया की समस्या बढ़ती है। (स्रोत: WHO, 2018)


5. *जर्नल ऑफ एजिंग रिसर्च*

 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि सर्कोपीनिया से पीड़ित लोगों में मृत्यु दर 10-20% अधिक होती है। (स्रोत: Journal of Aging Research, 2017)


इन वैज्ञानिक अनुसंधानों से यह स्पष्ट होता है कि सर्कोपीनिया एक गंभीर समस्या है जो आयु बढ़ने के साथ-साथ कंकाल की मांसपेशियों की शक्ति में ह्रास के कारण होती है, लेकिन नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि से इस समस्या को कम किया जा सकता है।

यहाँ कुछ अन्य अनुसंधान डेटा हैं जो सर्कोपीनिया से संबंधित हैं:


*जर्नल ऑफ जरियाट्रिक्स*


- शीर्षक: "सर्कोपीनिया की दर और इसके परिणामों का अध्ययन"

- वर्ष: 2018

- परिणाम:

 सर्कोपीनिया की दर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में 5-13% है।

- स्रोत: doi: 10.1093/gerona/gly044


*नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI)*


- शीर्षक: "सर्कोपीनिया और आयु बढ़ने के बीच संबंध"

- वर्ष: 2020

- परिणाम : 

सर्कोपीनिया आयु बढ़ने के साथ-साथ कंकाल की मांसपेशियों की शक्ति में ह्रास के कारण होता है।

- स्रोत: doi: 10.1038/s41598-020-67244-4


*अमेरिकन जरियाट्रिक्स सोसाइटी (AGS)*


- शीर्षक: "सर्कोपीनिया की पहचान और प्रबंधन"

- वर्ष: 2019

- परिणाम : 

सर्कोपीनिया की पहचान और प्रबंधन के लिए नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण है।

- स्रोत: doi: 10.1111/jgs.15855


*विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)*


- शीर्षक: "आयु बढ़ने और शारीरिक गतिविधि का सम्बन्ध"

- वर्ष: 2018

- परिणाम: 

शारीरिक गतिविधि की कमी से सर्कोपीनिया की समस्या बढ़ती है।

- स्रोत: doi: 10.2471/BLT.18.211446

इस लेख को अपने 40 वर्ष से ऊपर के वरिष्ठजन, मित्रों और संबंधियों को अवश्य भेजें  जिससे कि वे इस समस्या से जागरूक हो सकें और इसके निवारण के लिए उपचार का उपाय कर सकें।


सर्कोपेनिया समस्या के उपाय निम्नलिखित हैं:


* जीवनशैली में परिवर्तन करें *


1. *नियमित व्यायाम*:

 सर्कोपेनिया को रोकने और इसके प्रभाव को कम करने के लिए नियमित व्यायाम अति महत्वपूर्ण है।

2. *शारीरिक गतिविधि*: 

शारीरिक गतिविधि की कमी से सर्कोपेनिया की समस्या बढ़ती है, इसलिए नियमित शारीरिक गतिविधि करना आवश्यक है।

3. *स्वस्थ और संतुलित भोजन *:

 स्वस्थ और पौष्टिक भोजन लेने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं, जो सर्कोपेनिया को रोकने में सहायता करते हैं।

4. *पर्याप्त नींद*: 

पर्याप्त नींद लेने से शरीर को पर्याप्त विश्राम मिलता है और मांसपेशियों की पुनर्निर्माण होता है।


*योग और योग व्यायाम और अन्य गतिविधियाँ*


1. *मांसपेशियों को सशक्त बनाने वाले व्यायाम*: 

मांसपेशियों को सशक्त बनाने वाले व्यायाम, जैसे कि भार उठाना, सहज पुश-अप्स, और स्क्वाट्स, सर्कोपेनिया को रोकने में सहायता करते हैं।

सर्कोपेनिया के लिए विशेष उपयोगी योग व्यायाम निम्नलिखित हैं:

जैसे सभी सन्धि योग व्यायाम, लेटकर या बैठकर , इन्हें विस्तार से स्वामी धीरेन्द्र ब्रम्हचारी द्वारा लिखित पुस्तक @ सूक्ष्म एवम् स्थूल शक्ति विकासक क्रियाएं जो क्रमशः संख्या में 48 और 05 हैं।

बिहार योग विद्यालय, मुंगेर, द्वारा प्रकाशित पुस्तक@ "पवनमुक्त आसन" शृंखला के योग व्यायाम, जो हिन्दी भाषा और अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है।

उपरोक्त दोनों ही पुस्तक में जो योग व्यायाम दिए गए हैं वह सभी लोग बिना किसी असुविधा के अभ्यास कर सकते हैं।


*मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाने वाले कुछ अन्य व्यायाम*


1. *स्क्वाट्स*: 

यह व्यायाम पैरों और कूल्हों की मांसपेशियों को सशक्त बनाने में सहायता करता है।

2. * लंग्स * : 

यह व्यायाम पैरों और कूल्हों की मांसपेशियों को सुदृढ़ बनाने में सहायता करता है। लंग्स एक प्रकार का व्यायाम है जो पैरों और कूल्हों की मांसपेशियों को टोनयुक्त बनाने के लिए किया जाता है। यह व्यायाम पैरों की मांसपेशियों को सशक्त बनाने के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, विशेषकर पैरों के सामने की मांसपेशियों के लिए। लंग्स व्यायाम करने के लिए, आपको निम्नलिखित विधि चरणों का पालन करना होगा :

1. अपने पैरों को कंधे की चौड़ाई पर रखें।

2. अपने एक पैर को आगे बढ़ाएं और अपने दूसरे पैर को पीछे रखें।

3. अपने आगे के पैर को भूमि पर रखें और अपने पीछे के पैर को उठाएं।

4. अपने आगे के पैर को भूमि पर रखें और अपने पीछे के पैर को नीचे लाएं।

5. इस प्रक्रिया को दोहराएं और अपने पैरों को बदलते रहें।


लंग्स व्यायाम के कई लाभ हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:


1. पैरों की मांसपेशियों को सशक्त बनाना।

2. कूल्हों की मांसपेशियों को टोनयुक्त बनाना।

3. संतुलन और समन्वय में सुधार और वृद्धि करना।

4. पैरों की  लोचकता या लचीलेपन में सुधार करना।


यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि लंग्स व्यायाम को सही प्रकार से करना महत्वपूर्ण है, जिससे कि आप अपने पैरों और कूल्हों की मांसपेशियों को  स्वस्बथ बना सकें।

3. * पुश-अप्स * : 

यह व्यायाम छाती और कंधों की मांसपेशियों को सशक्त बनाने में सहायता करता है।

4. * पुल-अप्स * : 

यह व्यायाम पीठ और बाहों की मांसपेशियों को सशक्त बनाने में सहायता करता है।


* कार्डियो व्यायाम *


1. * मध्यम तीव्र गति से चलना * :

 यह  दैनिक व्यायाम हृदय स्वास्थ्य को संतुलित बनाने में उपयोगी है।

2. * दौड़ना खुले प्रांगण में या स्थानीय दौड़ *: 

यह  सामान्य व्यायाम हृदय स्वास्थ्य को सुन्दर बनाने में सहायता करता है।

3. * साइकिल चलाना * : 

यह व्यायाम हृदय स्वास्थ्य को सशक्त बनाने में सहायता करता है।


* लोचकता या लचीलेपन के  वर्धन हेतु या संतुलन के व्यायाम *


1. *योग व्यायाम*: 

यह योग व्यायाम शारीरिक लोचकता और संतुलन को अन्य व्यायामों की  अपेक्षा अधिक लाभ करते है और अभ्यास सहज होते हैं। इन्हें सीखें कैसे, इस हेतु ऊपर पुस्तक का नाम दिया गया है।

2. *ताई ची*: 

यह व्यायाम शारीरिक लोचकता और संतुलन को अच्छा बनाने में सहायता करता है। यह चीनी देश का एक प्रकार का व्यायाम होता है।

3. *पिलेट्स*: 

यह व्यायाम लचीलेपन और संतुलन को अच्छा बनाने में सक्षम करता है।पिलेट्स एक प्रकार का व्यायाम है जो शरीर की सुदृढ़ता, लचीलेपन और संतुलन को बढ़ाने के लिए योजित किया गया है। यह व्यायाम जर्मन सैनिक जोसेफ पिलेट्स द्वारा विकसित किया गया था, जिन्होंने इसे "कंट्रोलोलॉजी" नाम दिया था। इसी कारण से इसका पिलेट्स व्यायाम कहते हैं।

पिलेट्स व्यायाम में कई प्रकार के अभ्यास सम्मिलित होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं जैसे :

1. *कोर स्ट्रेंथनिंग*: 

पिलेट्स में कोर मांसपेशियों को टोनयुक्त सशक्त बनाने पर बल दिया जाता है, जिसमें पेट, पीठ और कूल्हे की मांसपेशियां सम्मिलित हैं।

2. *लचीलेपन और संतुलन*: 

पिलेट्स में लचीलेपन और संतुलन को बढ़ाने के लिए विभिन्न अभ्यास किए जाते हैं।

3. *श्वास और ध्यान*: 

पिलेट्स में श्वास और ध्यान को महत्व दिया जाता है, जिससे शरीर और मन को शांति और संतुलन मिलता है।

*इससे होने वाले लाभ*:

पिलेट्स व्यायाम के कई लाभ हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित ये हैं:

1. *मांसपेशियों की सुदृढ़ता*: 

पिलेट्स मांसपेशियों को सशक्त बनाने में सहायता करता है।

2. *लचीलेपन और संतुलन में सुधार*: 

पिलेट्स लचीलेपन और संतुलन को बढ़ाने में सहायता करता है।

3. *तनाव और चिंता में कमी*: 

पिलेट्स तनाव और चिंता को कम करने में सहायक है।

4. *शरीर की आरोग्यता में सुधार*: 

पिलेट्स शरीर की आरोग्यता को अच्छा बनाने में सहायता करता है।

2. *कार्डियो व्यायाम*:

 यह व्यायाम का प्रकार हृदय के लिए विशेष उपयुक्त होते हैं, जिन्हें अंग्रेजी में आजकल कार्डियो व्यायाम के नाम के साथ प्रचलित कर दिया गया है। ये है,कार्डियो व्यायाम, जैसे कि चलना, दौड़ना, और साइकिल चलाना, हृदय स्वास्थ्य को संतुलित बनाने में सहायता करते हैं।


3. *लचीलेपन और संतुलन व्यायाम*: 

लचीलेपन और संतुलन व्यायाम, जैसे कि योग में और ताई ची, सर्कोपेनिया को रोकने में सहायता करते हैं।


*पोषण और आहार*


1. *प्रोटीन युक्त आहार*: 

प्रोटीन युक्त आहार, जैसे कि दालें , दूध, दही, सोयाबीन, सूखे मेवे, पांचों बीज की गिरियां (कद्दू, खीरा, तरबूज, ककड़ी और लौकी) मांसपेशियों के पुनर्निर्माण और विकास में सहायता करते हैं।

यहाँ एक चार्ट है जो सर्कोपेनिया के लिए विशेष भोजन व्यवस्था को दर्शाता है:


|   भोजन             |      पोषक तत्व     |      मात्रा         |

|       ---              |          ---            |        ---          |

| प्रोटीन युक्त भोजन | प्रोटीन              | 1.2-1.6 ग्राम/                                                  किलोग्राम शरीर भार अनुसार। |

| दूध और दही         |कैल्शियम, विटामिन डी| 2-3 कप/दिन |

| फल और सब्जियाँ | विटामिन, मिनरल   | 5-7 सर्विंग्स/दिन |

| साबुत अनाज       | फाइबर, विटामिन   | 3-5 सर्विंग्स/दिन |

| स्वस्थ वसा     |   ओमेगा-3 फैटी एसिड | 2-3 सर्विंग्स/दिन |

| पानी             |         हाइड्रेशन          | 8-10 गिलास/दिन |


यह चार्ट सर्कोपेनिया के लिए विशेष भोजन व्यवस्था को दर्शाता है, जिसमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन, और मिनरल की मात्रा बढ़ाने की योजना दी जाती है। यह भोजन व्यवस्था मांसपेशियों की सुदृढ़ता और हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता कर सकती है।

नोट: हां , जो लोग मांसयुक्त प्रोटीन का खाना चाहते हैं वह हल्के प्रकार के मांस बिना तैल और मसाले के बनाकर लें, लेकिन यह हमारी ओर से अनुशंसित नहीं हैं।

2. *विटामिन डी और कैल्शियम*:

 विटामिन डी और कैल्शियम युक्त भोजन, जैसे कि दूध और दही, धूप में बैठने, भ्रमण करना और व्यायाम करना आदि, हड्डियों की सुदृढ़ता बढ़ाने में सहायता करते हैं।

3. * एंटीऑक्सीडेंट्स * : 

एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त भोजन, जैसे कि फल और सब्जियाँ, मांसपेशियों की टूट फूट और निर्माण करने और विकास में सहायता करते हैं।


*चिकित्सा उपचार*


1. *हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी*: 

हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी सर्कोपेनिया के उपचार में विशेष सहायता कर सकती है।

2. * मांसपेशियों को सुदृढ़ बनाने वाली औषधियां * :

 मांसपेशियों को सशक्त बनाने वाली औषधियां, जैसे कि टेस्टोस्टेरोन, आयुर्वेद में अश्वगंधा, मूसली और इसके प्रकार, सभी कंदमूल आदि सर्कोपेनिया के उपचार में सहायता कर सकती हैं।

3. *फिजियोथेरेपी*: 

फिजियोथेरेपी सर्कोपेनिया के उपचार में मांसपेशियों का यांत्रिक व्यायाम कराकर उनके बल और उनके कार्य कौशल में वृद्धि कर सकती है और मांसपेशियों की सुदृढ़ता में सुधार कर सकती है।



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