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#टाइफाईड #(Typhoid)
परिचय: इस रोग के होने का सबसे प्रमुख कारण बैक्टीरिया का संक्रमण है। यह बैक्टीरिया व्यक्ति के शरीर में भोजन नली तथा पाचन तंत्र में चले जाते हैं और फिर वहां से वे रक्त में चले जाते हैं और कुछ दिनों के बाद व्यक्ति को रोग ग्रस्त कर देते हैं। इस रोग में रोगी के शरीर पर गुलाबी रंग के छोटे-छोटे दानों जैसे धब्बे निकल जाते हैं। इस रोग में रोगी की प्लीहा बढ़ जाती है और उसके पेट में असामान्यता बढ़ जाती है। इस रोग में व्यक्ति को सायं काल के समय में अधिक ज्वर हो जाता है और यह ज्वर कई दिनों तक रहता है।
#टाइफाईड #रोग के लक्षण-
1,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी के शरीर में हर समय ज्वर रहता है तथा यह ज्वर सायंकाल के समय और भी तेज हो जाता है।
2,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी के सिर में शूल भी रहता है।
3,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी को कभी-कभी वमन भी हो जाती है तथा उसका जी मिचलाता रहता है।
4,टाइफाईड रोग के रोगी को भूख नहीं लगती तथा उसकी जीभ पर मलिनता की परत सी दिखाई देती है।
5,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी के शरीर की मांस-पेशियों में शूल होता रहता है।
6,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी को विबंध तथा अतिसार की समस्या भी हो जाती है।
#टाइफाईड रोग होने का कारण-
1,टाइफाईड रोग एक प्रकार के जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है इस जीवाणु का नाम साल्मोनेला टाइफी ( एस. टाइफी) नामक जीवाणु के कारण होने वाला रोग है।टाइफाइड बुखार आंतों के मार्ग (आंतों/आंत) और कभी-कभी रक्तप्रवाह का एक जीवाणु संक्रमण है जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के कारण होता है। बैक्टीरिया का यह प्रकार केवल मनुष्यों में रहता है। यह एक असामान्य रोग है। इसे आंतों का ज्वर,मोतीझरा ज्वरऔर अंग्रेजी भाषा में Enteric fever तीव्र ज्वर कहा जाता है, जो कुछ सप्ताह तक बना रहता है, जो सालमोनिला टाइफोसा (Salmonella Typhosa) नामक जीवाणु द्वारा उत्पन्न होता है। रोग के प्रमुख लक्षणों में ज्वर, सिर पीड़ा, दुर्बलता, प्लीहा की (Spleenomegaly) तथा त्वचा पर दानों का उभड़ना होता है। मोती के झरने से साद्दश्य होने के कारण यह मोतझरा ज्वर कहलाया है। इसमें ज्वर 102 से 104 डिग्री फॉरेनहाइट तक चढ़ता है।
2, यह जीवाणु दूध तथा मक्खन में तेजी से पनपता है। जब कोई व्यक्ति इसके संक्रमण से प्रभावित चीजों का सेवन कर लेता है तो उसे टाइफाईड रोग हो जाता है।
3, यह जीवाणु पानी, नालियों में उत्पन्न होने वाले खाद्य पदार्थ, मक्खियों के शरीर से, मल-मूत्र से उत्पन्न होता है। जब कोई व्यक्ति इन वस्तुओं के सम्पर्क में आता है तो उसे टाइफाईड रोग हो जाता है।
4,जिन व्यक्तियों को टाइफाईड रोग हो चुका हो उसके सम्पर्क में यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति आ जाता है तो उसे भी टाइफाईड रोग हो जाता है।
5, यह जीवाणु किसी प्रकार से व्यक्ति के शरीर में पहुंच जाता है तो यह उसके शरीर के अंदर एक प्रकार का विष का निर्माण करता है जो रक्त के द्वारा स्नायु प्रणाली जैसे सारे अंगों में फैल जाता है जिसके कारण रोगी के शरीर में रक्तविषाक्तता की अवस्था प्रकट हो जाती है और उसे #टाइफाईड रोग हो जाता है।
टाइफाईड रोग का#प्राकृतिक चिकित्सा#से उपचार-
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1,टाइफाईड रोग को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को तब तक उपवास रखना चाहिए, जब तक कि उसके शरीर में टाइफाईड रोग होने के लक्षण दूर न हो जाए। फलों में तरबूज और अंगूर जो विटामिन सी, ए और बी6, जैसे पोषक तत्व अच्छी मात्रा में होते हैं जो टाइफाइड ज्वर के तापमान को कम करने में सहायता करते हैं। इसलिए, इन फलों या फलों के रस को टाइफाइड के रोगी के दैनिक आहार में सम्मिलित किया जाना चाहिए।सोयाबीन दाल का सूप और दूध रोग से लड़ते हुए बलवान बनाते हैं। इनके साथ ही # पके हुए केले, सेब, पपीता और इसी जैसे अन्य फल टाइफाइड में खाने के लिए अच्छे होते हैं। जहां तक आहार की बात है, तो आपको दलिया, पके हुए आलू, दाल का सूप, टोफू, मशरूम और अच्छे पके चावल(भात) जैसे सहजता से पचने वाले खाद्य पदार्थ लेने चाहिए।
2,इसके उपरान्त दालचीनी के काढ़े में काली मिर्च और मधु मिलाकर औषधि के रूप में लेना चाहिए। इससे रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
3,टाइफाईड रोग से पीड़ित व्यक्ति को ज्वर होने पर उसे लहसुन का काढ़ा बनाकर पिलाना चाहिए, इससे रोगी व्यक्ति को अधिक लाभ मिलता है।
4,टाइफाईड रोग से पीड़ित व्यक्ति को उपवास रखना चाहिए तथा इसके बाद धीरे-धीरे फल खाने प्रारम्भ करने चाहिए तथा इसके बाद सामान्य भोजन सलाद, फल तथा अंकुरित मूंग और मसूर दाल, दही को भोजन के रूप में लेना चाहिए। इस प्रकार से उपचार करने से टाइफाईड रोग शीघ्र ही ठीक हो जाता है।
5,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी के ज्वर को ठीक करने के लिए प्रतिदिन रोगी को गुनगुने पानी का एनिमा देना चाहिए तथा इसके बाद उसके पेट पर मिट्टी की गीली पट्टी लगानी चाहिए।
6,रोगी को आवश्यकतानुसार गर्म या ठंडा कटिस्नान तथा जलनेति भी कराना चाहिए जिसके फलस्वरूप टाइफाईड रोग शीघ्र ही ठीक हो जाता है।
7,यदि टाइफाईड रोग का प्रभाव अधिक तीव्र हो तो रोगी के माथे पर ठण्डी गीली पट्टी रखनी चाहिए तथा उसके शरीर पर स्पंज, गीली चादर लपेटनी चाहिए। इसके बाद उसे गर्मपाद स्नान क्रिया करानी चाहिए।
8,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी को जिस समय ज्वर तेज नहीं हो उस समय उसे कुंजल क्रिया करानी चाहिए। इससे टाइफाईड रोग में अधिक लाभ मिलता है।
9,यदि टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी को ठण्ड लग रही हो तो उसके पास में गर्म पानी की बोतल रखकर उसे कम्बल उढ़ा देना चाहिए। इससे रोगी को शीघ्र अधिक लाभ मिलता है।
10,रोगी के शरीर पर घर्षण क्रिया करने से भी टाइफाईड रोग शीघ्र ही ठीक हो जाता है।
11,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी को पूर्ण रूप से विश्राम करना चाहिए, क्योंकि इस ज्वर को पूर्णतः ठीक होने 3से 4सप्ताह लगते हैं।इसके बाद रोगी का उपचार प्राकृतिक चिकित्सा से करना चाहिए।
12,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी को सूर्यतप्त नीली बोतल का पानी हर 2-2 घंटे पर पिलाने से उसका ज्वर शीघ्र ही ठीक हो जाता है और टाइफाईड रोग भी ठीक होने लगता है।
13, सीत्कारी प्राणायाम, शीतली प्राणायाम, शवासन तथा ओमध्यान करने से भी रोगी को लाभ मिलता है।
15,टाइफाईड रोग से पीड़ित व्यक्ति को ठंडा स्पंज स्नान या ठंडा फ्रिक्शन स्नान कराने से उसके शरीर में स्फूर्ति उत्पन्न होती है और उसका ज्वर भी कम होने लगता है।
16,रोगी की रीढ़ की हड्डी पर बर्फ पानी की शीतल पट्टी रखने से ज्वर कम हो जाता है टाइफाईड रोग ठीक होने लगता है।
17,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी को खुला हवादार कक्ष रहने के लिए, हल्के ढीले वस्त्र पहनने के लिए तथा पर्याप्त विश्राम करना बहुत आवश्यक है।
18,जब रोगी व्यक्ति का ज्वर उतर जाता है और जीभ की श्वेत मलिनता कम हो जाती है तो उसे फलों का ताजा रस पीकर उपवास तोड़ देना चाहिए और इसके बाद फलों के ताजे रस को कच्चे सलाद, अंकुरित दालों व सूप का सेवन करना चाहिए ऐसा करने से उसे पुनः ज्वर नहीं होता है और टाइफाईड रोग संपूर्णता से ठीक हो जाता है।कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में बताया गया कि टमाटर का जूस साल्मोनेला टाइफी नाम के बैक्टीरिया को समाप्त कर सकता है। यह बैक्टीरिया ही टाइफाइड ज्वर का कारण बनता है। साथ ही टमाटर का जूस पाचन तंत्र और मूत्र वा मूत्रमार्ग में होने वाले संक्रमण को भी समाप्त कर सकता है।
19,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी को संतरे का रस दिन में 2 बार पीना चाहिए इससे ज्वर शीघ्र ही ठीक हो जाता है।
20,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी को तुलसी के पत्तों का सेवन कराने से अधिक लाभ मिलता है।
21,तुलसी की पत्तियों को उबालकर उसमें कालीमिर्च पाउडर और थोड़ी चीनी मिलाकर पीने से टाइफाईड रोग में लाभ मिलता है।
22,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी को दूध नहीं पीना चाहिए लेकिन यदि उसे दूध पीने की इच्छा हो तो दूध में पानी मिलाकर हल्का कर लेना चाहिए तथा इसमें 1 चम्मच मधु मिलाकर पीना चाहिए। इसमें चीनी बिल्कुल भी नहीं मिलानी चाहिए।
23,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी को अपने चारों ओर स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए और प्राकृतिक चिकित्सा से अपना उपचार कराना चाहिए।
24,टाइफाईड रोग से पीड़ित रोगी का ज्वर 3 दिन तक सामान्य स्थिति में रहे तो रोगी को पानी मिलाकर दूध पिलाना चाहिए या छैने का पानी तथा डबलरोटी के छोटे-छोटे टुकड़े को खिलाना चाहिए और रोगी को पूर्ण रूप से विश्राम करने के लिए कहना चाहिए। इस प्रकार से अपना उपचार प्राकृतिक चिकित्सा से कराने से रोगी कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
25, #पथ्य क्या करें:#
केला और पपीता,सभी कच्ची सब्जियां और फल का सेवन अच्छी प्रकार से स्वच्छ करके करें। इसके अतिरिक्त आपको तले हुए भोजन नहीं करना चाहिए, जैसे- समोसे, पकोडे, लड्डू और हलवा आदि। चटकदार और मसाले से परिपूर्ण भोजन जैसे- अचार, चटनी और तीव्र गन्ध वाली सब्जियों जैसे गोभी, शलगम, शिमला मिर्च, मूली, प्याज और कच्चे लहसुन का सेवन ना करे।
#डॉ त्रिभुवन नाथ श्रीवास्तव#