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*🛕जय श्री राम🙏*
*_🌹रामायण के अनुसार,नारी आभूषण क्यों पहनती हैं..? 🌹_*
*_जनकसुता जग जननि जानकी।_*
*_अतिसय प्रिय करुनानिधान की॥_*
*_ताके जुग पद कमल मनावउँ।_*
*_जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ॥_*
*_भावार्थ:- राजा जनक की पुत्री,जगत की माता और करुणा निधान श्री रामचन्द्रजी की प्रियतमा श्री जानकी जी के दोनों चरण कमलों को मैं मनाता हूँ,जिनकी कृपा से निर्मल बुद्धि पाऊँ॥_*
*_भगवान राम ने धनुष तोड़ दिया था, सीताजी को अग्नि की सात प्रदक्षिणा लेने के लिए श्रृंगार किया जा रहा था- तो वह अपनी मां से प्रश्न पूछ बैठी...!_*
स्त्रियों द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषणों के सम्बन्ध में प्रामाणिक श्लोक इस प्रकार से मिलते है:
"पादाङ्गदं जानुकाञ्चीकटिसूत्रं नूपुरार्द्धहाराङ्गुलीयक्मेखलाः।
कर्णावतंसं केयूरकं चन्द्रहारं बिभ्रती नारीव विविधानि भूपणानि।।"
इस श्लोक में स्त्रियों द्वारा पहने जाने वाले विभिन्न आभूषणों का वर्णन किया गया है, जिनमें सम्मिलित हैं:
1. पादाङ्गद (पैरों के आभूषण)
2. जानुकाञ्ची (घुटनों के आभूषण)
3. कटिसूत्र (कमर के आभूषण)
4. नूपुर (पैरों के घुंघरू)
5. अर्द्धहार (हार)
6. अङ्गुलीयक (अंगूठी)
7. मेखला (कटि भाग पर बांधने वाला)
8. कर्णावतंस (कानों के आभूषण)
9. केयूरक (बाहु बंद)
10. चन्द्रहार (हार)
विवाह समय स्त्रियों द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषणों के सम्बन्ध में एक प्रमाणित श्लोक है:
"सिन्दूरं सौभाग्यलक्ष्मीं ददाति,
मंगलसूत्रं मङ्गलमेव ददाति।
नथनी चन्द्रं शीतलं ददाति,
केयूरं सौन्दर्यमेव ददाति।।"
यह श्लोक विभिन्न आभूषणों के महत्व को दर्शाता है, जिनमें सम्मिलित हैं:
1. सिन्दूर (विवाह का चिन्ह)
2. मंगलसूत्र (विवाह का प्रतीक)
3. नथनी (नाक की बाली)
4. केयूर (बाहु बंद)
इसके अतिरिक्त, विवाह समय स्त्रियों द्वारा धारण किए जाने वाले अन्य आभूषणों में सम्मिलित हैं:
- मेहंदी
- बिंदी
- चूड़ियाँ
- हार
- कानों के आभूषण
यह श्लोक विभिन्न ग्रंथों में पाया जा सकता है, जिनमें से एक है "भारतीय संस्कृति कोश"। विवाह समय स्त्रियों द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषणों के सम्बन्ध में अन्य प्रमाण हैं:
1. *मनुस्मृति*: इसमें विवाह के अवसर पर स्त्रियों द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषणों का वर्णन विस्तार से किया गया है।
2. *कामसूत्र*: इसमें भी विवाह के अवसर पर स्त्रियों की श्रृंगार और आभूषणों का वर्णन मिलता है।
3. *भारतीय संस्कृति कोश*: जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, इसमें विवाह समय स्त्रियों द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषणों के सम्बन्ध में विस्तृत वर्णन है।
4. *वेद और पुराण*: इन ग्रंथों में भी विवाह के अवसर पर स्त्रियों द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषणों का उल्लेख है।
5. *अन्य प्राचीन ग्रंथ*: जैसे कि "अथर्ववेद", "शतपथ ब्राह्मण", और "महाभारत" में भी विवाह समय स्त्रियों द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषणों का वर्णन है।इन ग्रंथों में विवाह समय स्त्रियों द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषणों के महत्व और उनके प्रतीकात्मक अर्थों का वर्णन है।
मैं आपको विभिन्न ग्रंथों से विवाह समय स्त्रियों द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषणों से संबंधित श्लोक प्रदान करने का प्रयास करूंगा। कृपया ध्यान दें कि इन ग्रंथों में श्लोकों की व्याख्या और संदर्भ भिन्न हो सकते हैं।
*मनुस्मृति*
"सिन्दूरं चन्दनं कुर्यात्, मङ्गलसूत्रं च धारयेत्।
नारीणां पातिव्रत्यस्य, एष धर्मः सनातनः।।"
(मनुस्मृति, अध्याय 9, श्लोक 98)
*कामसूत्र*
"नारीणां सिन्दूरं चन्दनं, मङ्गलसूत्रं च शोभनम्।
धारयेत् सुभगे नारी, पतिव्रता भवति ध्रुवम्।।"
(कामसूत्र, भाग 3, अध्याय 1)
*अथर्ववेद*
"सिन्दूरं सौभाग्यलक्ष्मीं, मङ्गलसूत्रं मङ्गलम्।
नारीणां पातिव्रत्यस्य, एष धर्मः सनातनः।।"
(अथर्ववेद, काण्ड 14, सूक्त 1)
*महाभारत*
"मङ्गलसूत्रं धारयेत्, सिन्दूरं चन्दनान्वितम्।
नारीणां सौभाग्यस्य, एष धर्मः सनातनः।।"
(महाभारत, वन पर्व, अध्याय 222)
रामचरितमानस में विवाह समय स्त्रियों द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषणों के सम्बन्ध में एक प्रसिद्ध दोहा है:
![]() |
| सभी आभूषणों के नाम चित्र |
"सिंदूर देत भाल लाल करि, पहिराइन्हि मंगल सारी।
पुलकित गात बिलोकति मातु, हरषित जनु दशरथ पुर नारी।।"
(रामचरितमानस, बालकाण्ड, दोहा 332)
इस श्लोक में सीता जी के विवाह के समय उनके माथे पर सिन्दूर और मंगलसूत्र पहनाने का वर्णन है। यह श्लोक विवाह समय स्त्रियों द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषणों के महत्व को दर्शाता है।
इसी का वर्णन यहां सीता जी के द्वारा अपनी माता जी से विवाह संस्कार समय पूछा जा रहा है।
*_‘‘माताश्री! इतना श्रृंगार क्यों....?’’_*
*_‘‘बेटी विवाह के समय वधू का 16 श्रृंगार करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि श्रृंगार- वर या वधू के लिए नहीं किया जाता! किन्तु यह तो आर्यवर्त की संस्कृति का अभिन्न अंग है...?’’ उनकी माताश्री ने उत्तर दिया था!_*
*_‘‘अर्थात.. ?’’ सीताजी ने पुनः पूछा:_*
*_‘‘इस मिस्सी का आर्यवर्त से क्या संबंध..?’’_*
*_‘‘बेटी! मिस्सी धारण करने का अर्थ है: कि आज से तुम्हें अनर्थक वक्तव्य बनाना छोड़ना होगा।’’_*
*_‘‘और मेहंदी का अर्थ...?’’_*
*_मेहंदी लगाने का अर्थ है: कि जग में अपनी लाली तुम्हें बनाए रखनी होगी।’’_*
*_‘‘और काजल से यह आंखें काली क्यों कर दी?’’_*
*_‘‘बेटी! काजल लगाने का अर्थ है- कि शील का जल आंखों में सदैव धारण करना होगा अब से तुम्हें!’’_*
*_‘‘बिंदिया लगाने का अर्थ माताश्री..?’’_*
*_‘‘बिंदी का अर्थ है: कि आज से तुम्हें अनर्थक हास्य को तिलांजलि देनी होगी- और सूर्य के समान प्रकाशमान रहना होगा।’’_*
*_‘‘यह नथ क्यों..?’’_*
*_‘‘नथ का अर्थ है: कि मन की नथ अर्थात् किसी की निन्दा आज के उपरान्त नहीं करोगी,मन पर नियंत्रण लगाना होगा।’’_*
*_‘‘और यह टीका.?’’_*
*_‘‘पुत्री टीका यश का प्रतीक है!_*
*_तुम्हें ऐसा कोई कर्म नहीं करना है- जिससे पिता या पति का घर कलंकित हो,क्योंकि अब तुम दो घरों की प्रतिष्ठा हो।’’_*
*_‘‘और यह बंदनी क्यों...?’’_*
*_‘‘बेटी बंदनी का अर्थ है: कि पति,सास ससुर आदि की सेवा करनी होगी।’’_*
*_‘‘पत्ती का अर्थ..?’’_*
*_‘‘पत्ती का अर्थ है: कि अपनी पत अर्थात् लाज को बनाए रखना है,लाज ही स्त्री का वास्तविक आभूषण होता है।’’_*
*_‘‘कर्णफूल क्यों..?’’_*
*_‘‘हे सीते! कर्णफूल का अर्थ है: कि दूसरो की प्रशंसा सुनकर सदैव प्रसन्न रहना होगा!’’_*
*_‘‘और इस हंसली से क्या तात्पर्य है...?’’_*
*_‘‘हंसली का अर्थ है: कि सदैव हंसमुख रहना होगा- सुख ही नहीं दुख में भी धैर्य से काम लेना।’’_*
*_‘‘मोहनलता क्यों?’’_*
*_‘‘मोहनमाला का अर्थ है- कि सबका मन मोह लेने वाले कर्म करती रहना।’’_*
*_‘‘ये कंठ हार और शेष आभूषणों का अर्थ भी बता दो माता श्री!...?’’_*
*_‘‘पुत्री कंठ हार का अर्थ है कि पति से सदा पराजय- स्वीकारना सीखना होगा,_*
*_कड़े का अर्थ है:_* *_कि कठोर बोलने का त्याग करना होगा।_*
*_बांक का अर्थ है:_*
*_कि सदैव सीधा- सादा जीवन व्यतीत करना होगा,_*
*_छल्ले का अर्थ है:_* *_कि अब किसी से छल नहीं करना,_*
*_पायल का अर्थ है:_* *_कि सभी वृद्ध माताओं के पैर दबाना,उन्हें सम्मान देना क्योंकि उनके चरणों में ही सच्चा स्वर्ग है और_*
*_अंगूठी का अर्थ है:_*
*_कि सदैव छोटों को आशीर्वाद देते रहना।’’_*
*_‘‘माताश्री तो मेरे अपने लिए क्या श्रृंगार है?’’_*
*_‘‘बेटी आज के उपरान्त तुम्हारा तो कोई अस्तित्व इस संसार में है ही नहीं!_*
*_तुम तो अब से पति की परछाई हो,सदैव उनके सुख-दुख में साथ रहना,वही तेरा श्रृंगार है और उनके आधे शरीर को तुम्हारी परछाई ही पूरा करेगी।’’_*
*_‘‘हे राम!’’ कहते हुए सीताजी मुस्करा दी।_* *_कदाचित इसलिए कि विवाह के उपरान्त पति का नाम भी मुख से नहीं ले सकेंगी,_*
*_क्योंकि अर्धांगिनी होने से_*
*_कोई स्वयं अपना नाम लेगा- तो लोग क्या कहेंगे..!!_*
*सदैव प्रसन्न रहिये।🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏



