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| टर्ट-ब्यूटिलहाइड्रोक्विनोन |
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👉#TBHQ का अर्थ है #टर्ट-ब्यूटिलहाइड्रोक्विनोन (Tertiara
Butylhydroquinone)👇
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यह एक प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट है जो खाद्य पदार्थों में उपयोग किया जाता है जिससे कि उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा को बनाए रखा जा सके।
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| घर का स्वास्थ्यदायक भोजन |
TBHQ का उपयोग खाद्य उद्योग में व्यापक रूप से किया जाता है, विशेष रूप से तेल और वसा युक्त खाद्य पदार्थों में। इसका मुख्य उद्देश्य खाद्य पदार्थों के ऑक्सीकरण को रोकना है, जिससे उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा बनी रहती है।
TBHQ के कुछ मुख्य उपयोग हैं:
1. *खाद्य पदार्थों की सुरक्षा*: TBHQ खाद्य पदार्थों में ऑक्सीकरण को रोकता है, जिससे उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा बनी रहती है।
2. *तेल और वसा की गुणवत्ता*: TBHQ तेल और वसा युक्त खाद्य पदार्थों में ऑक्सीकरण को रोकता है, जिससे उनकी गुणवत्ता बनी रहती है।
3. *भोजन की शेल्फ लाइफ*: TBHQ खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ को बढ़ाता है, जिससे वे अधिक समय तक सुरक्षित और ताज़ा रहते हैं।
हालांकि, TBHQ के उपयोग के बारे में कुछ चिंताएं भी हैं। कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि TBHQ के अधिक सेवन से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जैसे कि कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं। इसलिए, खाद्य पदार्थों में TBHQ के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नियम और मानक बनाए गए हैं।
👉TBHQ के संभावित हानिकारक प्रभाव निम्नलिखित हैं:👇
1. *कैंसर की संभावना*: कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि TBHQ के अधिक सेवन से कैंसर का संभावना बढ़ सकती है, विशेष रूप से पेट और फेफड़ों के कैंसर का।
2. *न्यूरोटॉक्सिसिटी*: TBHQ के अधिक सेवन से न्यूरोटॉक्सिसिटी का जोखिम हो सकता है, जिससे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
3. *हार्मोनल असंतुलन*: TBHQ के अधिक सेवन से हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जिससे शरीर के विभिन्न कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
4. *प्रजनन समस्याएं*: कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि TBHQ के अधिक सेवन से प्रजनन समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि बांझपन और गर्भपात की संभावना।
5. *एलर्जी और संवेदनशीलता*: कुछ लोगों में TBHQ से एलर्जी या संवेदनशीलता हो सकती है, जिससे त्वचा पर चकत्ते, कण्डू या खुजली और अन्य लक्षण हो सकते हैं।
6. *पाचन समस्याएं*: TBHQ के अधिक सेवन से पाचन समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि उदर शूल, अतिसार या डायरिया और वमन या उल्टी।
7. *यकृत और वृक्क या किडनी की समस्याएं*: कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि TBHQ के अधिक सेवन से यकृत और वृक्क या किडनी की समस्याएं हो सकती हैं।
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| THBQ वसा से युक्त भोजन थाली |
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| आम के ऊपर वैक्स नामक वसा का लेपन, जिससे वे सुन्दर और ताजे फल दिखें |
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि TBHQ के हानिकारक प्रभावों के सम्बन्ध में अभी भी शोध चल रहा है, और अधिक ज्ञान की आवश्यकता है जिससे कि इसके प्रभावों को पूरी तरह से समझा जा सके।
*अन्ततः क्यों अचानक से हिन्दू युवाओं की हार्ट अटैक से मृत्यु की संख्या बढ़ गई है? और कही आपके जान पहचान के मुस्लिम परिवारों मे भी इसी प्रकार की मृत्यु हो रही हो तो मेरे इस लेख हेतु मै क्षमाप्रार्थी हूं।
यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है, आपको चाहिए कि होटलों में ढाबों पर कभी भी खाना न खाएं, यदि खाएं तो सावधानी अपनाएं।*
1. *क्योंकि देश-विरोधीयों द्वारा ढाबो पर तंदूरी परांठो के साथ सफेद मक्खन में पेट्रोलियम वैक्स भर-भर कर परोसा जा रहा है। ऐसा नकली सफेद मक्खन बहुत सस्ता मिल जाता है।*
2. *दाल मखनी में 45-59% क्रीम + बटर है जो अधिकतम इसी फर्जी फैट से बनती है। लेकिन यहां की जनता दर्जनों सब्जियां एक ओर व दाल मखनी अकेली एक ओर, प्रातः अल्पाहार, प्रातः भोजन, रात्रि या संध्या कालीन भोजन सब मे खाएंगे।*
3. *टॉप 5 Chef पर एक सर्वे किया गया जिसमें 4 अपनी ही दाल मखनी नही पहचान पाये। कारण: 45-50% क्रीम+ बटर के मिलने के उपरान्त सब एक जैसी बनती है।*
*यहां ये भी बताता आवश्यक है की ये क्रीम बटर से भरी दाल स्वास्थ्य के लिए केवल हानिकारक ही नही वरन् "unsafe" फ़ूड है।*🫢
4. *सुंदर चॉकलेट की कोटिंग पेट्रोलियम इंडस्ट्री से निकले पैराफिन वैक्स से की जाती है जिससे कि वो दीर्घकाल तक पिंघले नही व चिकनी चमकदार दिखे।*
5. *एक जैसा टेस्ट बनाये रखने के लिए वनीला आइस क्रीम फ्लेवर, बादाम फ्लेवर, लेमन फ्लेवर पेट्रोलियम पदार्थों से बनाये जा रहे है।*
6. *सेब, किन्नू आदि को ताजा रखने के लिए पेट्रोलियम रिफाइनरी से निकले ओलेस्त्रा/वैक्स यूज़ होता है।*
7. *फ्रोजन items, पिज़्ज़ा, बिस्कुट, कॉर्न चिप्स, पॉपकॉर्न में अति सस्ता पड़ने के कारण चिकना पेट्रोलियम पदार्थ TBHQ मिलाया जाता है।*
8. *2013 में भारत मे कुकिंग आयल व घी में मिनरल आयल (पेट्रोलियम चिकनाई) पकड़ी गई थी। मिनरल आयल मिलाने से आपका वनस्पति तेल से बना घी कई वर्षों भी अशुद्ध नही होगा। आटा, अंडे, दूध, चीनी से बने पदार्थ तेजी से अशुद्ध होते है। अब यदि कोई इनसे बनी मिठाई, बन, ब्रेड, कूकीज, केक आदि को हफ़्तों फ्रेश रखना चाहता है तो उसमें रिफाइनरी से निकला मिनरल आयल मिला दो। ऐसी चीजे शोरूम के शीशे के पीछे एक दम झक्कास फ्रेश व चमकदार दिखेगी।*
*यदि खाना घर का बना, मसाले घर लाकर पिसे गये, खाने का समान उत्पादक से खरीदा गया तो कुछ बच जाओगे। खाना, एजुकेशन, उपचार ये कभी भी व्यापारिक उत्पाद नही होने चाहिए ना ये प्राइवेट हाथों में होने चाहिये।*
*इस देश में मिलावट के विरुद्ध एक कानून Food adulteration Act 1954 में बना था जिसमें जो खाने का समान है उसके अतिरिक्त कुछ भी मिलने पर जेल होती थी।*
*उसे खाने की इंडस्ट्री के व्यापारियों से पैसे लेकर कांग्रेस की सरकार ने परिवर्तनकर 2006 में फ़ूड सेफ्टी एक्ट करवा कर मिलावट के गेट खुलवा लिये।*जैसे कि,
*अब आपकी हल्दी में बेसन मिल गया तो ये adulterated तो है लेकिन सेफ्टी जोखिम में नही।*
*पहले काली मिर्च में पपीते के बीज मिलावट थे अब सेफ्टी को जोखिम नही तो सब चलेगा।*
*खाने में मिलावट मर्डर के बराबर मानी जानी चाहिये लेकिन अब मिलावटखोर कुछ भी मिलाए बस येन केन प्रकारेण उसे सेफ सिद्ध करके कुछ भी मिलाये, यहां सब चलता है। स्मरण रखना यदि आपका खाना किसी के व्यापार का प्रोडक्ट है तो कोई व्यापारी कम नही कमाना चाहता चाहे आप या आपके बच्चे भले ही मर जाये।*
यह एक गंभीर विषय है जो खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। इसमें कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए गए हैं जो खाद्य पदार्थों में मिलावट और उनके हानिकारक प्रभावों के बारे में बताते हैं।
कुछ महत्वपूर्ण बिंदु हैं:
1. *खाद्य पदार्थों में मिलावट*: इसमें बताया गया है कि कई खाद्य पदार्थों में मिलावट की जा रही है, जैसे कि दाल मखनी में क्रीम और बटर की मिलावट, चॉकलेट में पेट्रोलियम वैक्स की मिलावट, और फलों पर वैक्स की मिलावट।
2. *हानिकारक प्रभाव*: इसमें बताया गया है कि इन मिलावटों के कारण स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकते हैं, जैसे कि हार्ट अटैक, कैंसर, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं।
3. *खाद्य सुरक्षा कानून*: इसमें बताया गया है कि खाद्य सुरक्षा कानूनों में बदलाव के कारण मिलावटखोरों को बढ़ावा मिला है, और अब मिलावटखोर कुछ भी मिलाए बिना किसी भी प्रकार के दण्ड से बच सकते हैं।
यह एक महत्वपूर्ण विषय है जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हमें अपने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए काम करना चाहिए, और मिलावटखोरों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए और सुरक्षित रहने के लिए घर में ही बने भोज्य पदार्थों का अधिकतम उपयोग करें।
डॉ त्रिभुवन नाथ श्रीवास्तव, पूर्व प्राचार्य, विवेकानंद योग प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय एवम् चिकित्सालय, बाजोर, सीकर, राजस्थान।
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| TBHQ का प्रयोग हुआ है। |
TBHQ से युक्त रेस्टोरेंट का भोजन