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😳 भारतीय सेना के जूते की कराहती गाथा!,👇
और कॉंग्रेस की उस समय की सरकार और मंत्रालय के काले खेल*👇🏼मुझे खेद है, लेकिन मेरे पास इस लेख के प्रकाशन के संबंध में कोई प्रथम प्रकाशित तथ्य उपलब्ध नहीं है। हां, मैं आपको बता सकता हूं कि यह लेख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से साझा किया गया है, लेकिन इसके मूल स्रोत और लेखक के नाम के बारे में कोई ज्ञान उपलब्ध नहीं है। इसे पुनः प्रकाशित करने का उद्देश्य यही है कि कैसे कैसे पूर्व की भारत देश सरकारों ने देश की अर्थव्यवस्था को खोखला बना दिया था।
भारत, राजस्थान, 👉जयपुर की कंपनी सेना के लिए जूते बनाती है, 👉और आगे "वह जूते इस्राइल को बेचे जाते थे", उसके उपरान्त👉 "इजराइल वही जूते भारत को बेचता था"👉
👉और वहीं जूते पुनः भारतीय सैनिकों को प्राप्त होते थे !
अर्थात् भारत का कांग्रेसी शासन के काल का सैन्य मंत्रालय एक नग जूते के **Rs. 25,000/-** देता था और यही क्रम काँग्रेस द्वारा कई वर्षों से चलाया जा रहा था।
जैसे ही पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर, भाजपा की सरकार में,को यह पता चला, वो चौंके और क्रोधित हो गए ..।👇
👉और तुरंतउन्होंने ,जयपुर कंपनी के CEO को बुलाया और **कारण पूछा, तो उत्तर मिला :
*"भारत को सीधे जूते बेचने पर, भारत का सरकारी तंत्र वर्षों तक जूतों का मूल्य नहीं चुकाता था।*👇
👉 इसलिए हम दूसरे देशों में जूते निर्यात करने लगे" 🤣
मनोहर पर्रिकर ने कहा : *" एक दिन भी भुगतान विलम्ब से होता है तो आप मुझे तुरंत फोन कीजिए, बस,
👉 आपको हमें सीधे जूते बेचना है, आप मूल्य प्रति जोड़ी बताएं"*👇
इस प्रकार अन्ततः मनोहर पर्रिकर जी ने वही जूते मात्र *2200/-* में सेना हेतु सुनिश्चित किया !!
सोचिए ... जूते के *25,000/-* देकर काँग्रेस ने वर्षों तक कितनी लूट मचा कर सरकारी कोष की लूट मचा रखी थी !! 😡
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विश्वास नहीं हुआ ना?? कोई बात नहीं RTI लगाइए या Google खँगालिये।।।
.😎😎😎Google सर्च पर बस इतना लिखिए👉 *भारतीय सेना के जूते की गाथा* सच सामने होगा👍
👉 निष्कर्ष 👇
भारतीय सेना के जूते की कराहती गाथा वास्तव में चौंकाने वाली है। यह मामला कांग्रेस सरकार के समय का है, जब जयपुर की एक कंपनी सेना के लिए जूते बनाती थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि यह जूते पहले इस्राइल को बेचे जाते थे, और इस्राइल वही जूते भारत को बेचता था और तो और, भारतीय सेना को यह जूते 25,000 रुपये प्रति जोड़ी के मूल्य से मिलते थे।
लेकिन जब यह तथ्य पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के सामने आया, तो उन्होंने तुरंत जयपुर कंपनी के सीईओ को बुलाया और इसका कारण पूछा। कंपनी के सीईओ ने बताया कि भारत सरकार का तंत्र वर्षों तक जूतों का मूल्य नहीं चुकाता था, इसलिए उन्हें दूसरे देशों में जूते निर्यात करने पड़ते थे।
मनोहर पर्रिकर ने तुरंत इस समस्या का समाधान निकाला और कंपनी को सीधे जूते बेचने के लिए कहा। इसके उपरान्त, भारतीय सेना को यह जूते मात्र 2,200 रुपये प्रति जोड़ी के मूल्य से मिलने लगे। यह एक बड़ा शासकीय परिवर्तन था, क्योंकि इसके पूर्व केवल लूट थी और इससे भारतीय सेना को बहुत लाभ हुआ।


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