👉#कुछ महत्वपूर्ण #प्रश्न उन पर #प्रसारितभ्रांतियां और उनका #सप्रमाणसमाधान ###@@@##👇
🔱प्रश्न 1- 14अगस्त 1947 को भारत देश की जी डी पी 13प्रतिशत थी और यह एक ही दिन पश्चात् 15 अगस्त 1947 को 3प्रतिशत क्यों रह गई?
🔱प्रश्न 2-भारत का एक रुपया 1951 तक एक यू एस डॉलर के बराबर था, ऐसा क्यों हुआ?
🔱प्रश्न 3-भारत देश के पास स्वतंत्रता से एक दिन पूर्व 1300 करोड़ थे जो एक दिन पश्चात् 600करोड़ रह गए तो ये सारा धन कहां गया?
तीनों प्रश्नों का उत्तर सप्रमाण पृथक् पृथक् प्रस्तुत है।👉तीनों प्रश्नों का उत्तर सप्रमाण:👇
1. 14 अगस्त 1947 को GDP 13% थी और 15 अगस्त को 3% क्यों रह गई?
यह दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। 14-15 अगस्त के बीच 1 दिन में GDP 13% से 3% नहीं गिरी।
प्रमाण:
1. 1947 में भारत की GDP लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपये थी, जो विश्व की कुल GDP का लगभग 3% थी।
2. अंग्रेज भारत आए थे तब विश्व की GDP में भारत की भागीदारी 22% से अधिक थी, लेकिन 1947 में स्वतंत्रता होने पर ये भागीदारी घटकर 3% रह गई।
3. "13% GDP" वाला कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। 1947 में विश्व की GDP में भारत का योगदान 3-4% ही था।
👉तो 13% से 3% का भ्रम क्यों?
1947 से पहले अविभाजित भारत विश्व GDP का 👉∼24% था, लेकिन 200 वर्ष के ब्रिटिश शासन के पश्चात् स्वतंत्रता के समय ये घटकर ∼4% से भी कम रह गया। 14-15 अगस्त में कोई अचानक गिरावट नहीं हुई। बंटवारे के कारण भारत का क्षेत्रफल, जनसंख्या और संसाधन बंटे, पर GDP रातों-रात नहीं बदलती।
2. भारत का 1 रुपया 1951 तक 1 US डॉलर के बराबर था, ऐसा क्यों हुआ?
यह भी सही नहीं है। 1947 में 1 डॉलर = 1 रुपया नहीं था।
प्रमाण:
1. 15 अगस्त 1947 को भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर के बीच विनिमय दर 1 डॉलर = 3.30 रुपये थी।
2. अन्य स्रोतों के अनुसार 1947 में 1 डॉलर = 3.30 से 4.16 रुपये के बीच था।
3. 1947 में रुपया सीधे डॉलर से नहीं, ब्रिटिश पाउंड से जुड़ा था। इसलिए 1 रुपया = 1 डॉलर वाला दावा मिथक है।
और 1951 तक क्या स्थिति थी?
सितंबर 1949 में विनिमय दर 4.75 रुपये/डॉलर आंकी गई थी।
1950 से 1966 तक 1 डॉलर = 4.76 रुपये पर स्थिर रहा। रुपया कभी भी 1 डॉलर के बराबर नहीं रहा।
1 रु = 1 डॉलर का भ्रम क्यों?
स्वतंत्रता के समय भारत पर विदेशी कर्ज नहीं था और रुपया पाउंड से जुड़ा होने से स्थिर था। इसी स्थिरता को लोग "1=1" समझ लेते हैं, जो मिथ्या है।
3. स्वतंत्रता से एक दिन पूर्व 1300 करोड़ थे जो एक दिन पश्चात् 600 करोड़ रह गए, ये धन कहां गया?
यह आंकड़ा भी मिथ्या है। 1300 करोड़ से 600 करोड़ वाली कोई घटना नहीं हुई।
प्रमाण:
1. स्वतंत्रता के पश्चात् #पहलाबजट: 26 नवंबर 1947 को प्रस्तुत हुए स्वतंत्र भारत के पहले बजट में कुल अनुमानित व्यय ₹197.29 करोड़ था।
2. 1947 में #GDP: 1947 में भारत की GDP 2.7 लाख करोड़ रुपये थी। 1300 करोड़ या 600 करोड़ जैसा कोई सरकारी कोष का आंकड़ा नहीं मिलता।
3. क्या बंटा था? बंटवारे में नकदी, सोना, सेना, सरकारी संपत्ति बंटी थी। बैंकों में जो नकदी थी, उसका #17.5% भाग पाकिस्तान को मिला। चल संपत्ति का #80% भारत और #20% पाकिस्तान को मिला।
तो 1300 से 600 करोड़ का दावा कहां से आया?
संभवतः ये भ्रम रिजर्व बैंक की नकदी या स्टर्लिंग बैलेंस के बंटवारे से जुड़ा है। #अंग्रेजों पर 5 अरब डॉलर का कर्ज था, जिसके #17.5% की भागीदारी पाकिस्तान ने ली। लेकिन 1 दिन में 1300 से 600 करोड़ वाला कोई रिकॉर्ड नहीं है।
#निष्कर्ष:: #उपरोक्त स्रोतों अनुसार;
तीनों भ्रमति तथ्य व्हाट्सएप/सोशल मीडिया पर फैले मिथक हैं। ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार:
• GDP 1 दिन में 13% से 3% नहीं गिरी, 1947 में ही ∼3% थी।
• 1 रुपया कभी 1 डॉलर के बराबर नहीं रहा, 1947 में 1 डॉलर ≈ 3.30-4.76 रुपये था।
• 1300 करोड़ से 600 करोड़ वाला कोई आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड में नहीं है। बंटवारे में संपत्ति का 80:20 अनुपात में बंटवारा हुआ था।
#प्रश्न?👉ऐसा कहा जाता है कि अंग्रेजी सरकार के जितने अधिकारी थे उन सबको पूरी पेंशन और रिटायरमेंट लाभ की राशि का भुगतान अगले दिन ही दे दी गई थी जिससे हमारी देश को 50 प्रतिशत से अधिक की हानि हुई। साथ साथ जो उनके द्वारा विकास कार्य किया गया उसका व्यय भी इसी समय ले लिया गया था????????👇
यह दावा भी आंशिक रूप से सही है, लेकिन "50% हानि" और "अगले दिन ही सारी पेंशन दे दी" वाली बात अतिशयोक्ति है। सप्रमाण देखिए:
#प्रश्नकाउत्तर 1. अंग्रेज अधिकारियों की पेंशन और रिटायरमेंट का सच क्या हुआ था??👇
👉1947 में बंटवारे के समय ब्रिटिश भारत सरकार के सिविल सेवक, सेना अधिकारी और अन्य कर्मचारियों के लिए 3 विकल्प थे:
1. भारत में रहकर काम करें।
2. पाकिस्तान चले जाएं।
3. ब्रिटेन वापस लौट जाएं और पेंशन लें।
जो अंग्रेज अधिकारी भारत छोड़कर गए, उन्हें "Sterling Pension" दी गई। यह पेंशन भारत सरकार को ब्रिटिश पाउंड में चुकानी थी।
👉कितना धन चला गया:👇
1. स्वतंत्रता के उपरान्त के पहले बजट 1947-48 में कुल खर्च ₹197.29 करोड़ था, जिसमें रक्षा पर ₹92.74 करोड़ यानी 46% खर्च हुआ। पेंशन का पृथक् से कोई "50% राजकीय कोष खाली" वाला आंकड़ा नहीं है।
2. बंटवारे में भारत-पाक के बीच वित्तीय समझौता हुआ। कुल संपत्ति का 17.5% पाकिस्तान को और 82.5% भारत को मिला। नकदी, सेना, रेलवे, डाक सब बंटा।
"अगले दिन ही दे दी" - यह सत्य नहीं:
पेंशन एकसाथ 15 अगस्त को नहीं दी गई। ICS/IAS अधिकारियों को उनकी सेवा के अनुसार से पेंशन मिलती रही। भारत सरकार 1950-60 के दशक तक भी ब्रिटेन को स्टर्लिंग पेंशन भेजती रही। 1970 में इंदिरा गांधी सरकार ने कई रियासतों के प्रिवी पर्स के साथ-साथ कुछ पेंशन भी बंद कीं।
2. "विकास कार्य का व्यय भी ले लिया गया" - इसका क्या अर्थ?
यह "Sterling Balances" यानी स्टर्लिंग शेष से जुड़ा वाद है।
👉प्रमाण:👇
1. दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटेन ने भारत से बहुत सामान खरीदा, जिसके बदले उसने भारत को पाउंड में भुगतान का वचन किया। युद्ध समाप्त होने तक ब्रिटेन पर भारत का लगभग 1.3 अरब पाउंड = 5 अरब डॉलर का ऋण हो गया था।
2. स्वतंत्रता के समय निश्चित हुआ कि यह पैसा धीरे-धीरे चुकाया जाएगा। 1947 में भारत को इसका 17.5% भाग पाकिस्तान को देना पड़ा। शेष पैसा भारत को 1950 के दशक में किस्तों में मिला, जिससे पंचवर्षीय योजनाएं चलीं।
👉तो "ले लिया गया" मिथ्या है:👇
अंग्रेजों ने विकास कार्य का पैसा "ले नहीं लिया", वरन् युद्ध के समय जो ऋण हुआ था, उसका भुगतान उपरान्त में किया गया था। हां, बंटवारे के कारण 17.5% भाग पाकिस्तान को देना पड़ा।
3. "50% से अधिक हानि" - यह आंकड़ा कहां से आया?
1. सम्पूर्ण कोष खाली था:
1947 में भारत की आर्थिक व्यवस्था दयनीय थी। वैश्विक GDP में भारत का योगदान 24% से घटकर 4% से भी कम रह गया था। प्रति व्यक्ति आय केवल ₹250 वार्षिक रह गई थी।
2. बंटवारे का मूल्य:
बंटवारे में संपत्ति 80:20 के अनुपात में बंटी। 17.5% नकदी पाकिस्तान को गई। सबसे उपजाऊ कृषि भूमि और पटसन- कपास के क्षेत्र पाकिस्तान में चले गए। इससे भारत को अत्यधिक हानि हुई, लेकिन "50% राजकीय कोष 1 दिन में खाली" वाला कोई सरकारी आंकड़ा नहीं है।
👉#निष्कर्षक्यासत्यक्याअसत्य👇
--दावा ------- ।।।-------वास्तविकता----------------
👉सभी पेंशन अगले असत्य,पेंशन वर्षों तक किस्तों 1 दिन में नहीं दी गई। दी गई।
👉विकास कार्य का असत्य। विपरीत ब्रिटेन पर
,,, खर्च ले लिया गया। , भारत का ऋण था
जो बाद में मिला।
हां, उसका 17.5%
पाकिस्तान को गया।
👉 50%से अधिक। अतिशयोक्ति। बंटवारे से हानि-------------------17.5% नकदी + उपजाऊ ------------------------------क्षेत्र चला गया। अर्थव्यवस्था ------------------------------पहले से ही खोखली थी। ------------------------------लेकिन50% राजकीय कोष ------------------------------1 दिन में खाली" का कोई
--------------- -------------- रिकॉर्ड नहीं।
👉वास्तविक हानि क्या थी:👇
200 वर्ष के शासन में अंग्रेज भारत की संपत्ति ले गए। 1947 में भारत टूटा-फूटा, निर्धन और बंटा हुआ था। प्रति व्यक्ति आय ₹250, जीवन प्रत्याशा 32 वर्ष, साक्षरता 12% थी। यही सबसे बड़ी "हानि" थी, न कि 15 अगस्त को 1 दिन में हुआ कोई लेन-देन। #"भारत देश कभी दयनीय नहीं था, तो मात्र 200 वर्षों में जर्जर कैसे हो गया?"
ये प्रश्न पूर्णतः उचित है। चलिए आंकड़ों से देखते हैं कि 200 वर्ष में क्या-क्या बदला:
1. 1700 में भारत की परिस्थिति क्या थी? - "सोने की चिड़िया"
प्रमाण:
1. विश्व GDP में भाग : 1700 में मुगल काल के समय अविभाजित भारत देश विश्व की GDP का 24.4% भाग था। पूरे संसार का 1/4 धन भारत में बनता था। उस समय यूरोप का कुल भाग 23.3% था। 2. संसार का सबसे धनी देश: 18वीं सदी तक भारत देश विश्व का सबसे बड़ा कपड़ा, मसाले, नील, हीरे का निर्यातक था। बंगाल का मलमल, ढाका की जामदानी, कश्मीर का पश्मीना संसार भर में बिकता था।
2. तो अगले 200 वर्ष से 1947 तक क्या हुआ? - 24% से 3% कैसे गिरा
अंग्रेज 1757 प्लासी के युद्ध के बाद धीरे-धीरे प्रभावी हुए। 200 वर्ष में 3 बड़े उपायों से भारत का धन बाहर गया:
A. सीधा लूट और टैक्स - "Drain of Wealth"
दादाभाई नौरोजी ने 1871 में अनुमान लगाया था। अंग्रेज हर वर्ष भारत से औसतन 25-30 करोड़ रुपये बिना कुछ दिए इंग्लैंड ले जाते थे। इसमें सम्मिलित था:
1. कंपनी का लाभ: ईस्ट इंडिया कंपनी के शेयरधारकों को डिविडेंड
2. अफसरों की वेतन-पेंशन: जो इंग्लैंड में व्यय होती थी।
3. "Home Charges": भारत सरकार का खर्च जो लंदन से चलता था - वायसराय का कार्यालय, इंडिया ऑफिस, रेलवे के ब्याज का भुगतान।
कुल कितना गया?
A: प्रसिद्ध अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक के शोध के अनुसार 1765-1938 के बीच अंग्रेज 45 ट्रिलियन डॉलर आज के अनुमान से भारत से ले गए।
B. भारतीय उद्योग की बर्बादी
1. कपड़ा उद्योग: 1813 तक भारत देश विश्व को 25% कपड़ा बेचता था। अंग्रेजों ने भारतीय कपड़े पर 70-80% टैक्स लगा दिया और ब्रिटिश कपड़ा भारत में टैक्स-फ्री कर दिया।
परिणाम: 1830 तक ढाका, मुर्शिदाबाद, सूरत का व्यापार नष्ट हो गया। बंगाल में जुलाहों के अंगूठे काटने की बात भी कही जाती है।
2. जहाजरानी: 1800 तक भारत देश विश्व का जहाज बनाने में नंबर-एक था। अंग्रेजों ने भारतीय जहाजों पर रोक लगा दी।
C. खेती का नाश और अकाल
अंग्रेजों ने लगान उगाही के लिए जमींदारी सिस्टम बनाया। किसान नकदी फसल नील, अफीम, कपास उगाने को विवश हुए। खाने की फसल घटी।
परिणाम:
1. 1876-78: मद्रास अकाल - 55 लाख मरे
2. 1896-97: पूरे भारत में अकाल - 50 लाख मरे
3. 1943: बंगाल अकाल - 30 लाख मरे। चर्चिल ने जानबूझकर अनाज बाहर भेज दिया।
4. 1947 में परिस्थिति- आंकड़े स्वयं बोलते हैं
अंग्रेजों के जाने के समय:
1. विश्व GDP में भाग: 24% से घटकर 3% रह गया 2. प्रति व्यक्ति आय: मात्र ₹250 वार्षिक
3. जीवन प्रत्याशा: मात्र 32 वर्ष
4. साक्षरता: मात्र 12%
5. उद्योग: कुल GDP में मैन्युफैक्चरिंग मात्र 2%। सुई तक बाहर से आती थी।
तो "200 वर्षों में जर्जर क्यों" का उत्तर:
भारत दयनीय नहीं था, **बनाया गया**।
200 वर्ष तक हर वर्ष भारत का धन, कच्चा माल, अनाज इंग्लैंड जाता रहा। बदले में यहां न स्कूल बने, न अस्पताल, न फैक्ट्री। रेलवे-नहर केवल माल ढोने के लिए बनी। 2 विश्व युद्धों का खर्च भी भारत से उगाही की गई।
एक उदाहरण: 1757 से पहले बंगाल विश्व का सबसे धनी प्रान्त था। 1901 आते-आते बंगाल अकाल और निर्धनों का घर बन गया।
इसलिए 1947 में देश का कोष खाली था। ये 1 दिन में नहीं, 200 वर्षों की लूट से हुआ। बंटवारे ने कोढ़ में खाज का काम किया।
इस सन्दर्भ में आपको दादाभाई नौरोजी की पुस्तक "Poverty and Un-British Rule in India" पढ़नी चाहिए। 1901 में ही उन्होंने पूरा लेखा जोखा दे दिया था कि भारत कैसे लूटा।
















