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शुक्रवार, 29 मई 2026

 🕉️👉 _जय श्री राम_ 🙏🏽👇  

🚩_परहित सरिस धर्म नहिं भाई,

       पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।_🚩 🕊️


*राघव शुक्ला की कहानी = कलयुग की रामायण* 


#*#* सीतापुर जिला जेल में बंद बन्दी प्रतिदिन रामायण पढ़ता था… एक दिन जेलर को पता चला कि उसने अपराध क्यों किया था।*#*


1. सीतापुर जेल की बैरक नंबर 7:  

सीतापुर जिला जेल। ऊँची दीवारें, लोहे की बेड़ियां और चारों ओर नीरवता। बैरक नंबर 7 में 42 अपराधी थे। उन्हीं में एक था बन्दी नंबर 2911 — राघव शुक्ला। आयु 38 वर्ष, दुबला-पतला, दाढ़ी बढ़ी हुई, आँखें सदैव नीचे।  


राघव की पहचान थी रामायण। प्रातः 4 बजे उठता, स्नानकर जेल के मंदिर वाले कोने में बैठ जाता। फटी-पुरानी रामायण खोलता और पाठ करता। स्वर मंद मंद पर स्पष्ट। 

"मंगल भवन अमंगल हारी,

 द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।"  


दूसरे बन्दी उपहास उड़ाते। "पंडित, रामायण पढ़ने से दण्ड कम नहीं होगा। 20 वर्ष काटने हैं तुझे।"  

राघव उत्तर नहीं देता। पाठ समाप्त करके वो रामायण को माथे से लगाता और पुनः बैरक में।  


जेलर थे अविनाश सिंह। 50 वर्ष के, कड़क अधिकारी। 25 वर्ष की सेवा काल में हर प्रकार के बन्दी देखे थे। पर राघव अनोखा था। न लड़ाई, न अपशब्द, न भागने का प्रयास। बस रामायण पाठ।  


2. अपराध क्या था?  

राघव की फाइल में लिखा था — "धारा 302, हत्या। 2019 में लखनऊ के गोमतीनगर में बिल्डर विजय अग्रवाल की हत्या। पत्नी और 2 वर्ष की बेटी के सामने गोली मारी। कोर्ट ने आजीवन कारावास दी।"  


जेलर अविनाश को आश्चर्य होता। जो व्यक्ति रामायण पढ़ता है, वो एक परिवार के सामने हत्या कैसे कर सकता है? उन्होंने पुराने सिपाही शिवराम से पूछा।  

"साहब, ये व्यक्ति न्यायालय में भी चुप था। वकील नहीं किया। स्वयं कहा — हाँ, मैंने मारा। बस।"  


"क्यों मारा, ये नहीं बताया?"  

"ना साहब। जज ने भी पूछा। बोला — कारण मत पूछिए। दण्ड दे दीजिए।"  


अविनाश की असहजता बढ़ गई।  


3. जेल में रामराज  

राघव 3 वर्ष से जेल में था। धीरे-धीरे उसने बैरक का वातावरण ही बदल दिया। जो बन्दी अभद्र अश्लील शब्द बोल देते थे, वो अब धीरे बोलते। रामायण के उपरान्त राघव सबको एक चौपाई का अर्थ समझाता।  


🚩"कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, 

जो जस करहि सो तस फल चाखा।"  

"अर्थ, भाई, जो करोगे वही भरोगे। अपशब्द दोगे तो अपशब्द ही मिलेगी। प्रेम दोगे तो प्रेम।"  


छोटू नाम का 19 वर्ष का लड़का चोरी में आया था। राघव ने उसे अक्षर सिखाए। अब छोटू रामायण पढ़ लेता था।  


जेल में लड़ाई हो जाती तो वार्डन बुलाते — "पंडित को बुलाओ।" राघव दो लाइन बोलता, और मारपीट रुक जाती।  


जेलर अविनाश देखते रहते। सोचते, "यदि ये व्यक्ति बाहर होता तो कितने घर बचा लेता। पर इसने एक घर उजाड़ दिया। क्यों?"  


4. बेटी की चिट्ठी  

2025 की मार्च। होली का दिन। जेल में बन्दीयों को घर से चिट्ठी मिलती है। राघव को कभी चिट्ठी नहीं आई थी।  


पर उस दिन एक लिफाफा आया। भेजने वाली — "अनन्या अग्रवाल, क्लास 6, सेंट मैरी स्कूल, लखनऊ।"  

जेलर चौंक गए। अग्रवाल... वही विजय अग्रवाल की बेटी?  


नियम था, जेलर चिट्ठी पढ़कर देते हैं। अविनाश ने लिफाफा खोला।  


*अंकल,  

आप मुझे जानते नहीं। मैं अनन्या हूँ। पापा विजय अग्रवाल की बेटी।  

मम्मा कहती हैं आपने मेरे पापा को मार दिया। पुलिस अंकल ने भी यही कहा।  

पर मैं आपसे घृणा नहीं करती।  

क्योंकि मम्मा रात को रोती हैं। वो कहती हैं, "तेरे पापा अच्छे व्यक्ति नहीं थे।"  

नानी कहती हैं, "राघव अंकल ने तेरा जीवन बचाया था।"  

मैं अत्यधिक भ्रमित हूँ।  

आप सत्य बताओगे? आपने पापा को क्यों मारा?  

आप रामायण पढ़ते हो न? राम जी तो किसी को नहीं मारते थे बिना कारण।  

कृपया उत्तर देना।  

अनन्या*  


अविनाश का हाथ काँप गया। उन्होंने चिट्ठी राघव को दी।  


राघव ने चिट्ठी पढ़ी। पहली बार उसकी आँखें भर आईं। उसने चिट्ठी को माथे से लगाया और जेलर से बोला, "साहब, क्या मैं इसे उत्तर दे सकता हूँ?"  

"हाँ। पर पहले मुझे बताओ, सत्य क्या है?"  


राघव चुप रहा और बोला, "साहब, कल सुंदरकांड का पाठ पूरा होगा। उसके पश्चात बताऊँगा। 7 वर्ष से इस दिन की ही प्रतीक्षा कर रहा था।"  


5. सुंदरकांड और वास्तविकता 

अगली प्रातः। जेल के मंदिर में सुंदरकांड। राघव ने पाठ किया। जेलर अविनाश भी बैठे।  


पाठ समाप्त हुआ। राघव जेलर के कमरे में आया। "साहब, बैठ जाऊँ?"  

"हाँ राघव। अब बताओ।"  


राघव ने लंबी साँस ली। "साहब, मैं लखनऊ में ड्राइवर था। विजय अग्रवाल के यहाँ। 8 वर्ष काम किया। वो बिल्डर था, पर अच्छा व्यक्ति नहीं था।"  


"अर्थात्?"  

"साहब, विजय अग्रवाल की पत्नी अर्थात श्रीमती कविता अति संस्कारी महिला थीं। बेटी अनन्या तब 2 वर्ष की थी। पर विजय शराब पीकर दोनों को मारता था। कई बार मैंने बीच-बचाव किया। नौकरी जाने का भय था, पर चुप नहीं रह पाया।"  


"और एक दिन?"  

"5 मार्च 2019। होली का दिन था। विजय नशे में था। कविता जी ने उससे विवाहित जीवन से छुटकारा माँगा। विजय ने कहा — छुटकारा दे दूँगा, पर पहले तुझे और तेरी बेटी को प्राणों से रहित करूँगा। इंश्योरेंस का पैसा मिलेगा।'"  


राघव की बोली भर्रा गई। 

"उसके पति ने पिस्तौल निकाली। कविता भयभीत होकर कमरे में भागीं। अनन्या पालने में सो रही थी। विजय पालने की ओर बढ़ा। 

बोला — 'पहले इसे निपटाता हूँ।'"  


"मैं किचन में था। सब सुन रहा था। मेरे पास कुछ नहीं था। विजय ने ट्रिगर पर उंगली रखी। साहब, उस समय मुझे रामायण की वो लाइन स्मरण आई — 

🚩'परहित सरिस धर्म नहिं भाई। 

      पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।'"  


"दूसरों की भलाई से बड़ा धर्म नहीं। और दूसरों को दुख देने से बड़ा पाप नहीं।"  


"मैं दौड़ा। गेट के पास विजय की एक और लाइसेंसी रिवॉल्वर पड़ी थी। मैंने उठाई। वार्निंग दी — 'साहब, रुक जाओ। बच्ची को मत मारो।' वो हँसा — 'तू ड्राइवर, मुझे रोकेगा?' उसने पालने पर गोली चला दी।"  


राघव चुप हो गया।  

"आगे?" जेलर ने पूछा।  

"और मैंने भी गोली चला दी साहब। एक गोली। सीधे छाती में। विजय वहीं गिर गया।"  


"अनन्या बच गई?"  

"हाँ साहब। गोली पालने के पास से निकली। मैंने दौड़कर अनन्या को उठाया। कविता मैडम अचेत थीं। मैंने पुलिस को फोन किया। कहा — 'मैंने मारा है। आ जाओ।'"  


6. कोर्ट में चुप्पी क्यों?  

"राघव, तुमने कोर्ट में ये सब क्यों नहीं बताया? सेल्फ डिफेंस था। दण्ड कम हो जाता।"  


राघव हँसा, अल्प हँसी। "साहब, कविता मैडम की परिस्थिति दयनीय थी। पुलिस ने उनसे पूछा तो वो भयभीत हो गईं। विजय का परिवार अत्यधिक शक्तिशाली था। उन्होंने कहा — यदि मैं पक्ष दूँगी तो ये लोग मेरी बेटी को मार देंगे।'"  


"मैंने मैडम से कहा — 'आप चुप रहो। अनन्या को बड़ा करना है। मैं संभाल लूँगा।' साहब, एक माँ को अपनी बच्ची के लिए असत्य बोलना पड़े, इससे बड़ा पाप नहीं। मैंने वो पाप अपने सिर ले लिया।"  


"पर तुम तो 20 वर्ष के लिए अंदर हो गए।"  

"साहब, बाहर रहकर भी मैं कौन सा स्वतंत्र था? हर रात सोचता — यदि मैं 2 सेकंड पहले पहुँच जाता, तो गोली ही न चलती। 

जेल में कम से कम राम जी के पास हूँ।"  


7. जेलर का धर्मसंकट  

अविनाश निशब्द रह गए। फाइल में "हत्या" लिखा था। पर वास्तव में ये "रक्षा" थी।  


उन्होंने एस पी साहब को फोन किया। "सर, केस री-ओपन हो सकता है क्या?"  

"अविनाश, 7 वर्ष हो गए। कोर्ट का निर्णय है। अब क्या कर सकते हैं?"  

"सर, नया पक्ष में प्रमाण है। बच्ची की चिट्ठी है।"  


एस पी मौन। "देखता हूँ। पर आशा मत रखना।"  


उधर राघव ने अनन्या को उत्तर लिखा।  


*बेटी अनन्या,  

तुम्हारे पापा को मैंने मारा, ये सत्य है। पर क्यों मारा, ये भी सत्य है।  

उस दिन होली थी। रंग के स्थान पर रक्त बह जाता यदि मैं न रोकता।  

तुम पालने में थी। तुम्हारे पापा नशे में थे। वो तुम्हें मारने वाले थे।  

मैंने राम जी से पूछा — क्या करूँ? उन्होंने कहा — 'बच्ची को बचा।'  

बस मैंने वही किया।  

मुझे दण्ड मिला,पर तुम्हें नया जीवन मिला। मुझे कोई पछतावा नहीं।  

तुम अपनी मां का ध्यान रखना। अच्छे से पढ़ना, और हाँ, रामायण अवश्य पढ़ना। उसमें हर प्रश्न का उत्तर  है।  

तुम्हारा,  

राघव अंकल*  


8. कविता का आना  

चिट्ठी के 15 दिन उपरान्त सीतापुर जेल के गेट पर एक महिला आई। साड़ी, आँखों में चश्मा, साथ में 9 वर्ष की बच्ची।  


गेट पर एंट्री — "कविता अग्रवाल, अनन्या अग्रवाल। बन्दी 2911 से भेंट।"  


जेलर अविनाश ने स्पेशल अनुमति दी। अनुमति वाले कमरे में राघव आया। सामने कविता और अनन्या।  


कविता फूट पड़ी। "राघव भैया... मुझे क्षमा कर दो। मैंने कायरता की। आपके जीवन को अनर्थक कर दिया।"  

राघव ने हाथ जोड़े। "मैडम, आप माँ हो। माँ से बड़ा कोई धर्म नहीं। आपने सही किया।"  


अनन्या दौड़कर राघव के पैरों में गिर गई। "अंकल, धन्यवाद आपका। आपने मुझे बचाया।"  

राघव ने उसे उठाया, सिर पर हाथ फेरा। "बेटा, धन्यवाद मत कहो। तुम प्रसन्न रहो, यही मेरा दण्ड काट देगा।"  


कविता ने एक फाइल निकाली। "साहब, ये मेरा सत्य कहना है। 7 वर्ष पश्चात ही सही, पर अब सत्य बोलूँगी। कोर्ट में बोल दूँगी। राघव भैया निरपराध हैं।"  


9. केस री-ओपन  

कविता के सत्य कथन से हड़कंप मच गया। मीडिया में समाचारछाया— "ड्राइवर ने स्वामी को क्यों मारा? 7 वर्ष पश्चात खुला रहस्य।"  


हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया। री-ट्रायल का आदेश। अनन्या भी कोर्ट में बोली, "अंकल ने मुझे बचाया। मैंने देखा था।"  


पुराने नौकरों ने भी पक्ष में कथन दिया— "साहब बीवी-बच्ची को मारते थे।"  

बैलिस्टिक रिपोर्ट से सिद्ध हुआ कि पहली गोली विजय ने चलाई थी, पालने की ओर।  


6 महीने केस चला। 2026 की जनवरी। जज ने निर्णय का आदेश सुनाया —  

"राघव शुक्ला ने अपराध नहीं, कर्तव्य किया। सेल्फ डिफेंस और नाबालिग की रक्षा। कोर्ट इन्हें सम्मान सहित दण्ड से मुक्त करती है। 7 वर्ष के दण्ड के लिए राज्य सरकार भरपाई दे।"  


कोर्ट में तालियाँ बज गईं। राघव चुप था। उसकी आँखों में आँसू थे।  


10. स्वतंत्रता और रामायण  

26 जनवरी 2026। सीतापुर जेल का गेट। राघव बाहर आया। हाथ में वही फटी रामायण। सामने अनन्या, कविता, जेलर अविनाश, और पूरी बैरक नंबर 7।  


छोटू दौड़कर आया। "पंडित जी, अब कौन रामायण पढ़ाएगा?"  

राघव हँसा। "तू पढ़ाएगा। मैंने तुझे सिखाया न?"  


जेलर अविनाश ने अभिवादन किया। "राघव, क्षमा करना। मैंने तुम्हें एक अपराधी बन्दी समझा। तुम तो वास्तविक जेलर हो — जिसने सबको बुराई की जेल से स्वतंत्र किया।"  


राघव ने पैर छुए। "साहब, आपने मुझे बेटी की चिट्ठी दी। अन्यथा मैं सत्य लेकर मर जाता।"  


11. नया जीवन  

राघव अब लखनऊ में कविता के घर के पास ही रहता है। अनन्या उसे "बड़े पापा" बुलाती है।  


उसने "रामायण सेवा ट्रस्ट" खोला है। जेल में बंद बन्दीयों को रामायण बाँटता है। कानून की क्लास देता है — "सेल्फ डिफेंस क्या है, चुप रहने से क्या नहानि है।"  


हर मंगलवार सीतापुर जेल जाता है। बैरक नंबर 7 में सुंदरकांड होता है। अब पाठ छोटू करता है।  


कविता ने कहा, "भैया, आप हमारे साथ रह लो।"  

राघव मना कर देता। "नहीं मैडम। मैं पास रहूँगा, पर साथ नहीं। संसार को लगना चाहिए कि आपने कृतज्ञता  चुकाई । पर मैंने तो धर्म निभाया था, कृतज्ञता नहीं।"  

👉क्रमशः, राघव की सत्य कहानी के उपरान्त:!!👉

🚩🕉️🚩_हरि ॐ_ 🙏🏽*वाह! ये तो योग का वास्तविक रहस्य खोल दिया है,* 🔓 


ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार- ये तो *पतंजलि के सूत्रों का कोड-ब्रेकर* है। राघव की कहानी के उपरान्त ये सुनना = _शास्त्र और अनुभव का मिलन कराता है_।


-*आपके ऑडियो का सार - 3 बड़े भेद:*


*1. रटना ≠ जानना* 

सूत्र_"प्रमाण विपर्यय विकल्प निद्रा स्मृति -

 रट लिया, सुना दिया, जीवन भर वही हो गए"_


*अर्थात्*: योग सूत्र तोते के समान रटने से योगी नहीं बनते। 

*प्रमाण* को जीवन में परखो, 

*विपर्यय* को अपने भ्रम में पकड़ो, 

*विकल्प* को अपनी अनावश्यक चिंताओं में देखो, *निद्रा* को अपने आलस में तोड़ो, 

*स्मृति* को दुख के संस्कार में पहचानो। 


तभी कोड टूटेगा। वरना PhD भी कर लो योग में, पर मन वैसे का वैसा।


*2. आसन = कोड, पुस्तक ≠ समाधान*

_"शीर्षासन कोड है, मकरासन कोड है... पुस्तक बना कर लिया, लचीला बन गया, समाप्त? नहीं"_


*गहरा सत्य*: शरीर झुक गया = योग नहीं हुआ। *आसन शरीर का पासवर्ड है*। 

शीर्षासन करने से रक्त सिर में गया - अब उस ऊर्जा का करोगे क्या? 

मकरासन से रीढ़ खुली - उस शांति को दिन भर रखोगे कैसे? 


*कोड तोड़ना =* मूलाधार से सहस्रार तक ऊर्जा ले जाना, पुनः वापस  मूलाधार पर लाना। उठाना और नीचे लाना। यानी *ध्यान को कर्म में उतारना*। यही राघव ने किया - रामायण का कोड तोड़कर जेल में उतारा।


*3. कंपन = कोड का अलार्म* 

_"आसन में कंपन क्यों आता है? लोग छोड़ के बैठ गए। वो कोड है"_


*ये तो 100% सत्य*: जब प्राणायाम या आसन में शरीर काँपे, तो लोग भयभीत हो जाते हैं। सोचते हैं "ठीक नहीं हो रहा है"। *पर कंपन = शरीर के ब्लॉक टूटने की ध्वनि*। जैसे जंग लगा ताला खोलो तो ध्वनि करता है। 


*कोड तोड़ने की विधि*: कंपन आए तो भागो मत। साँस गहरी करो, साक्षी बनकर देखो। गुरु के सानिध्य में सीखो कि इस कंपन को किस रोग में कैसे प्रयोग करना है। यही *अभ्यास* है -

 _तत्र स्थितौ यत्नोऽभ्यासः_ 1.13।


-*राघव की कहानी + ये ऑडियो = पूरा योग*

योग सूत्र  राघव का जीवन ऑडियो का कोड

**विपर्यय** 1.8 संसार ने कहा "हत्यारा" - ये भ्रम था रट लिया पर जाना नहीं - ये विपर्यय

**अभ्यास** 1.12 प्रतिदिन 4 बजे रामायण - 7 वर्ष अभ्यास मूलाधार से उठाकर नीचे लाना = अभ्यास

**वैराग्य** 1.12- 7 वर्ष का दण्ड स्वीकार किया - अनासक्ति "लचीला बन गया, समाप्त?" - देह से वैराग्य

**परहित** बच्ची बचाई = धर्म कोड तोड़कर रोग मिटाना = परहित

*राघव ने आसन नहीं किया, जीवन को आसन बना दिया*। जेल उसकी गुफा थी, रामायण उसका प्राणायाम था, अनन्या को बचाना उसका शीर्षासन था - ऊर्जा सबसे ऊपर ले गया।


*जीवन में उपयोग कैसे करें - 4 नियम:*


*1. प्रातः का कोड*: 5 मिनट बैठो। जो सूत्र रट रहे हो - प्रमाण, विपर्यय - उसे आज दिन में पकड़ो। "कहाँ मैं भ्रम में हूँ?" यही अभ्यास।


*2. शरीर का कोड*: आसन करते समय अंगमेजयत्व या कंपन आए तो रुकना नहीं। 3 गहरी साँस लो। शरीर से पूछो - "कौन सी ग्रंथि खुल रही है?" यही अनुभव से सीखना।


*3. सम्बन्ध का कोड*: राघव के समान- कोई दुख में है तो "पर पीड़ा सम नहिं अधमाई" स्मरण करो। सहायता कर सको तो कर्म करो, न कर सको तो प्रार्थना। यही कोड तोड़ना।


*4. गुरु का कोड*: _गुरु के सानिध्य में_ - अकेले कोड नहीं टूटते। राघव की रामायण थी, जेलर अविनाश थे, अनन्या की चिट्ठी थी। आपके जीवन में कौन गुरु है? उसे पकड़ो।


*योग विषय नहीं, जीवन शैली है* - पूर्णतः सत्य। योग दरी पर 1 घंटा और शेष 23 घंटे रावण बने रहना= ढोंग। योग दरी पर 10 मिनट पर दिन भर राम = योग।

*आपके लिए एक सूत्र:*

👉कोड रटने से ताले नहीं खुलते,

👉कोड जीने से जीवन खुलता है 🔓


🚩आसन देह को झुकाता है,

अनुभव अहंकार को झुकाता है 🙇🏽


🚩कंपन आए तो भय मत करना,

वो तेरी श्रृंखलाओं के टूटने की ध्वनि है ⛓️


🚩अभ्यास + वैराग्य + परहित = 

यही योग है, यही जीवन है, यही राम है 🚩

*राघव ने जेल में रामराज बनाया, आप अपने घर में बना दो*।🙏🏽_जय श्री राम_🕉️

12. जेलर की डायरी  

अविनाश सिंह अब डी आई जी हैं। उनकी टेबल पर एक रामायण रखी रहती है। उस पर राघव ने लिखा है — "साहब, वर्दी का रंग खाकी है, पर काम राम जी वाला है। सत्य को सत्य कहने से मत भय करना।"  


अविनाश नए जेलरों को ट्रेनिंग देते हैं। पहला पाठ — "हर बन्दी अपराधी नहीं होता। कभी-कभी वो राम होता है, जिसे सीता बचाने के लिए रावण मारना पड़ा। अन्तर बस इतना है कि त्रेता में राम को राज मिला, कलयुग में जेल।"  


अन्तिम चौपाई  

राघव अब भी प्रतिदिन रामायण पढ़ता है। अनन्या पास बैठकर सुनती है। जब वो चौपाई आती है — 🚩"परहित सरिस धर्म नहिं भाई", अनन्या पूछती है, "बड़े पापा, 👉इसका अर्थ क्या है?"  


राघव उसकी सिर पर हाथ फेरता है। "बेटा, अर्थ ये कि यदि किसी के प्राण बचाने के लिए तुम्हें दण्ड भी मिले, तो वो दण्ड नहीं, पूजा है।"  


अनन्या मुस्कुराती है। खिड़की से सूर्य का प्रकाश राघव की रामायण पर पड़ता है। 7 वर्ष जेल की दीवारों ने जो सोना छिपा रखा था, वो अब संसार के सामने प्रकाश कर रहा था।  


क्योंकि अपराध वो नहीं जो कानून की पुस्तक में लिखा हो। अपराध वो है जो मानवता की पुस्तक के विरुद्ध हो और राघव ने मानवता की पुस्तक कभी बंद नहीं की।  

जय श्री राम । 

हरि ॐ, चलें राम की और, राम ही राम

7 वर्ष के कारागार का दण्ड,भी उस "धर्म" को बन्दी नहीं कर पाया जो उसने एक पल में निभाया था। न्यायालय ने उसे अपराधी कहा, नियति ने उसे *रक्षक* बनाया।


*इस कथा के 4 सूत्र - जो जेल से निकले, हृदय में उतरे:*


*1. अपराध vs धर्म*  

कानून की पुस्तक में लिखा था "हत्या"। मानवता की पुस्तक में लिखा था "रक्षा"। राघव ने दूसरी पुस्तक चुनी। 

_जगतो नाश शीलता_ 

- कानून की धाराएँ बदल जाती हैं, पर धर्म अटल है।


*2. मौन का मूल्य*  

राघव 7 वर्ष चुप रहा क्योंकि एक माँ अपनी बेटी के लिए जी सके। ये "चुप्पी" भी तपस्या थी। _विसर्जन_ किया उसने अपने 7 वर्ष का, एक बच्ची के पूरे जीवन के _अर्जन_ के लिए।


*3. रामायण कारागार में क्यों?*  

क्योंकि रामायण केवल मंदिर की वस्तु नहीं। वो बैरक नंबर 7 में भी चाहिए, जहाँ निन्दनीय भाषाएं है। जहाँ छोटू जैसे बच्चे हैं। राघव ने दिखाया - *ग्रंथ बदलता नहीं, ग्रंथ पढ़ने वाला बदलता है, और वो युग बदल देता है*।


*4. वास्तविक स्वतंत्रता कब मिली?*  

26 जनवरी को गेट खुलने पर नहीं। *उस दिन मिली जब अनन्या ने कहा "थैंक यू बड़े पापा"*। बेड़ियां टूटी नहीं, पर कर्म का लेखा बराबर हो गया। 

_स्वात्मनो नित्यता_ 

- वो एक पल का परहित, अब अनंत तक स्मृति में रहेगा।


- राघव के लिए:*

कुछ जेल दण्ड नहीं, परीक्षा होती हैं 🚩

कुछ चुप्पी दुर्बलता नहीं, बलिदानी होती है 🤫


उसने गोली चलाई थी... 

पर एक बच्ची के प्राण बचाने के लिए।

उसने 7 वर्ष काटे...

पर एक माँ का कलंक ढकने के लिए।


कोर्ट ने कहा "अपराधी"

रामायण ने कहा "धर्मात्मा"

और समय ने कहा "नायक" 🙏🏽


👉क्योंकि परहित से बड़ा धर्म नहीं और बच्ची की मुस्कान से बड़ी कोई आनन्द नहीं। 🌸

#ParhitDharma #Raghava #JailSeRamaayan #TrueStory #KalyugKeRam #InsaniyatZindaHai #JaiShriRam

*जेलर अविनाश की लाइन सबसे विशेष लगी*:  

🚩_"त्रेता में राम को राज मिला, कलयुग में जेल"_। 

पर राघव कोसत्य राज तो तब मिला जब उसने जेल में ही रामराज बना दिया - जहाँ अपशब्द देने वाले चौपाई बोलने लगे।

क्योंकि ये कहानी हर थाने, हर कोर्ट, हर स्कूल में सुनाई जानी चाहिए। _हरि ॐ, चलें राम की और_ 🚩 👇

👉 राघव की सत्य कहानी के उपरान्त:!!👉

🚩🕉️🚩_हरि ॐ_ 🙏🏽*वाह! ये तो योग का वास्तविक रहस्य खोल दिया है,* 🔓 



ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार- ये तो *पतंजलि के सूत्रों का कोड-ब्रेकर* है। राघव की कहानी के उपरान्त ये सुनना = _शास्त्र और अनुभव का मिलन कराता है_।


-*आपके ऑडियो का सार - 3 बड़े भेद:*


*1. रटना ≠ जानना* 

सूत्र_"प्रमाण विपर्यय विकल्प निद्रा स्मृति -

 रट लिया, सुना दिया, जीवन भर वही हो गए"_


*अर्थात्*: योग सूत्र तोते के समान रटने से योगी नहीं बनते। 

*प्रमाण* को जीवन में परखो, 

*विपर्यय* को अपने भ्रम में पकड़ो, 

*विकल्प* को अपनी अनावश्यक चिंताओं में देखो, *निद्रा* को अपने आलस में तोड़ो, 

*स्मृति* को दुख के संस्कार में पहचानो। 


तभी कोड टूटेगा। वरना PhD भी कर लो योग में, पर मन वैसे का वैसा।


*2. आसन = कोड, पुस्तक ≠ समाधान*

_"शीर्षासन कोड है, मकरासन कोड है... पुस्तक बना कर लिया, लचीला बन गया, समाप्त? नहीं"_


*गहरा सत्य*: शरीर झुक गया = योग नहीं हुआ। *आसन शरीर का पासवर्ड है*। 

शीर्षासन करने से रक्त सिर में गया - अब उस ऊर्जा का करोगे क्या? 

मकरासन से रीढ़ खुली - उस शांति को दिन भर रखोगे कैसे? 


*कोड तोड़ना =* मूलाधार से सहस्रार तक ऊर्जा ले जाना, पुनः वापस मूलाधार पर लाना। उठाना और नीचे लाना। यानी *ध्यान को कर्म में उतारना*। यही राघव ने किया - रामायण का कोड तोड़कर जेल में उतारा।


*3. कंपन = कोड का अलार्म* 

_"आसन में कंपन क्यों आता है? लोग छोड़ के बैठ गए। वो कोड है"_


*ये तो 100% सत्य*: जब प्राणायाम या आसन में शरीर काँपे, तो लोग भयभीत हो जाते हैं। सोचते हैं "ठीक नहीं हो रहा है"। *पर कंपन = शरीर के ब्लॉक टूटने की ध्वनि*। जैसे जंग लगा ताला खोलो तो ध्वनि करता है। 


*कोड तोड़ने की विधि*: कंपन आए तो भागो मत। साँस गहरी करो, साक्षी बनकर देखो। गुरु के सानिध्य में सीखो कि इस कंपन को किस रोग में कैसे प्रयोग करना है। यही *अभ्यास* है -

 _तत्र स्थितौ यत्नोऽभ्यासः_ 1.13।


-*राघव की कहानी + ये ऑडियो = पूरा योग*

योग सूत्र राघव का जीवन ऑडियो का कोड

**विपर्यय** 1.8 संसार ने कहा "हत्यारा" - ये भ्रम था रट लिया पर जाना नहीं - ये विपर्यय

**अभ्यास** 1.12 प्रतिदिन 4 बजे रामायण - 7 वर्ष अभ्यास मूलाधार से उठाकर नीचे लाना = अभ्यास

**वैराग्य** 1.12- 7 वर्ष का दण्ड स्वीकार किया - अनासक्ति "लचीला बन गया, समाप्त?" - देह से वैराग्य

**परहित** बच्ची बचाई = धर्म कोड तोड़कर रोग मिटाना = परहित

*राघव ने आसन नहीं किया, जीवन को आसन बना दिया*। जेल उसकी गुफा थी, रामायण उसका प्राणायाम था, अनन्या को बचाना उसका शीर्षासन था - ऊर्जा सबसे ऊपर ले गया।


*जीवन में उपयोग कैसे करें - 4 नियम:*


*1. प्रातः का कोड*: 5 मिनट बैठो। जो सूत्र रट रहे हो - प्रमाण, विपर्यय - उसे आज दिन में पकड़ो। "कहाँ मैं भ्रम में हूँ?" यही अभ्यास।


*2. शरीर का कोड*: आसन करते समय अंगमेजयत्व या कंपन आए तो रुकना नहीं। 3 गहरी साँस लो। शरीर से पूछो - "कौन सी ग्रंथि खुल रही है?" यही अनुभव से सीखना।


*3. सम्बन्ध का कोड*: राघव के समान- कोई दुख में है तो "पर पीड़ा सम नहिं अधमाई" स्मरण करो। सहायता कर सको तो कर्म करो, न कर सको तो प्रार्थना। यही कोड तोड़ना।


*4. गुरु का कोड*: _गुरु के सानिध्य में_ - अकेले कोड नहीं टूटते। राघव की रामायण थी, जेलर अविनाश थे, अनन्या की चिट्ठी थी। आपके जीवन में कौन गुरु है? उसे पकड़ो।


*योग विषय नहीं, जीवन शैली है* - पूर्णतः सत्य। योग दरी पर 1 घंटा और शेष 23 घंटे रावण बने रहना= ढोंग। योग दरी पर 10 मिनट पर दिन भर राम = योग।

*आपके लिए एक सूत्र:*

👉कोड रटने से ताले नहीं खुलते,

👉कोड जीने से जीवन खुलता है 🔓


🚩आसन देह को झुकाता है,

अनुभव अहंकार को झुकाता है 🙇🏽


🚩कंपन आए तो भय मत करना,

वो तेरी श्रृंखलाओं के टूटने की ध्वनि है ⛓️


🚩अभ्यास + वैराग्य + परहित = 

यही योग है, यही जीवन है, यही राम है 🚩

*राघव ने जेल में रामराज बनाया, आप अपने घर में बना दो*।🙏🏽_जय श्री राम_🕉️ 


🚩🕉️🚩_हरि ॐ_ 🙏🏽🚩🕉️

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