डायरेक्टलिंक_3 प्रत्यक्ष यूआरएल https://www.cpmrevenuegate.com/s9z8i5rpd?key=0fff061e5a7ce1a91ea39fb61ca61812 डायरेक्टलिंक_1 प्रत्यक्ष यूआरएल https://www.cpmrevenuegate.com/vy0q8dnhx?key=096a4d6815ce7ed05c0ac0addf282624 डायरेक्टलिंक_2 प्रत्यक्ष यूआरएल https://www.cpmrevenuegate.com/h00w82fj?key=

रविवार, 15 सितंबर 2024

केवल वृक्क या किडनी को अच्छा करने के लिए योग एवं अन्य उपाय

https://515167.click-allow.top/ https://vdbaa.com/fullpage.php?section=General&pub=515167&ga=g

 केवल वृक्क या किडनी को अच्छा करने के लिए योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद में कई उपाय हैं उनमें से कुछ यहां देखें:

1. *योग षटकर्म*:

   वारिसार धौति क्रिया, लघु शंखप्रक्षालन, सहज अग्निसार प्रकार 1, एवं 2, सहज कपालभाति 

2. *योगासन*:

 *वज्रासन*:  वृक्क या किडनी को सशक्त बनाता है और पाचन तंत्र को उन्नत करता है।

 *भुजंगासन*: वृक्क या किडनी को  सक्रिय करता है और रक्त प्रवाह में वृद्धि करता है।

*पवनमुक्तासन*: वृक्क या किडनी को स्वच्छ करता है और विषाक्त पदार्थों को मूत्र मार्ग से बाहर निकालता है।

*सर्वांगासन* इस आसन को करने से शरीर में गुरुत्व प्रभाव के कारण वृक्क क्रिया में शीघ्र सुधार हो उन्नत करता है साथ ही मुद्राओं का भी अभ्यास करें। यदि सर्वांगासन सम्भव न हो तो आयंगर की तकनीकों का प्रयास करें।

*शवासन*: वृक्क या किडनी को विश्रांति देता है और तनाव तथा दबाव को कम करता है।

3.*आयुर्वेद*:

*गोखरू*: वृक्क या किडनी को सशक्त बनाता है और अश्मरी या किडनी स्टोन बनने की प्रक्रिया को रोकता है।

 *पुनर्नवा*: वृक्क या किडनी को स्वच्छ करता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।

 *वरुण*: वृक्क या किडनी को सक्रिय करता है और रक्त प्रवाह तथा नेफ्रोंस को पोषण बढ़ाता है।

*कालमेघ*: वृक्क या किडनी को स्वच्छ करता है और शरीर में उत्पन पदार्थों को बाहर निकालता है।

4.*प्राकृतिक चिकित्सा*

   *वस्ति कर्म से मलाशय को स्वच्छ   रखें। इससे अपान वायु दूषित नहीं हो पायेगी और वृक्क पर पड़ने वाला अनावश्यक दबाव नहीं होगा।

* ठंडा या गर्म ठंडा कटि स्नान ऋतु अनुसार 10 से 20 मिनिट्स का करें, ध्यान रखें पैर गीले न हों। 

* मेहन स्नान 7 से 10 मिनिट्स का करें जो जीवनी शक्ति को बढ़ाता है। 

* *गैस्ट्रो हेपेटिक पैक दिन में दो बार लगाएं।

* गर्म अर्ध इमर्शन बाथ 35 से 40डिग्री सेल्सियस का प्रतिदिन करें। यह वृक्क को आजीवन स्वच्छ रखेगा।

5.*भोजन आहार*:

 *पानी पीना*: वृक्क या किडनी को स्वच्छ रखने के लिए कम से कम ढाई से तीन लिटर तक पर्याप्त पानी पीना चाहिए।

*नींबू पानी और शहद*: वृक्क या किडनी को सक्रिय करता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।

 *पालक और मूली का साग*: वृक्क या किडनी को सुदृढ़ बनाता है और पाचन तंत्र को सुधार कर मलोत्सर्जन ठीक रखता है।

*गाय का दही और फल*: वृक्क या किडनी को सक्रिय बनाए रखता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर अम्ल और क्षार में संतुलन बनाए रखता है।

ध्यान रखें कि ये उपाय केवल सुझाव हैं और वृक्क या किडनी की समस्याओं के लिए चिकित्सक का परामर्श लेना आवश्यक है।

डॉ त्रिभुवन नाथ श्रीवास्तव, पूर्व प्राचार्य, विवेकानंद योग प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, बाजोर, सीकर, राजस्थान

अपनी भाषा का चयन

https://515167.click-allow.top/ https://vdbaa.com/fullpage.php?section=General&pub=515167&ga=g


हिन्दी दिवस के अवसर पर,

किसी भी गद्य या पद्य को लिखने में हिन्दी भाषा के शब्दों को ही प्रयोग किया जाय। यही हिन्दी दिवस मनाने का एक मात्र धर्म है।

*हिन्दी बोलने का प्रयास करें...*

ये वो उर्दू के शब्द जो आप प्रतिदिन प्रयोग करते हैं, इन शब्दों को त्याग कर #मातृभाषा*  के शब्दों का प्रयोग करें...

 

००० *उर्दू* @ *हिंदी*

००१ ईमानदार @ निष्ठावान

००२ इंतजार @ प्रतीक्षा

००३ इत्तेफाक @ संयोग



००४ सिर्फ @ केवल, मात्र

००५ शहीद @ बलिदान

००६ यकीन @ विश्वास, भरोसा

००७ इस्तकबाल @ स्वागत

००८ इस्तेमाल @ उपयोग, प्रयोग

००९ किताब @ पुस्तक

०१० मुल्क @ देश

०११ कर्ज़ @ ऋण

०१२ तारीफ़ @ प्रशंसा

०१३ तारीख @ दिनांक, तिथि

०१४ इल्ज़ाम @ आरोप

०१५ गुनाह @ अपराध

०१६ शुक्रिया @ धन्यवाद, आभार

०१७ सलाम @ नमस्कार, प्रणाम

०१८ मशहूर @ प्रसिद्ध

०१९ अगर @ यदि

०२० ऐतराज़ @ आपत्ति

०२१ सियासत @ राजनीति

०२२ इंतकाम @ प्रतिशोध

०२३ इज्ज़त @ मान, प्रतिष्ठा

०२४ इलाका @ क्षेत्र

०२५ एहसान @ आभार, उपकार

०२६ अहसानफरामोश @ कृतघ्न

०२७ मसला @ समस्या

०२८ इश्तेहार @ विज्ञापन

०२९ इम्तेहान @ परीक्षा

०३० कुबूल @ स्वीकार

०३१ मजबूर @ विवश

०३२ मंजूरी @ स्वीकृति

०३३ इंतकाल @ मृत्यु, निधन 

०३४ बेइज्जती @ तिरस्कार

०३५ दस्तखत @ हस्ताक्षर

०३६ हैरानी @ आश्चर्य

०३७ कोशिश @ प्रयास, चेष्टा

०३८ किस्मत @ भाग्य

०३९ फै़सला @ निर्णय

०४० हक @ अधिकार

०४१ मुमकिन @ संभव

०४२ फर्ज़ @ कर्तव्य

०४३ उम्र @ आयु

०४४ साल @ वर्ष

०४५ शर्म @ लज्जा

०४६ सवाल @ प्रश्न

०४७ जवाब @ उत्तर

०४८ जिम्मेदार @ उत्तरदायी

०४९ फतह @ विजय

०५० धोखा @ छल

०५१ काबिल @ योग्य

०५२ करीब @ समीप, निकट

०५३ जिंदगी @ जीवन

०५४ हकीकत @ सत्य

०५५ झूठ @ मिथ्या, असत्य

०५६ जल्दी @ शीघ्र

०५७ इनाम @ पुरस्कार

०५८ तोहफ़ा @ उपहार

०५९ इलाज @ उपचार

०६० हुक्म @ आदेश

०६१ शक @ संदेह

०६२ ख्वाब @ स्वप्न

०६३ तब्दील @ परिवर्तित

०६४ कसूर @ दोष

०६५ बेकसूर @ निर्दोष

०६६ कामयाब @ सफल

०६७ गुलाम @ दास

०६८ जन्नत @ स्वर्ग 

०६९ जहन्नुम @ नर्क

०७० खौ़फ @ डर

०७१ जश्न @ उत्सव

०७२ मुबारक @ बधाई/शुभेच्छा

०७३ लिहाजा़ @ इसलिए

०७४ निकाह @ विवाह

०७५ आशिक @ प्रेमी 

०७६ माशूका @ प्रेमिका 

०७७ हकीम @ वैद्य

०७८ नवाब @ राजा

०७९ रूह @ आत्मा 

०८० खु़दकुशी @ आत्महत्या

०८१ इज़हार @ प्रस्ताव

०८२ बादशाह @ राजा/महाराजा

०८३ ख़्वाहिश @ महत्वाकांक्षा 

०८४ जिस्म @ शरीर/अंग

०८५ हैवान @ दैत्य/असुर

०८६ रहम @ दया 

०८७ बेरहम @ निर्दय निष्करुण

०८८ खा़रिज @ बहिष्कृत  

०८९ इस्तीफ़ा @ त्यागपत्र

०९० रोशनी @ प्रकाश 

०९१ मसीहा @ देवदूत

०९२ पाक @ पवित्र

०९३ क़त्ल @ हत्या 

०९४ कातिल @ हत्यारा

०९५ मुहैया @ उपलब्ध

०९६ फ़ीसदी @ प्रतिशत

०९७ कायल @ प्रशंसक

०९८ मुरीद @ भक्त

०९९ कीमत @ मूल्य (मुद्रा में)

१०० वक्त @ समय

१०१ सुकून @ शांति

१०२ आराम @ विश्राम

१०३ मशरूफ़ @ व्यस्त

१०४ हसीन @ सुंदर

१०५ कुदरत @ प्रकृति

१०६ करिश्मा @ चमत्कार

१०७ इजाद @ आविष्कार

१०८ ज़रूरत @ आवश्यक्ता

१०९ ज़रूर @ अवश्य

११० बेहद @ असीम

१११ तहत @ अनुसार

११२ जानकारी @ ज्ञान 

११३ खुशबू @ सुगन्ध 

११४ बदबू @ दुर्गन्ध 

११५ दरवाजा @ द्वार 

११६ शादी @ विवाह 

११७ चादर पोशी @ पट्टाभिषेक 

११८ गद्दीनसीन @ सिंहासनारूढ ११९ बेवकूफ @ मूर्ख 

१२० दुनिया @ विश्व 

१२१ चांद @ चन्द्रमा या चन्द्र 

१२२ खतरनाक @ भयावह 

१२३ डर @ भय 

१२४ डरपोक @ भयग्रस्त 

१२५ रास्ता @ पथ या मार्ग 

१२६ सभी प्रकार की गालियां मुस्लिम भाषाओं से ही निकली हुई हैं।

इनके अतिरिक्त; हम प्रतिदिन अनायास ही अनेक *उर्दू-शब्द* प्रयोग में लेते हैं !

कारण है; ये बाॅलिवुड और मीडिया; 

जो एक षड़यंत्र के अनुसार,

हमारी *मातृभाषा* पर ग्रहण लगाते आ रहे हैं।


*हिन्दी हमारी राजभाषा एवं मातृभाषा है;*

*इसका सम्मान करें।*

*हमारी-भाषा बचाइए;*

*हमारी-संस्कृति बचाइए।*


आपसे विनम्र अनुरोध है कि इसे अपने समस्त मित्रों-बंधुओं-अपनों को प्रेषित अवश्य करें।


*नए भारत का वैश्विक संकल्प...* 

*सनातन वैदिक धर्म...विश्व धर्म*

*अखंड हिंदु राष्ट्र भारत...विश्व गुरु भारत*


#धर्मो रक्षति रक्षितः...*🚩

#डॉ त्रिभुवन नाथ श्रीवास्तव, पूर्व प्राचार्य, विवेकानंद योग प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, बाजोर, सीकर, राजस्थान

शनिवार, 14 सितंबर 2024

पानी कितना पीना चाहिए, पढ़े और शेयर करें।

https://515167.click-allow.top/ https://vdbaa.com/fullpage.php?section=General&pub=515167&ga=g

 #पानी कितना पीना चाहिए, पढ़े और शेयर करें#

पानी कितना पीना चाहिए, यह पानी पीने की मात्रा व्यक्ति की आयु, लिंग, शरीर का भार, गतिविधि स्तर और जलवायु पर निर्भर करती है। प्रायः एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में कम से कम 8-10 गिलास (लगभग 2 लीटर) पानी पीना चाहिए। लेकिन यह मात्रा व्यक्ति की आवश्यकता के अनुसार अधिक या कम हो सकती है। कुछ सामान्य दिशानिर्देश यह हैं: 

<script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-4578000977226569"

     crossorigin="anonymous"></script>

 - सामान्य व्यक्ति: 8-10 गिलास (2 लीटर)

 - खिलाड़ी या जिम जाने वाले: 11-13 गिलास (3 लीटर) 

 - गर्भवती महिलाएं: 10-12 गिलास (2.5 लीटर) 

 - स्तनपान कराने वाली महिलाएं: 12-15 गिलास (3.5 लीटर)

 - वरिष्ठ व्यक्ति: 8-10 गिलास (2 लीटर) 

 यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये केवल अनुमानित मात्राएं हैं और व्यक्ति की विशिष्ट आवश्यकताएं भिन्न भिन्न हो सकती हैं। #अमेरिकन रिसर्च में पानी पीने का यह निष्कर्ष निकाला,👇 

अमेरिकन रिसर्च में पानी पीने के बारे में कई निष्कर्ष निकले हैं। यहाँ कुछ प्रमुख निष्कर्ष दिए गए हैं: 

 - नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (NAS) के अनुसार, पुरुषों को दिन में लगभग 3.7 लीटर (125 ऑउंस) पानी पीना चाहिए, 

जबकि महिलाओं को लगभग 2.7 लीटर (91 ऑउंस) पानी पीना चाहिए। 

<script type="text/javascript" src="https://udbaa.com/bnr.php?section=General&pub=515167&format=300x250&ga=g"></script>

<noscript><a href="https://yllix.com/publishers/515167" target="_blank"><img src="//ylx-aff.advertica-cdn.com/pub/300x250.png" style="border:none;margin:0;padding:0;vertical-align:baseline;" alt="ylliX - Online Advertising Network" /></a></noscript>

- हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग पर्याप्त पानी पीते हैं, उनमें हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर का घातक प्रभाव कम होता है। 

- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, पानी पीने से शरीर का भार को कम करने में सहायता मिल सकती है, क्योंकि यह भूख को कम करता है और चयापचय को बढ़ाता है। 

- अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के अनुसार, पर्याप्त पानी पीने से रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है और हृदय स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। 

 यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये निष्कर्ष सामान्य दिशानिर्देश हैं और व्यक्ति की विशिष्ट आवश्यकताएं भिन्न भिन्न हो सकती हैं। #राजस्थान जैसे स्थानों में रहने वालों को कितना पानी पीना चाहिए, राजस्थान में रहने वालों को अधिक पानी पीना चाहिए क्योंकि यह राज्य गर्म और शुष्क जलवायु वाला है। यहाँ के निवासियों को दिन में कम से कम 12-15 गिलास (लगभग 3-4 लीटर) पानी पीना चाहिए। यह मात्रा व्यक्ति की आयु, लिंग, शारीरिक भार, गतिविधि स्तर और जलवायु के अनुसार अधिक या कम हो सकती है। राजस्थान में रहने वालों को अधिक पानी पीने की आवश्यकता है, क्योंकि: - गर्म और शुष्क जलवायु में शरीर अधिक पानी खो देता है। शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है। पानी पीने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और डिहाइड्रेशन से बचा जा सकता है। 

#पानी कम पीने से कौन कौन से रोग हो सकते हैं, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह सिर्फ एक अनुमानित मात्रा है और व्यक्ति की विशिष्ट आवश्यकताएं भिन्न भिन्न हो सकती हैं। पानी कम पीने से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं: 

 1. डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण): शरीर में पानी की कमी होने से निर्जलीकरण या डिहाइड्रेशन होता है, जिससे थकान, सिरशूल, और चक्कर आना जैसे लक्षण हो सकते हैं। 

 2. कोष्ठबद्धता (कॉन्स्टिपेशन): पानी कम पीने से मल कठोर हो जाता है, जिससे कोष्ठबद्धता होती है। 

 3. मूत्र संबंधी समस्याएं: पानी कम पीने से मूत्र पथ की समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि मूत्र में दाह, मूत्र संक्रमण, और अश्मरी या पथरी। 

 4. वृक्क की समस्याएं: पानी कम पीने से वृक्क की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे वृक्क या किडनी की समस्या हो सकती हैं। 

 5. त्वचा संबंधी समस्याएं: पानी कम पीने से त्वचा रुखी और निर्जीव हो जाती है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। 

 6. थकान और दुर्बलता: पानी कम पीने से शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है, जिससे थकान और दुर्बलता का अनुभव होता है। 

 7. सिर शूल और माइग्रेन: पानी कम पीने से सिर शूल और माइग्रेन की समस्या हो सकती है।

8. शारीरिक भार बढ़ना: पानी कम पीने से चयापचय धीमा हो जाता है, जिससे भार बढ़ सकता है। 

 9. पाचन संबंधी समस्याएं: पानी कम पीने से पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। 

 यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये समस्याएं पानी कम पीने के कारण हो सकती हैं, लेकिन अन्य कारकों से भी हो सकती हैं। 

प्रश्न - जल चिकित्सा क्या है ?

उत्तर -जल चिकित्सा या हाइड्रोथेरेपी एक प्रकार की चिकित्सा पद्धति है जिसमें पानी का उपयोग शरीर को लाभ देने, शूल को कम करने और स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए किया जाता है। इसमें पानी के विभिन्न तापमान, दबाव और गति का उपयोग किया जाता है जिससे कि शरीर को विशिष्ट लाभ मिल सके। 

 जल चिकित्सा के कुछ प्रमुख लाभ हैं: - 

शूल निवारण: पानी का उपयोग शूल को कम करने और मांसपेशियों को तनाव मुक्त करने के लिए किया जाता है। 

तनाव कम करना: पानी का उपयोग तनाव और चिंता को कम करने के लिए किया जाता है। 

शोथ कम करना: पानी का उपयोग शोथ या सूजन को कम करने और वृणों या घावों को शीघ्र ठीक करने के लिए किया जाता है। 

 पाचन में सुधार: पानी का उपयोग पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और कोष्ठबद्धता को रोकने के लिए किया जाता है। 

त्वचा की देखभाल: पानी का उपयोग त्वचा को स्वस्थ और कान्तिवान बनाने के लिए किया जाता है। 

 जल चिकित्सा के विभिन्न प्रकार हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं: - हाइड्रोमसाज , एक्वा थेरेपी , पानी की एक्सरसाइज , विशेष स्नान चिकित्सा , स्पा थेरेपी, पानी कैसे पीना।

 यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जल चिकित्सा को एक योग्य चिकित्सक की देखरेख में किया जाना चाहिए जिससे कि इसके लाभ प्राप्त किए जा सकें और किसी भी संभावित गम्भीरता  से बचा जा सके। 

जल चिकित्सा के जनक हैं-

जल चिकित्सा के जनक सेबास्टियन नीप कहे जाते हैं, जो एक जर्मन ईसाई पादरी और चिकित्सक थे। उन्होंने 19वीं सदी में जल चिकित्सा की तकनीक विकसित की और इसका उपयोग विभिन्न रोगियों के उपचार के लिए किया। सेबास्टियन नीप ने जल चिकित्सा के माध्यम से शरीर को स्वस्थ रखने और रोगों को ठीक करने के लिए पानी की शक्ति का उपयोग करने पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने जल चिकित्सा के विभिन्न प्रकारो का विकास किया, जिनमें स्नान, सेंक, और पानी की एक्सरसाइज सम्मिलित हैं। नीप की जल चिकित्सा पद्धति में पानी के विभिन्न तापमान, दबाव और गति का उपयोग किया जाता है जिससे शरीर को विशिष्ट लाभ मिल सके। उनकी तकनीकों में से कुछ में सम्मिलित हैं: - स्नान चिकित्सा - सेंक चिकित्सा - पानी की एक्सरसाइज - जलीय मर्दन - जलीय सेंक नीप की जल चिकित्सा पद्धति को आज भी विश्वभर में मान्यता प्राप्त है और इसका उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के उपचार के लिए किया जाता है। 

#वेदों में जल चिकित्सा:- 

हाँ, वेदों में जल चिकित्सा का वर्णन मिलता है। #वेदों में जल को एक पवित्र और चिकित्सीय तत्व माना गया है, जिसका उपयोग विभिन्न रोगों के उपचार के लिए किया जाता था। #अथर्ववेद में जल चिकित्सा का विस्तृत वर्णन मिलता है, जिसमें जल के विभिन्न गुणों और इसके चिकित्सीय उपयोगों का वर्णन किया गया है। इसमें जल को एक प्राकृतिक उपचारक माना गया है, जो शरीर को स्वस्थ रखने और रोगों को ठीक करने में सहायता करता है। #अथर्ववेद में जल चिकित्सा के विभिन्न प्रकारों का वर्णन मिलता है, जिनमें सम्मिलित हैं: - स्नान चिकित्सा - जलीय सेंक - पानी में व्यायाम - जलीय मर्दन क्रिया या घर्षण जल स्नान इसके अतिरिक्त, #चरक संहिता, #वागभट्ट संहिता और #सुश्रुत संहिता जैसे आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी #जल चिकित्सा का वर्णन मिलता है, जिसमें जल के चिकित्सीय उपयोगों और इसके विभिन्न प्रकारों का विस्तृत वर्णन किया गया है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि #वेदों और #आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित जल चिकित्सा के प्रयोग आज भी प्रासंगिक हैं और इनका उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के उपचार के लिए किया जाता है। 

👉 प्रश्न # जब वेदों में जल चिकित्सा लिखी है तो सेबेस्टियन नीप कैसे जल चिकित्सा के जनक हुए?👇 

उत्तर# यह प्रश्न सौ प्रतिशत सही है! वेदों में जल चिकित्सा का वर्णन होने के अतिरिक्त भी, सेबेस्टियन नीप को जल चिकित्सा के जनक के रूप में माना जाता है, क्योंकि उन्होंने 19वीं सदी में जल चिकित्सा को एक व्यवस्थित और आधुनिक वैज्ञानिक आधार से विकसित किया और इसका यूरोपीय देशों में प्रचार प्रसार किया। वेदों में जल चिकित्सा का वर्णन प्राचीन काल में किया गया था, लेकिन यह ज्ञान कालांतर में विश्व के अनेक देशों से लुप्त हो गया था। सेबेस्टियन नीप ने जल चिकित्सा को पुनः से खोजा और इसके विभिन्न प्रकारों को विकसित किया, जैसे कि स्नान चिकित्सा, जलीय सेंक, और पानी के अन्दर व्यायाम आदि। उन्होंने जल चिकित्सा को एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक आधार से प्रस्तुत किया, जिससे यह पश्चिमी देशों में लोकप्रिय हुआ। इसलिए, उन्हें जल चिकित्सा के जनक के रूप में माना जाता है, भले ही वेदों में इस ज्ञान का वर्णन पहले से ही उपलब्ध था। यह एक उदाहरण है कि कैसे प्राचीन ज्ञान को पुनः से खोजा जा सकता है और इसका विकास किया जा सकता है जिससे कि यह नए युग में उपयोगी हो सके।

#डॉ त्रिभुवन नाथ श्रीवास्तव, #पूर्व प्राचार्य, #विवेकानंद योग प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, बाजोर, सीकर, राजस्थान।

आंत्र वृद्धि या हर्निया रोग क्या है

https://515167.click-allow.top/ https://vdbaa.com/fullpage.php?section=General&pub=515167&ga=g

 <script type="text/javascript" src="https://udbaa.com/bnr.php?section=General&pub=515167&format=300x250&ga=g"></script>

<noscript><a href="https://yllix.com/publishers/515167" target="_blank"><img src="//ylx-aff.advertica-cdn.com/pub/300x250.png" style="border:none;margin:0;padding:0;vertical-align:baseline;" alt="ylliX - Online Advertising Network" /></a></noscript>

👉आंत्रवृद्धि या हर्निया: एक संक्षिप्त परिचय👇

++++++++++++++++++++++++++

✍️ आंत्रवृद्धि या हर्निया रोग एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के किसी अंग का एक अंश अपनी सामान्य स्थिति से खिसक कर शरीर के किसी अन्य भाग में चला जाता है। यह प्रायः पर उदरगुहा के अंदर होता है और शरीर के किसी दुर्बल भाग से निकल आता है।

आंत्रवृद्धि या हर्निया के कारण

 * कोष्ठबद्धता: लगातार कोष्ठबद्धता या विबन्ध या कब्ज रहने से  उदर पर आंतरिक दबाव बढ़ता है।

 * कास या खांसी: लगातार कास आने से भी उदर पर आंतरिक दबाव पड़ता है।

 * भारी सामान उठाना: भारी सामान उठाने से उदर की मांसपेशियों पर खिंचाव और दबाव पड़ता है।

 * गर्भावस्था: गर्भावस्था के समय उदर के निचले भाग पर दबाव बढ़ता है।

 * उदर का पूर्व में हुआ कोई शल्यकर्म या सर्जरी: उदर के शल्य क्रिया के उपरान्त पेट की मांसपेशियां दुर्बल हो सकती हैं।

आंत्रवृद्धि या हर्निया के लक्षण

 * उदर में शूल 

 * शोथ या स्वेलिंग 

 * उभार

 * वमनेच्छा या मतली होना 

 * वमन होना 

   आंत्रवृद्धि या हर्निया के प्रकार

<script type="text/javascript">

atOptions = {

'key' : 'b3360e4435d5ea66ff0bc85801528d10',

'format' : 'iframe',

'height' : 50,

'width' : 320,

'params' : {}

};

</script>

<script type="text/javascript" src="//www.topcreativeformat.com/b3360e4435d5ea66ff0bc85801528d10/invoke.js"></script>


आंत्रवृद्धि या हर्निया कई प्रकार के होते हैं, जैसे:

 * इंगुइनल आंत्रवृद्धि या हर्निया: यह सबसे सामान्य प्रकार कीआंत्रवृद्धि या हर्निया है जो कमर और जांघ के बीच होता है।

 * फेमोरलआंत्रवृद्धि या हर्निया: यह महिलाओं में प्रायः अधिक होता है और जांघ के ऊपरी भाग में होता है।

 * अम्बिलिकल आंत्रवृद्धि या हर्निया: यह नाभि के पास होता है।

 * हाइटस आंत्रवृद्धि या हर्निया: यह उदर के ऊपरी भाग में होता है जहां अन्ननली छोटीआंत्र से जुड़ती है।

*टेस्टिकुलर आंत्रवृद्धि या हर्निया: इसमें आंत्र का भाग अंडकोष में उतर आता है।

*स्टैंगुलेटेड आंत्रवृद्धि या हर्निया : इस प्रकार की आंत्रवृद्धि या हर्निया में आंत्रवृद्धि उलझ कर मलाशय भाग में फंस जाती हैं। जिससे मलमार्ग अवरुद्ध हो जाता है और मल वमन द्वारा मुख मार्ग से बाहर निकल आता है। यह अति गम्भीर अवस्था है। जहां आकस्मिक चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

 आंत्रवृद्धि या हर्निया का उपचार 

 आंत्रवृद्धि या हर्निया का उपचार शल्य क्रिया या सर्जरी के माध्यम से किया जाता है। सर्जरी के दो मुख्य प्रकार हैं:

 * ओपन सर्जरी: इसमें एक बड़ा चीरा लगाकरआंत्रवृद्धि या  हर्निया को ठीक किया जाता है।

 * लेप्रोस्कोपिक सर्जरी: इसमें छोटे चीरे लगाकर आंत्रवृद्धि या हर्निया को ठीक किया जाता है।

 आंत्रवृद्धि या हर्निया से बचाव

 * स्वस्थ आहार दिनचर्या: जिसमें आंख, कान, नाक और त्वचा के विषयों के साथ अति ना करें और मुख द्वारा भोजन स्वरूप रेशे युक्त या फाइबर युक्त भोजन अधिक लें जिससे कोष्ठबद्धता न हो।

 * शरीर भार वृद्धि नियंत्रण: मोटापा आंत्रवृद्धि या हर्निया का एक गम्भीर कारक है।

 * धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान उदर की मांसपेशियों को दुर्बल बनाता है।

 * भारी सामान उठाने से बचें: भारी सामान उठाने से पहले किसी से सहायता अवश्य लें।

ध्यान दें: यह तथ्य केवल सामान्य ज्ञान के लिए है। किसी भी रोग के लिए चिकित्सक परामर्श लेना आवश्यक है।

*ध्यान रखें कि "रोगों से बचाव रखना उपचार से श्रेष्ठ होता है," "Prevention is better than cure. "

शुक्रवार, 13 सितंबर 2024

ॐ वेदों में

https://515167.click-allow.top/ https://515167.click-allow.top/ https://vdbaa.com/fullpage.php?section=General&pub=515167&ga=g https://vdbaa.com/fullpage.php?section=General&pub=515167&ga=g

 

<script type="text/javascript">

atOptions = {

'key' : '25ebc24fc143375d992e047ab853ea37',

'format' : 'iframe',

'height' : 90,

'width' : 728,

'params' : {}

};

</script>

<script type="text/javascript" src="//www.topcreativeformat.com/25ebc24fc143375d992e047ab853ea37/invoke.js"></script>

ॐ (ओम) का विवरण वेदों में विस्तृत रूप से मिलता है। यह एक पवित्र और मंगलमयी ध्वनि है, जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विकास का प्रतीक है। वेदों में ॐ को सर्वोच्च शक्ति और परमात्मा का प्रतीक माना गया है।


यजुर्वेद में ॐ को "प्राणों का सार" और "ब्रह्म का स्वरूप" कहा गया है। सामवेद में ॐ को "संगीत का सार" और "ब्रह्म का नाद" कहा गया है।


अथर्ववेद में ॐ को "सर्वोच्च शक्ति" और "परमात्मा का स्वरूप" कहा गया है। यहाँ ॐ को ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विकास का कारण बताया गया है।


<script type="text/javascript">

 atOptions = {

  'key' : 'b5c5f03eb4f4ab79c837a34b7a04b983',

  'format' : 'iframe',

  'height' : 600,

  'width' : 160,

  'params' : {}

 };

</script>

<script type="text/javascript" src="//www.topcreativeformat.com/b5c5f03eb4f4ab79c837a34b7a04b983/invoke.js"></script>

उपनिषदों में भी ॐ का विवरण मिलता है, जहाँ इसे "अद्वितीय" और "अक्षर" कहा गया है। यहाँ फ़िर से ॐ को परमात्मा का प्रतीक और ब्रह्मांड की उत्पत्ति का कारण बताया गया है।


इस प्रकार, वेदों में ॐ का विवरण एक पवित्र और मंगलमयी ध्वनि के रूप में मिलता है, जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विकास का प्रतीक है और परमात्मा का स्व


रूप है।

बुधवार, 11 सितंबर 2024

राधाष्टमी,भाद्रपद शुक्ल अष्टमी, विक्रम संवत 2081/11 सितम्बर, 2024)

https://515167.click-allow.top/ https://vdbaa.com/fullpage.php?section=General&pub=515167&ga=g

 <script type="text/javascript">

atOptions = {

'key' : '25ebc24fc143375d992e047ab853ea37',

'format' : 'iframe',

'height' : 90,

'width' : 728,

'params' : {}

};

</script>

<script type="text/javascript" src="//www.topcreativeformat.com/25ebc24fc143375d992e047ab853ea37/invoke.js"></script>

🪷🪷🪷🪷🪷🪷*राधा अष्टमी*🪷🪷🪷🪷🪷🪷

(भाद्रपद शुक्ल अष्टमी, विक्रम संवत 2081/11 सितम्बर, 2024)



भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी राधा अष्टमी के रूप में मनाई जाती है। माना जाता है कि  इसी दिन द्वापर युग में श्री राधा जी का इस धरती में अवतरण हुआ था। अतः यह दिन उनके जन्म या प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। 


माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात्रि बारह बजे हुआ था और श्रीराधा जी का जन्म शुक्ल पक्ष की अष्टमी को दोपहर बारह बजे हुआ था। इस वर्ष श्री राधा अष्टमी का पर्व आज दिनांक 11 सितम्बर को है।


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राधाजी, वृषभानु गोप और उनकी पत्नी कीर्ति की पुत्री थीं।  पद्मपुराण के एक उल्लेख के अनुसार, राधाजी राजा वृषभानु की पुत्री थीं। यह उल्लेख भी मिलता है कि एक बार  एक यज्ञ आयोजन के पूर्व यज्ञ भूमि में राजा वृषभानु को राधाजी मिली थीं। कहते हैं कि राजा ने राधाजी को अपनी पुत्री मानकर उनका पालन पोषण किया।


एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में अवतार लिया तब  लक्ष्मी जी राधा के रूप में पृथ्वी में अवतरित हुईं।


🙏तप्त-कांचन गौरांगी श्री राधे वृंदावनेश्वरी।

    वृषभानु सुते देवी प्रणमामि हरिप्रिया।।

    ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै नम:। ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै विद्महे 

     गान्धर्विकायै विधीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्।

    श्री राधा विजयते नमः, श्री राधाकृष्णाय नम:।।🙏🙏

राधा जी को ये भोग सर्वाधिक प्रिय हैं , अरवी की सब्जी, रबड़ी, पान का बीड़ा और होली खेलना, आप इनमें से कुछ भी बना कर उस पात्र में तुलसीपत्र रख कर ठाकुर जी का भोग लगाकर श्री युगल सरकार की कृपा प्राप्त कर सकते हैं...!!

💖🙏राधेराधेजी🙏💖🎊🎉🦚

मंगलवार, 10 सितंबर 2024

** #बहुत सुंदर विचार और सार्थक तथ्य # ***

https://515167.click-allow.top/ https://vdbaa.com/fullpage.php?section=General&pub=515167&ga=g

1,  <script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-4578000977226569"

 2,      crossorigin="anonymous"></script>

<script type="text/javascript" src="https://udbaa.com/bnr.php?section=General&pub=515167&format=300x250&ga=g"></script>

<noscript><a href="https://yllix.com/publishers/515167" target="_blank"><img src="//ylx-aff.advertica-cdn.com/pub/300x250.png" style="border:none;margin:0;padding:0;vertical-align:baseline;" alt="ylliX - Online Advertising Network" /></a></noscript>

3,  <!DOCTYPE html>

<html lang="en">

	<head>
		<meta charset="UTF-8">
		<meta name="viewport" content="width=device-width, initial-scale=1.0">
		<title>HTML Tool Maker</title>
		<script src="https://code.jquery.com/jquery-3.6.4.min.js"></script>
		<style>
			.regenerateIcon {
				cursor: pointer;
				display: inline-block;
				margin-left: 10px;
				font-size: 20px;
				/* Adjust size as needed */
			}

			body {
				font-family: 'Arial', sans-serif;
				background-color: #f2f2f2;
				margin: 0;
				padding: 20px;
				box-sizing: border-box;
			}

			#chatContainer {
				background-color: #fff;
				border-radius: 8px;
				overflow: hidden;
				width: 100%;
				max-width: 800px;
				margin: auto;
				box-shadow: 0 0 10px rgba(0, 0, 0, 0.1);
			}



			#chatHeader {
				width: 100%;
				padding: 10px;
				margin-bottom: 20px;
				border-radius: 8px;
				border: none;
				color: white;
				text-align: center;
				font-size: 16px;

				cursor: pointer;
				background-image: linear-gradient(to right, #6a11cb 0%, #2575fc 100%);
				transition: all 0.3s ease;
				text-decoration: none;
				/* Remove underline from download link */
				display: inline-block;
				/* Needed for anchor to behave like a button */
				text-align: center;
				/* Ensure text is centered in download link */
			}

			#chatBody {
				padding: 20px;
				max-height: 300px;
				overflow-y: auto;
			}

			.messageContainer {
				display: flex;
				justify-content: flex-end;
				margin-bottom: 10px;
			}

			.message {
				background-color: #e2f0cb;
				padding: 10px;
				border-radius: 5px;
				max-width: 70%;
				word-wrap: break-word;
			}

			#prompt {
				width: calc(100% - 40px - 10px);
				margin: 10px 20px;
				padding: 12px;
				border-radius: 5px;
				border: 1px solid #ccc;
			}

			button {
				width: 100%;
				padding: 10px;
				margin-bottom: 20px;
				border-radius: 8px;
				border: none;
				color: white;
				text-align: center;
				font-size: 15px;

				cursor: pointer;
				background-image: linear-gradient(to right, #6a11cb 0%, #2575fc 100%);
				transition: all 0.3s ease;
				text-decoration: none;
				/* Remove underline from download link */
				display: inline-block;
				/* Needed for anchor to behave like a button */
				text-align: center;
				/* Ensure text is centered in download link */
			}

			button:hover {
				transform: translateY(-2px);
				box-shadow: 0 10px 20px rgba(0, 0, 0, 0.2);
			}

			#copyButton {
				background-color: #007bff;
			}

			#progressOverlay {
				display: none;
				position: fixed;
				top: 0;
				left: 0;
				width: 100%;
				height: 100%;
				background: rgba(0, 0, 0, 0.5);
				z-index: 1000;
			}

			#progressOverlay > div {
				position: absolute;
				top: 50%;
				left: 50%;
				transform: translate(-50%, -50%);
				color: white;
				font-size: 20px;
			}

			/* Add styles for formatted text */
			.formatted-text {
				white-space: pre-wrap;
				/* Keeps white space and line breaks */
			}

			.formatted-text a {
				color: #007bff;
				text-decoration: none;
			}

			.formatted-text a:hover {
				text-decoration: underline;
			}

			/* Dropdown Styles */
			#storyCategory,
			#languageSelection {
				width: calc(50% - 25px);
				/* Adjust width to fit side by side with some space */
				padding: 10px;
				margin: 10px;
				border-radius: 5px;
				border: 1px solid #ccc;
				background-color: #fff;
				font-family: 'Arial', sans-serif;
				font-size: 16px;
				box-sizing: border-box;
				/* Ensure padding and border are included in width */
				display: inline-block;
				/* Display side by side */
				cursor: pointer;
			}

			#storyCategory:disabled,
			#languageSelection:disabled {
				background-color: #e9ecef;
				cursor: not-allowed;
			}

			/* Adjust margin for the prompt to align with the new dropdowns */
			#prompt {
				margin: 0 10px 10px 10px;
			}

			/* Style adjustments for button to align with the new layout */
			button {
				width: calc(100% - 20px);
				margin: 10px;
			}

			/* Ensure the container width accommodates new elements */
			#chatContainer {
				padding-bottom: 10px;
				/* Add some padding at the bottom */
			}

			.message.code {
				background-color: #f5f5f5;
				/* Light grey background */
				color: #333;
				/* Darker text for contrast */
				font-family: monospace;
				/* Monospace font for code-like appearance */
				white-space: pre-wrap;
				/* Allows text to wrap and preserves formatting */
				word-wrap: break-word;
				/* Allows long lines to break and wrap to the next line */
				padding: 10px;
				/* Padding inside the preformatted text block */
				border-radius: 5px;
				/* Rounded corners like other messages */
			}
		</style>
	</head>

	<body>

		<div id="chatContainer">
			<div id="chatHeader">HTML Tool Maker</div>


			<textarea id="prompt" placeholder="Type a HTML tool name..." rows="3"></textarea>
			<button id="generate" onclick="generate()">Write HTML Tool Code</button>
			<div id="chatBody"></div>
		</div>

		<div id="progressOverlay">
			<div>Thinking...</div>
		</div>

		<script>
			function generate() {
				var prompt = $("#prompt").val();
				var category = $("#storyCategory").val();
				var language = $("#languageSelection").val(); // Get the value of the selected option

				var userPrompt = `Write a complete responsive code of the  "${prompt}" tool with colorful styling and all its features use any free library if required to making this tool in HTML and CSS with JavaScript`;

				$('#progressOverlay').show(); // Show progress overlay

                                                                        // how to get API key
                                                                        // https://allfreestore.com/wp-content/uploads/2024/03/Get%20OpenAI%20API%20Key.mp4
				var apiKey = 'your_api_key'; // Replace with your actual OpenAI API key
				var apiUrl = 'https://api.openai.com/v1/chat/completions';

				var requestBody = {
					model: 'gpt-3.5-turbo',
					messages: [{
						role: 'user',
						content: userPrompt
					}],
					temperature: 0.7
				};

				$.ajax({
					type: 'POST',
					url: apiUrl,
					headers: {
						'Content-Type': 'application/json',
						'Authorization': 'Bearer ' + apiKey
					},
					data: JSON.stringify(requestBody),
					success: function(response) {
						$('#progressOverlay').hide(); // Hide progress overlay
						addTypewriterEffect(response.choices[0].message.content, 'chatBody');
					},
					error: function(error) {
						$('#progressOverlay').hide(); // Hide progress overlay on error
						console.error('Error generating privacy policy:', error);
					}
				});
			}

			function formatResponseText(text) {
				// Convert URLs into hyperlinks
				text = text.replace(/(https?:\/\/[^\s]+)/g, '<a href="$1" target="_blank">$1</a>');

				// Detect headings and make them bold
				text = text.replace(/^##\s?(.+)/gm, '<strong>$1</strong>');

				// Replace newline characters with <p> tags for paragraphs
				//  text = text.replace(/\n/g, '</p><p>');

				// Wrap the text in <p> tags to ensure it starts and ends as a paragraph
				return '<p>' + text + '</p>';
			}

			function addTypewriterEffect(text, elementId) {
				var container = $('<div class="messageContainer"></div>').appendTo('#' + elementId);
				var message = $('<div class="message code"></div>').appendTo(container);

				var i = 0;
				var speed = 10; // Typing speed in milliseconds

				function typeWriter() {
					if (i < text.length) {
						var charToAdd = text.charAt(i);

						if (text.substring(i).startsWith('<span')) {
							// If we're at the start of a span tag, append the entire tag at once
							var tagEnd = text.indexOf('>', i) + 1;
							charToAdd = text.substring(i, tagEnd);
							i = tagEnd;
						} else if (text.charAt(i) === '<' && text.substring(i).startsWith('</span')) {
							// If we're at the end of a span tag, append the entire closing tag
							var tagEnd = text.indexOf('>', i) + 1;
							charToAdd = text.substring(i, tagEnd);
							i = tagEnd;
						} else {
							// For regular characters, just increment i
							i++;
						}

						message.append(charToAdd);
						setTimeout(typeWriter, speed);
					} else {
						// Once the text is fully displayed, add the regenerate icon
						var regenerateIcon = $('<div class="regenerateIcon">&#x21bb;</div>'); // Use a suitable unicode character for the icon
						regenerateIcon.appendTo(container);
						regenerateIcon.click(function() {
							$('#' + elementId).html(''); // Clear the previous messages
							generate(); // Call the generate function to regenerate content
						});
					}
				}

				typeWriter();
			}


			function formatResponseText(text) {
				text = text.replace(/(https?:\/\/[^\s]+)/g, '<a href="$1" target="_blank">$1</a>');
				text = text.replace(/^##\s?(.+)/gm, '<strong>$1</strong>');
				text = text.replace(/^(\s*(?:-|\*|\d+\.)\s+.+)$/gm, '$1<br>');
				return text;
			}
		</script>
		<style>
			.regenerateIcon,
			.copyIcon {
				cursor: pointer;
				display: inline-block;
				margin-left: 10px;
				font-size: 20px;
				/* Adjust size as needed */
			}

			.userMessage .message {
				background-color: #e2f0cb;
			}

			#progressOverlay {
				display: none;
				/* Initially hidden */
				position: fixed;
				top: 0;
				left: 0;
				width: 100%;
				height: 100%;
				background: rgba(0, 0, 0, 0.5);
				z-index: 1000;
			}

			#progressOverlay > div {
				position: absolute;
				top: 50%;
				left: 50%;
				transform: translate(-50%, -50%);
				color: white;
				font-size: 20px;
			}

			/* Updated styles for code display */
			.message.code {
				background-color: #000;
				/* Black background */
				color: #fff;
				/* Default text color - white */
				font-family: monospace;
				/* Monospace font for code-like appearance */
				white-space: pre-wrap;
				/* Allows text to wrap and preserves formatting */
				word-wrap: break-word;
				/* Allows long lines to break and wrap to the next line */
				padding: 10px;
				/* Padding inside the code block */
				border-radius: 5px;
				/* Rounded corners */
			}

			/* Styles for simulated syntax highlighting */
			.code-keyword {
				color: #569CD6;
			}

			/* Blue for keywords */
			.code-string {
				color: #CE9178;
			}

			/* Orange for strings */
			.code-comment {
				color: #6A9955;
			}

			/* Green for comments */
		</style>
		<div id="progressOverlay">
			<div>Thinking...</div>
		</div>

		</script>
	</body>

</html>

 ***  #बहुत सुंदर विचार और सार्थक तथ्य # ***

◆ *#अपनी मृत्यु और अपनों की मृत्यु डरावनी लगती है। शेष की हत्या को तो आनन्द ही लेता है ये मनुष्य#* ...

🙏थोड़ा समय निकाल कर अंत तक पूरा पढ़ना 🙏

✍️ हत्या के उपरान्त शव के स्वाद का चटखारे लेता मनुष्य ...

थोड़ा कड़वा लिखा है पर मन का लिखा है ...

*मृत्यु से प्रेम नहीं, हत्या वाली मृत्यु तो हमारा स्वाद है*।---

बकरे का, गाय का,भेंस का,ऊँट का,सुअर का,हिरण का,तीतर का, 

मुर्गे का, हलाल का, झटके का, ताजा बकरे का, भुना हुआ,

छोटी मछली, बड़ी मछली, हल्की आंच पर सिका हुआ, चींटी की चटनी, मेंढक का अचार, बन्दर का, बड़े बड़े होटलों मानव के भ्रूण का आदि न जाने कितने बल्कि अनगिनत स्वाद हैं हत्याओं के।

क्योंकि मृत्यु किसी और की, और शव शरीर का स्वाद हमारा....

स्वाद का व्यापार बन गई हत्याओं का व्यापार। 

मुर्गी पालन, मछली पालन, बकरी पालन, पोल्ट्री फार्म्स।

नाम *पालन* और उद्देश्य *हत्या*❗ 

स्लाटर हाउस तक खोल दिये, अनेकों पशु वधशाला तो अहिंसा के धर्मध्वज वाहकों के भी हैं। वो भी सरकारी मान्यता प्राप्त,ऑफिशियल। गली गली में खुले मांसाहार रेस्टॉरेंट, ये शवों का व्यापार नहीं तो और क्या हैं ? मृत्यु से प्यार और उसका कारोबार इसलिए क्योंकि मृत्यु हमारी नही है।

 जो हमारी वाणी में बोल नही सकते, अभिव्यक्त नही कर सकते, अपनी सुरक्षा स्वयं करने में समर्थ नहीं हैं, उनकी असहायता को हमने अपना बल कैसे मान लिया ? कैसे मान लिया कि उनमें भावनाएं नहीं होतीं ? या उनकी चीखें नहीं निकलतीं ?

खानाखाने की मेज़ पर हड्डियां नोचते माता पिता बच्चों को सीख देते है, बेटा कभी किसी का हृदय नही दुखाना ! किसी की आहें मत लेना ! किसी की आंख में तुम्हारी अनैतिक कार्य से आंसू नहीं आना चाहिए ! 

बच्चों में झूठे संस्कार डालते पिताओं को, अपने हाथ मे वो हडडी वा मांस दिखाई नही देता, जो इससे पहले एक शरीर थी, जिसके अंदर इससे पहले एक आत्मा थी, उसकी भी एक मां थी ...??

 जिसे काटा गया होगा ? जो पीड़ा से चीखा होगा ? 

जो तड़पा होगा ? जिसकी आहें निकली होंगी ? 

जिसने मारने वाले को क्या आशीर्वाद दिया होगा ?

 कैसे मान लिया कि जब जब  धरती पर अत्याचार बढ़ेंगे तो

भगवान केवल तुम मानवों की रक्षा के लिए अवतार लेंगे  ..❓

क्या मूक पशु उस परमपिता परमेश्वर की संतान नहीं हैं .❓

क्या उस ईश्वर को उनकी रक्षा की चिंता नहीं है  ..❓

धर्म की आड़ में उस परमपिता के नाम पर अपने स्वाद के लिए कभी ईद पर बकरे, ऊंट , भेड़, सुअर काटते हो, कभी बलि या किसी देवता के सामने बकरे , मुर्गे, कबूतर, बैल आदि की बली चढ़ाते हो।

कहीं तुम अपने स्वाद के लिए मछली का भोग लगाते हो । 

कभी सोचा ...!!!

क्या ईश्वर का कोई स्वाद होता है ? ....क्या है उनका भोजन ?

किसे ठग रहे हो ?भगवान को ? अल्लाह को ?  जीसस को?

या स्वयं को ?

<script type="text/javascript" src="https://udbaa.com/bnr.php?section=General&pub=515167&format=300x250&ga=g"></script>

<noscript><a href="https://yllix.com/publishers/515167" target="_blank"><img src="//ylx-aff.advertica-cdn.com/pub/300x250.png" style="border:none;margin:0;padding:0;vertical-align:baseline;" alt="ylliX - Online Advertising Network" /></a></noscript>


👉और कहते हैं कि हम मंगलवार को मांस , अण्डा नही खाते...!!!आज शनिवार है इसलिए नहीं , अभी क्षमा पर्व है, अभी बुद्ध मन्दिर जाऊंगा, अभी गुरु ग्रन्थ साहिब का पाठ करना है...!!!अभी रोज़े चल रहे हैं ....!!!नवरात्रि में तो सवाल ही नही उठता ....!!!

झूठ पर झूठ.....झूठ पर झूठ,,.झूठ पर झूठ ..

ईश्वर ने बुद्धि केवल तुम्हे दी । जिससे अनेंको योनियों में भटकने के उपरान्त मानव योनि में तुम जन्म मृत्यु के चक्र से निकलने का मार्ग ढूँढ सको। लेकिन तुमने इस मानव योनि को पाते ही स्वयं को भगवान समझ लिया।

तुम्ही कहते हो, की हम जो प्रकति को देंगे, वही प्रकृति हमे लौटायेगी। यह संकेत है ईश्वर का। प्रकृति के साथ रहो।

प्रकृति के होकर रहो। पर्यावरण संरक्षण करो।

केला और उसके लाभ

 केले के गुणकारी लाभ अधिक ही हैं! 🙏 यह एक ऐसा फल है जो हमारे शरीर को कई प्रकार से लाभ पहुंचाता है। आइए, इसके लाभों को विस्तार से जानते ह...