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ॐ (ओम) का विवरण वेदों में विस्तृत रूप से मिलता है। यह एक पवित्र और मंगलमयी ध्वनि है, जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विकास का प्रतीक है। वेदों में ॐ को सर्वोच्च शक्ति और परमात्मा का प्रतीक माना गया है।
यजुर्वेद में ॐ को "प्राणों का सार" और "ब्रह्म का स्वरूप" कहा गया है। सामवेद में ॐ को "संगीत का सार" और "ब्रह्म का नाद" कहा गया है।
अथर्ववेद में ॐ को "सर्वोच्च शक्ति" और "परमात्मा का स्वरूप" कहा गया है। यहाँ ॐ को ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विकास का कारण बताया गया है।
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उपनिषदों में भी ॐ का विवरण मिलता है, जहाँ इसे "अद्वितीय" और "अक्षर" कहा गया है। यहाँ फ़िर से ॐ को परमात्मा का प्रतीक और ब्रह्मांड की उत्पत्ति का कारण बताया गया है।
इस प्रकार, वेदों में ॐ का विवरण एक पवित्र और मंगलमयी ध्वनि के रूप में मिलता है, जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विकास का प्रतीक है और परमात्मा का स्व
रूप है।

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