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🪷🪷🪷🪷🪷🪷*राधा अष्टमी*🪷🪷🪷🪷🪷🪷
(भाद्रपद शुक्ल अष्टमी, विक्रम संवत 2081/11 सितम्बर, 2024)
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी राधा अष्टमी के रूप में मनाई जाती है। माना जाता है कि इसी दिन द्वापर युग में श्री राधा जी का इस धरती में अवतरण हुआ था। अतः यह दिन उनके जन्म या प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात्रि बारह बजे हुआ था और श्रीराधा जी का जन्म शुक्ल पक्ष की अष्टमी को दोपहर बारह बजे हुआ था। इस वर्ष श्री राधा अष्टमी का पर्व आज दिनांक 11 सितम्बर को है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राधाजी, वृषभानु गोप और उनकी पत्नी कीर्ति की पुत्री थीं। पद्मपुराण के एक उल्लेख के अनुसार, राधाजी राजा वृषभानु की पुत्री थीं। यह उल्लेख भी मिलता है कि एक बार एक यज्ञ आयोजन के पूर्व यज्ञ भूमि में राजा वृषभानु को राधाजी मिली थीं। कहते हैं कि राजा ने राधाजी को अपनी पुत्री मानकर उनका पालन पोषण किया।
एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में अवतार लिया तब लक्ष्मी जी राधा के रूप में पृथ्वी में अवतरित हुईं।
🙏तप्त-कांचन गौरांगी श्री राधे वृंदावनेश्वरी।
वृषभानु सुते देवी प्रणमामि हरिप्रिया।।
ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै नम:। ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै विद्महे
गान्धर्विकायै विधीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्।
श्री राधा विजयते नमः, श्री राधाकृष्णाय नम:।।🙏🙏
राधा जी को ये भोग सर्वाधिक प्रिय हैं , अरवी की सब्जी, रबड़ी, पान का बीड़ा और होली खेलना, आप इनमें से कुछ भी बना कर उस पात्र में तुलसीपत्र रख कर ठाकुर जी का भोग लगाकर श्री युगल सरकार की कृपा प्राप्त कर सकते हैं...!!
💖🙏राधेराधेजी🙏💖🎊🎉🦚

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