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गुरुवार, 10 अक्टूबर 2024

#अष्टम नवरात्रि , माता महागौरी महात्म्य


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 ✍️🪷🪷🪷🛕🛕माँ महागौरी की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे! यह दिन माँ दुर्गा के आठवें रूप महागौरी की साधना के लिए समर्पित है, जो शक्ति, साहस और बुद्धि की प्रतीक है। महागौरी की उपासना से ब्रह्मांड की सभी सिद्धियों के द्वार खुलने लगते हैं और सभी आसुरी शक्तियां उनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत होकर दूर भागने लगती हैं ¹।

🪷अष्टम नवरात्रि के पावन महोत्सव पर, माँ दुर्गा की कृपा आप पर और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे। शुभ नवरात्रि! मां दुर्गा की शक्ति आप में हो, दुखों का नाश हो और हर्ष का वास हो। 

🪷नवरात्रि के नौ दिन, माँ दुर्गा के नौ रूपों की साधना का पर्व है। यह शुभ अवसर हमें शक्ति, साहस और बुद्धि प्रदान करता है।

🪷माँ महागौरी की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे। उनकी शक्ति आपको अपने जीवन में आने वाली सभी चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देती है।

🪷माता महागौरी अष्टम नवरात्रि का वर्णन:👇

माता महागौरी दुर्गा माता के आठवें रूप हैं। उनकी साधना नवरात्रि के आठवें दिन की जाती है। महागौरी का अर्थ है "सर्वश्रेष्ठ श्वेतवर्णी" या " सर्वोत्तम श्वेत गौरी"।

🪷श्लोक:👇

🪷वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥

🪷पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्।

वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥

🪷पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।

मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥

🪷प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्।

कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्॥

🪷अर्थ:👇

मैं महागौरी की साधना करता हूँ, जो चंद्रमा के समान श्वेत शीतल और सर्व सुंदर हैं।

उनकी चार भुजाएँ हैं और वे सिंह पर आरूढ़ हैं।

वे सोमचक्र में स्थित हैं और उनकी तीन आँखें हैं।

वे त्रिशूल और डमरू धारण करती हैं और भय से मुक्ति देती हैं।

उनके शरीर पर पटाम्बर और नाना प्रकार के अलंकार हैं।

उनके कान में कुंडल और हाथ में मंजीर हैं।

उनका मुख कमल के समान सुंदर है और उनके कपोल त्रिलोक को मोहित करते हैं।

उनकी लावण्य और सुंदरता अद्वितीय है और उनके शरीर पर चंदन की सुगंध है।

🪷माता महागौरी की साधना से:👇

- सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

- ब्रह्मांड की सम्पूर्ण सिद्धियों के द्वार खुलने लगते हैं।

- अनेकों आसुरी शक्तियां उनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत      होकर दूर भागने लगती हैं।

- विवाहित जीवन में सुख और स्थिरता प्राप्त होती है।

- अविवाहितों को विवाह सुख प्राप्त होता है।

माता महागौरी से संबंधित कुछ श्लोक और ग्रंथ से:

👉*श्लोक:*👇

🪷 वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

      सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥

👉(देवी महात्म्यम्, अध्याय 8)

🪷 पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां 

     अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्।

वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥

👉(देवी महात्म्यम्, अध्याय 8)

🪷 महागौरी श्वेतांबरा सोमचक्रप्रिया।

     त्रिलोक्यं मोहयंती त्वं गौरी नारायणी॥

👉(ऋग्वेद, मंडल 10, सूक्त 125)

🪷*अन्य मुख्य ग्रंथ से:*👇

1. देवी महात्म्यम् (मार्कण्डेय पुराण)

2. शिव पुराण

3. ब्रह्म वैवर्त पुराण

4. गरुड़ पुराण

5. महाभारत

6. रामायण

7. देवी उपनिषद

8. त्रिपुरा उपनिषद

9. श्री देवी उपनिषद

*उपनिषदो से:*

1. देवी उपनिषद (अथर्व वेद)

2. त्रिपुरा उपनिषद (रुग्वेद)

3. श्री देवी उपनिषद (यजुर्वेद)

🪷*पुराणों से:*👇

1. देवी भागवत पुराण

2. शिव पुराण

3. ब्रह्म वैवर्त पुराण

4. गरुड़ पुराण

5. देवी भागवत पुराण: महागौरी को दुर्गा के आठवें रूप के रूप में वर्णित किया गया है।

6. शिव पुराण: महागौरी को शिव की अर्धांगिनी कहा गया है।

7. ब्रह्म वैवर्त पुराण: महागौरी को विश्व की रक्षक कहा गया है।

माता महागौरी से संबंधित कुछ अन्य प्रमाण:

🪷*वेद*👇

1. ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 125): महागौरी को "श्वेतांबरा" और "सोमचक्रप्रिया" कहा गया है।

2. यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता, अध्याय 4): महागौरी की साधना के लिए "महागौरी मन्त्र" दिया गया है।

3. सामवेद (पंचविंश ब्राह्मण, अध्याय 12): महागौरी को "गौरी नारायणी" कहा गया है।

🪷*उपनिषद*👇

1. देवी उपनिषद (अथर्ववेद): महागौरी को ब्रह्म की शक्ति कहा गया है।

2. त्रिपुरा उपनिषद (ऋग्वेद): महागौरी को ब्रम्हांड की स्वामिनी कहा गया है।

3. श्री देवी उपनिषद (यजुर्वेद): महागौरी को सृष्टि की रक्षक कहा गया है।

🪷*इतिहास से*👇

1. महाभारत: महागौरी को अर्जुन की रक्षक कहा गया है।

2. रामायण: महागौरी को सीता की रक्षक कहा गया है।

3. गरुड़ पुराण: महागौरी को मोक्ष की दाता कहा गया है।

🪷*मंत्र*👇

1. "ॐ महागौर्यै नमः"

2. "महागौरी देव्यै नमो नमः"

3. "ॐ श्वेतांबरायै नमः"

इन प्रमाणों से यह स्पष्ट होता है कि माता महागौरी वेदों, पुराणों, उपनिषदों और अन्य सनातन हिंदू ग्रंथों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

इन ग्रंथों में माता महागौरी की महिमा और उनकी साधना के विधान का वर्णन है।

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