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सोमवार, 7 अक्टूबर 2024

# पंचम नवरात्रि महोत्सव दिवस,स्कंदमाता


 *पंचम नवरात्रि महोत्सव दिवस,स्कंदमाता की भक्ति का पर्व है, स्कंदमाता की आराधना का ये पर्व है, उलझी समस्याओं को काम बनाने का पर्व है,भक्ति का दीपक हृदय में प्रदिप्त करने का पर्व है।*

*दो भुजाओं में कमल का फूल रखती एक हाथ से सनतकुमार और एक हाथ अभय मुद्रा में मेरी स्कंदमाता को बारम्बार प्रणाम है!!*

          🌺🌹🌻🌼🌻🌹🌺

*या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया,

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमातायशस्विनी।। 

स्कंदमाता आपको सदैव प्रसन्न रखें नवरात्रि के पांचवें दिन की शुभकामनाएं..*

स्कंदमाता देवी दुर्गा के नौ रूपों में से पांचवें रूप के रूप में पूजी जाती हैं, जो शक्ति और संरक्षण की प्रतीक हैं।


स्कंदमाता की आराधना करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और संकटों से मुक्ति मिलती है। वह अपने भक्तों को शक्ति और साहस प्रदान करती हैं और उनके जीवन को समृद्ध बनाती है। दिए  गए मंत्र का अर्थ है:


"हे देवी सर्वभूतों में स्कंदमाता के रूप में विराजमान हो,

तुम्हें नमस्कार है, नमस्कार है, नमस्कार है।"सिंहासन पर बैठी, 

🪷पद्माञ्चित करद्वया,शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमातायशस्विनी।"


इसका अर्थ है:


"सिंहासन पर बैठी, अपने दोनों हाथों में कमल का फूल धारण करने वाली,सदा शुभ और यशस्वी देवी स्कंदमाता की हमें सदा रक्षा करें।"


नवरात्रि के पांचवें दिन की शुभकामनाएं! स्कंदमाता आपको सदैव प्रसन्न रखें और आपके जीवन को समृद्ध बनाएं।

स्कंदमाता देवी दुर्गा के नौ रूपों में से पांचवें रूप के रूप में पूजी जाती हैं। उनका नाम "स्कंदमाता" है, जिसका अर्थ है "कार्तिकेय की माता"। वह शक्ति और संरक्षण की प्रतीक हैं।


स्कंदमाता का महात्म्य:


1. शक्ति और संरक्षण: स्कंदमाता शक्ति और संरक्षण की प्रतीक हैं, जैसा कि देवी भागवत पुराण में वर्णित है - "स्कंदमाता शक्तिरूपा"।


2. कार्तिकेय की माता: स्कंदमाता कार्तिकेय की माता हैं, जो युद्ध में विजय प्राप्त करने वाले देवता हैं, जैसा कि शिव पुराण में वर्णित है - "स्कंदमाता कार्तिकेयजननी"।


3. सुख और समृद्धि: स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को सुख और समृद्धि प्राप्त होती है, जैसा कि देवी महात्म्यम् में वर्णित है - "स्कंदमाता पूजा सुखप्रदा"।


4. शक्ति और संरक्षण: स्कंदमाता शक्ति और संरक्षण की प्रतीक हैं, जैसा कि देवी भागवत पुराण में वर्णित है - "स्कंदमाता शक्तिरूपा"। (देवी भागवत पुराण, अध्याय 5, श्लोक 11)


5. कार्तिकेय की माता: स्कंदमाता कार्तिकेय की माता हैं, जो युद्ध में विजय प्राप्त करने वाले देवता हैं, जैसा कि शिव पुराण में वर्णित है - "स्कंदमाता कार्तिकेयजननी"। (शिव पुराण, अध्याय 23, श्लोक 10-11)


6. सुख और समृद्धि: स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को सुख और समृद्धि प्राप्त होती है, जैसा कि देवी महात्म्यम् में वर्णित है - "स्कंदमाता पूजा सुखप्रदा"। (देवी महात्म्यम्, अध्याय 5, श्लोक 13)


7. ब्रह्मांड की रक्षा: स्कंदमाता ब्रह्मांड की रक्षा करती हैं, जैसा कि कालिका पुराण में वर्णित है - "स्कंदमाता ब्रह्मांड रक्षिणी"। (कालिका पुराण, अध्याय 23, श्लोक 21)


8. आध्यात्मिक ज्ञान: स्कंदमाता आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करती हैं, जैसा कि महानिर्वाण तन्त्र में वर्णित है - "स्कंदमाता ज्ञानप्रदा"। (महानिर्वाण तन्त्र, अध्याय 13, श्लोक 15)


प्रमाण:


1. देवी भागवत पुराण, अध्याय 5, श्लोक 11

2. शिव पुराण, अध्याय 23, श्लोक 10-11

3. देवी महात्म्यम्, अध्याय 5, श्लोक 13

4. कालिका पुराण, अध्याय 23, श्लोक 21

5. ब्रह्म वैवर्त पुराण, अध्याय 44, श्लोक 12-13

6. महानिर्वाण तन्त्र, अध्याय 13, श्लोक 15

7. स्कंद पुराण, अध्याय 1, श्लोक 20-21

8. गरुड़ पुराण, अध्याय 23, श्लोक 10-11


मंत्र:


"ॐ स्कंदमातायै नमः"

"या देवी सर्वभूतेषु स्कंदमाता रूपेण संस्थिता"


आरती:


"जय माता स्कंदमाता जय माता स्कंदमाता

सुख-समृद्धि दायिनी माता स्कंदमाता"


स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को शक्ति, संरक्षण, सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है।


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