*शाखा जाना , धर्म जागरण , राष्ट्र जागरण, क्यों है?
*सन 1925 विजयादशमी के दिन मैंने अपनी यात्रा प्रारंभ की और इस वर्ष विजयादशमी के दिन मैं अपनी यात्रा करते हुए शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा हूं...*
*मेरा यह मानना है कि भारतमाता का हर सपूत मेरी प्राण वायु का एक भाग है...*
*मेरा यह भी मानना है की संपूर्ण समाज की सेवा संकल्प के माध्यम से जुड़े हुए बंधुओं भगिनियों की आंतरिक शक्तियों में मैं विद्यमान हूं।*
*मैं कोई आपसे भिन्न नहीं हूं, मैं आप सब में ही तो हूं...*
*कोटि-कोटि जन से मिलकर मेरा निर्माण हुआ है, सज्जन शक्ति को बढ़ाने तथा दुर्जन शक्ति से सावधान करने ही तो मैं आप सब में विद्यमान हूं…*
*मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हूं।*
*I started my journey on Vijayadashmi in 1925 and this year on Vijayadashmi I am entering the centenary year of my journey…*
*I believe that every son of Bharat Mata is a part of my life breath…*
*I also believe that I am present in the inner powers of brothers and sisters who are connected with the entire society through the resolve to serve.*
*I am not different from you, I am present in all of you…*
*I am created by joining millions of people, I am present in all of you only to increase the power of good people and to alert against the power of bad people…*
*I am Rashtriya Swayamsevak Sangh.*
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा 25 सितंबर 1925 से आज तक एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली रही है। डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने विजय दशमी के दिन मोहिते के बाड़े नामक स्थान पर इसकी स्थापना की थी । संघ की विचारधारा में राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, हिंदू राष्ट्र, राम जन्मभूमि, अखंड भारत, और समान नागरिक संहिता जैसे विषय सम्मिलित हैं ।
*संघ की उपलब्धियां*
संघ ने कई मोर्चों पर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनमें राष्ट्रीय आपदा के समय राहत कार्य, सभी युद्धों में राष्ट्र की हरसंभव सहायता,गुजरात में भूकंप और सुनामी के समय सहायता, और दीन दयाल शोध संस्थान के माध्यम से गांवों को स्वावलंबी बनाने की योजना सम्मिलित हैं ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की यात्रा 25 सितंबर 1925 से आज तक एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली रही है। यहाँ कुछ अतिरिक्त बिन्दु लिखें जा रहे है:
संघ के उद्देश्य:
1. हिंदू समाज को संगठित करना।
2. राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की भावना को बढ़ावा देना।
3. समाज में समरसता और एकता को बढ़ावा देना।
4. राष्ट्र की सेवा और समर्थन करना।
संघ के कुछ प्रमुख कार्यक्रम:
1. शाखाएँ: संघ की मूल इकाइयाँ, जहाँ स्वयंसेवक शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।
2. सेवा कार्य: संघ आपदा राहत, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा और अन्य सामाजिक कार्यों में सम्मिलित होता है।
3. सांस्कृतिक कार्यक्रम: संघ हिंदू त्योहारों और सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देता है।
4. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर चर्चा और अभियान।
संघ के प्रमुख सर संघचालक:
1. डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार (संस्थापक, आदि सरसंघचालक)
2. माधव सदाशिवराव गोलवलकर (दूसरे सरसंघचालक)
3. मधुकर दत्तात्रय देवरस (तीसरे सरसंघचालक)
4. प्रो. राजेंद्र सिंह (चौथे सरसंघचालक)
5. कुपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन (पांचवें सरसंघचालक)
6. डॉ. मोहनराव मधुकरराव भागवत (वर्तमान सरसंघचालक)
संघ के अनुसांगिक संगठन:
1. विश्व हिंदू परिषद
2. भारतीय जनता पार्टी
3. बजरंग दल
4. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
5. राष्ट्रीय सिख संगत
6. भारतीय मजदूर संघ
7. हिंदू स्वयंसेवक संघ
8. सेवा भारती
9. स्वदेशी जागरण मंच
10. आरोग्य भारती
11. क्रीड़ा भारती आदि आदि।
यह तथ्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा और गतिविधियों को समझने में सहायता करेगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का राष्ट्र के प्रति समर्पण एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली रहा है। संघ की स्थापना 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी, जिनका उद्देश्य ही सनातन समाज को संगठित करना और राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देना था ।
संघ के राष्ट्र के प्रति समर्पण के कुछ महत्वपूर्ण आयाम हैं:
- *राष्ट्रीय एकता*: संघ ने सदैव राष्ट्रीय एकता और समरसता को बढ़ावा दिया है, जिससे देश के नागरिकों की एकजुटता और सहयोग को बढ़ावा मिले ।
- *राष्ट्रवाद*: संघ ने राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा दिया है, जिससे देश के नागरिकों को अपने देश के प्रति समर्पित और दायित्वपूर्ण बनाया जा सके ।
- *सामाजिक सेवा*: संघ ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जैसे कि आपदा बचाव और सेवा, स्वास्थ्य सेवाएँ, और शिक्षा ।
- *राष्ट्रीय सुरक्षा*: संघ ने राष्ट्रीय सुरक्षा के विषयों पर भी अपनी बात उठाई है, जिससे देश की सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा मिले ।
इन सभी पहलुओं से यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का राष्ट्र के प्रति समर्पण एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली रहा है।
*संघ के अनुसांगिक संगठन*
संघ के विभिन्न अनुसांगिक संगठनों में राष्ट्रीय सेविका समिति, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता पार्टी, बजरंग दल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, राष्ट्रीय सिख संगत, भारतीय मजदूर संघ, हिंदू स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, स्वदेशी जागरण मंच, दुर्गा वाहिनी, सेवा भारती, आरोग्य भारती, विद्याभारती, क्रीड़ा भारती और भारतीय किसान संघ आदि जैसे और भी संगठन सम्मिलित हैं ।
विभिन्न सरकारों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच संबंधों का इतिहास अधिक प्राचीन और जटिल है। संघ की स्थापना 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य सनातन हिंदू समाज को संगठित करना और राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देना था ।
संघ ने समय-समय पर विभिन्न सरकारों के साथ सहयोग और विरोध दोनों किया है। 1975 में आपातकाल की घोषणा के समय, संघ पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन बाद में जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हुआ और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में मिलीजुली सरकार बनी ।
इसके अतिरिक्त, संघ के साथ जुड़े कई अनेकों संगठन हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
*राष्ट्रीय सेविका समिति*: बहनों के लिए सामाजिक और राष्ट्रवादी संगठन। जिससे वे सशक्त होकर समाज में फैली कुरीतियों और अभद्र विचारों से समाज को सुधारने की नींव बन जाएं।
*विश्व हिंदू परिषद*: सम्पूर्ण विश्व में सनातन हिंदू समुदाय के हितों की रक्षा के लिए संगठन।
*भारतीय जनता पार्टी*: राजनीतिक दल जिसे प्रायः संघ की राजनीतिक विचारधारा रूपी शाखा के रूप में देखा जाता है। लेकिन संघ से यह सीधे सीधे नियंत्रित नहीं होता है। इसका अपना स्वतंत्र संगठन है।
*भारतीय मजदूर संघ*: श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए संगठन।
इन संगठनों के माध्यम से, संघ विभिन्न क्षेत्रों में काम करता है, जैसे कि सामाजिक सेवा, शिक्षा, और राष्ट्रीय सुरक्षा ¹।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा का महत्व इस प्रकार है:
१. *सामाजिक एकता*: शाखा में लोगों को एक साथ लाने का अवसर मिलता है, जिससे सामाजिक एकता और समरसता बढ़ती है साथ साथ लोकसंपर्क, लोककल्याण की पूर्ति होती है।।
२. *राष्ट्रवाद की भावना*: शाखा में राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे लोगों में देश के प्रति समर्पण और दायित्व की भावना विकसित होती है।
३. *शारीरिक और मानसिक विकास*: शाखा में शारीरिक और मानसिक विकास के लिए विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जैसे कि योग, खेल, बौद्धिक क्षमता का विकास, शारीरिक क्षमता, कठिनाइयों से सामना करने की क्षमता और ध्यान।
४. *सामाजिक सेवा*: शाखा में सामाजिक सेवा के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे कि रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर, और आपदा राहत कार्य आदि जैसे राष्ट्रीय कार्य।
५. *नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रसार*: शाखा में नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रसार किया जाता है, जिससे लोगों में अच्छे मूल्यों की समझ विकसित होती है।
६. *राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता*: शाखा में राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाती है, जिससे लोगों में देश की सुरक्षा के प्रति कर्तव्यनिष्ठा की भावना विकसित होती है।
७. *संगठन और अनुशासन*: शाखा में संगठन और अनुशासन की महत्ता को समझाया जाता है, जिससे लोगों में अनुशासन और संगठन की भावना विकसित होती है।
८. *सामुदायिक सहयोग*: शाखा में सामुदायिक सहयोग को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे लोगों में आपसी सहयोग और सहानुभूति की भावना विकसित होती है।
इन सभी पहलुओं से यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा का महत्व बहुत अधिक है और यह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायता करती है।


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