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मंगलवार, 1 अक्टूबर 2024

2 अक्टूबर/जन्मदिन,,लाल बहादुर शास्त्री



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 2 अक्टूबर/जन्मदिन,,लाल बहादुर शास्त्री 

लालबहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 में मुगलसराय (उत्तर प्रदेश) में एक कायस्थ परिवार में मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव के यहाँ हुआ था। उनके पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे अत: सब उन्हें मुंशीजी ही कहते थे। 

बाद में उन्होंने राजस्व विभाग में लिपिक (क्लर्क) की नौकरी कर ली थी । लालबहादुर की माँ का नाम रामदुलारी था। परिवार में सबसे छोटा होने के कारण बालक लालबहादुर को परिवार वाले प्यार में नन्हें कहकर ही बुलाया करते थे। 

जब नन्हें अठारह महीने का हुआ दुर्भाग्य से पिता का निधन हो गया। उनकी माँ रामदुलारी अपने पिता हजारीलाल के घर मिर्ज़ापुर चली गयीं। 

कुछ समय बाद उसके नाना भी नहीं रहे। बिना पिता के बालक नन्हें की परवरिश करने में उसके मौसा रघुनाथ प्रसाद ने उसकी माँ का बहुत सहयोग किया। ननिहाल में रहते हुए उसने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की। उसके बाद की शिक्षा हरिश्चन्द्र हाई स्कूल और काशी विद्यापीठ में हुई। 



काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि मिलने के बाद उन्होंने जन्म से चला आ रहा जातिसूचक शब्द श्रीवास्तव सदा सदा के लिये हटा दिया और अपने नाम के आगे 'शास्त्री' लगा लिया। इसके पश्चात् शास्त्री शब्द लालबहादुर के नाम का पर्याय ही बन गया।

1928 में उनका विवाह मिर्जापुर निवासी गणेशप्रसाद की पुत्री ललिता से हुआ। ललिता शास्त्री से उनके छ: सन्तानें हुईं, दो पुत्रियाँ-कुसुम व सुमन और चार पुत्र-हरिकृष्ण, अनिल, सुनील व अशोक।

उनके चार पुत्रों में से दो-अनिल शास्त्री और सुनील शास्त्री अभी हैं, शेष दो दिवंगत हो चुके हैं। अनिल शास्त्री कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता हैं जबकि सुनील शास्त्री भारतीय जनता पार्टी में चले गये।

जवाहरलाल नेहरू का उनके प्रधानमन्त्री के कार्यकाल के मध्य 27 मई, 1964 को देहावसान हो जाने के उपरान्त अपनी स्वच्छ छवि के कारण शास्त्रीजी को 1964 में देश का प्रधानमन्त्री बनाया गया। उन्होंने 9 जून 1964 को भारत के प्रधान मन्त्री का पद भार ग्रहण किया।

लाल बहादुर शास्त्री जी भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक देश की बागडोर संभाली थी। उनका जन्म 1904 में मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में हुआ था ¹। वह एक महान नेता थे जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के बाद उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रूप में कार्य किया था।

शास्त्री जी ने काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि प्राप्त की थी और गोविंद बल्लभ पंत के मंत्रिमंडल में पुलिस और परिवहन मंत्रालय संभाला था। उन्होंने 1951 में अखिल भारत कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में कार्य किया था और 1952, 1957, और 1962 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी को भारी बहुमत से जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ¹।।

उनके शासनकाल में 1965 का भारत पाक युद्ध प्रारम्भ हो गया। इससे तीन वर्ष पूर्व चीन का युद्ध भारत हार चुका था। शास्त्रीजी ने अप्रत्याशित रूप से हुए इस युद्ध में नेहरू की तुलना में राष्ट्र को उत्तम नेतृत्व प्रदान किया और पाकिस्तान को अच्छी प्रकार से पराजय दी। इसकी कल्पना पाकिस्तान ने कभी सपने में भी नहीं की थी। इसी कालखण्ड में भारत देश में अन्न की कमी का अनुभव किया गया था और अमेरिका ने भारत को गेंहू देने से मना कर दिया था। फलस्वरूप शास्त्री जी के आह्वान पर सम्पूर्ण भारत देश ने सोमवार का व्रत रखकर अपने देश में अन्न की कमी का समाधान कर लिया। आपके द्वारा ही कहा गया था कि,"जय जवान जय किसान"।

ताशकन्द में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अयूब ख़ान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद 11 जनवरी 1966 की रात में ही रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी।उनकी सादगी, देशभक्ति और निष्ठा के लिये मरणोपरान्त उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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