#जल में अमृत है, के प्रयोग, जल चिकित्सा से #
ऋग्वेद, अथर्वेद तथा प्राकृतिक आयुर्विज्ञान और आयुर्वेद में जल के महत्व और औषधीय गुणों के बारे में कई सूत्र मिलते हैं। यहाँ कुछ उदाहरण हैं:
1. "आपो हि शुद्धाः सर्वरोगनाशिनः।"
- ऋग्वेद, १०/३७/३
अर्थ: जल शुद्ध होता है और यह सभी रोगों को नष्ट करने वाला होता है.
1. "जलं शिवम् जलं शिवम्।"
- ऋग्वेद, १०/९/६
अर्थ: जल शिव (शुभ) होता है, जल शिव होता है.
1. "आपो नष्टं सर्वम्।"
- ऋग्वेद, १०/३७/४
अर्थ: जल से सभी रोग नष्ट होते हैं.
1. "जलम् शुद्धम् शीतलम्।"
- ऋग्वेद, १०/९/७
अर्थ: जल शुद्ध और शीतल होता है.
1. "आपो वै शुद्धाः।"
- ऋग्वेद, १०/३७/१
अर्थ: जल वास्तव में शुद्ध होता है.
इन सूत्रों से यह स्पष्ट होता है कि ऋग्वेद में जल को शुद्ध, शीतल, और रोगनाशक माना गया है, और इसके महत्व को बहुत अधिक माना गया है।
चरक संहिता में जल के गुणों के बारे में कहा गया है:
"जलं शुद्धं शीतलं स्निग्धं सर्वरोगप्रशामकम्।"
-चरक संहिता, सूत्रस्थान ३/३
अर्थ: जल शुद्ध, शीतल और स्निग्ध होता है, और यह सभी रोगों को दूर करने वाला होता है।
अथर्ववेद में जल के औषधीय गुणों के बारे में कहा गया है:
"आपो हि शुद्धाः सर्वरोगनाशिनः।"
- अथर्ववेद, १/२३/४
अर्थ: जल शुद्ध होता है और यह सभी रोगों को नष्ट करने वाला होता है।
प्राकृतिक आयुर्विज्ञान के अनुसार, जल के गुण इस प्रकार हैं:
- शीतल: जल शीतल होता है, जो शरीर को ठंडक प्रदान करता है।
- शुद्ध: जल शुद्ध होता है, जो शरीर को पवित्र करता है।
- स्निग्ध: जल स्निग्ध होता है, जो शरीर को स्निग्धता प्रदान करता है।
- रोगनाशक: जल सभी रोगों को नष्ट करने वाला होता है।
इन सूत्रों से यह स्पष्ट होता है कि भारत में अति प्राचीन काल से जल चिकित्सा के एवम् आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथों में सूत्रों की श्रृंखलाएं मिलती हैं।वेदों में जल के औषधीय गुणों को बहुत महत्व दिया गया है।
डॉ जॉन हार्वे केलॉग, जो जल चिकित्सा को पुनः वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए अनेंकों अनुसंधान किए थे उनका परिचय जानें।(1852-1943) एक अमेरिकी डॉक्टर, शोधकर्ता, और लेखक थे। वह स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में एक प्रमुख व्यक्तित्व थे और उनके कार्यों ने स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डॉ केलॉग का जन्म मिशिगन में हुआ था और उन्होंने अपनी मेडिकल डिग्री न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से प्राप्त की। उन्होंने अपने करियर का प्रारम्भ एक सर्जन के रूप में किया, लेकिन शीघ्र ही उन्होंने स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय किया।
डॉ केलॉग के कुछ प्रमुख योगदान हैं:
1. पश्चिमी देशों में प्रातः के अल्पाहार का आविष्कार:
डॉ केलॉग ने कॉर्न फ्लेक्स और अन्य ब्रेकफास्ट सीरियल्स का आविष्कार किया, जो स्वस्थ और सरल अल्पाहार के विकल्प बन गए।
2. स्वास्थ्य और पोषण पर शोध: डॉ केलॉग ने स्वास्थ्य और पोषण पर कई शोध किए और अपने निष्कर्षों को पुस्तकों और लेखों में प्रकाशित किया।
3. बैटल क्रीक सैनिटेरियम की स्थापना:
डॉ केलॉग ने मिशिगन में बैटल क्रीक सैनिटेरियम की स्थापना की, जो एक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र था जो रोगियों को स्वस्थ जीवनशैली और पोषण पर ध्यान केंद्रित करने में सहायता करता था।
4. स्वास्थ्य शिक्षा का प्रसार:
डॉ केलॉग ने स्वास्थ्य शिक्षा के महत्व पर विशेष बल दिया और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
डॉ केलॉग की कुछ प्रमुख पुस्तकें हैं:
1. "प्लेन फैक्ट्स फॉर प्लेन पीपल्स"
2. "द बैटल क्रीक सैनिटेरियम हैंडबुक"
3. "द साइंस ऑफ न्यूट्रिशन"
4. रेशनल हाइड्रोथेरेपी, जो प्राकृतिक चिकित्सा के विद्यार्थियों के लिए अति आवश्यक है।
डॉ केलॉग का नाम आज भी स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित और सम्मानित नाम है।
"रेशनल हाइड्रोथेरेपी" डॉ जॉन हार्वे केलॉग द्वारा लिखित एक पुस्तक है, जो जल चिकित्सा के क्षेत्र में एक प्रमुख पुस्तक मानी जाती है। यह पुस्तक 1901 में प्रकाशित हुई थी और इसमें जल चिकित्सा के सिद्धांतों, तकनीकों और अनुप्रयोगों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
पुस्तक के मुख्य विषय:
1. जल चिकित्सा का इतिहास और सिद्धांत।
2. जल के भौतिक और रासायनिक गुण।
3. जल चिकित्सा के प्रकार (गर्म, ठंडा, और क्रमशः गर्म ठंडा का प्रयोग)।
4. जल चिकित्सा के अनुप्रयोग (शूल या पीड़ा प्रबंधन, मांसपेशी शिथलीकरण, और प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त करने में)।
5. जल चिकित्सा के दुष्प्रभाव और सावधानियाँ।
6. जल चिकित्सा के उपकरण और तकनीकें।
7. जल चिकित्सा से सम्बन्धित विषयों का अध्ययन।
पुस्तक की विशेषताएँ:
1. विस्तृत और व्यवस्थित वैज्ञानिक ज्ञान।
2. जल चिकित्सा के सिद्धांतों और तकनीकों का स्पष्ट वर्णन।
3. अनुभवजन्य अध्ययन और तदसंबंधी विषयों का अध्ययन।
4. जल चिकित्सा के अनुप्रयोगों का व्यापक क्षेत्र।
5. पुस्तक की भाषा सरल और समझने योग्य है।
पुस्तक का महत्व:
1. जल चिकित्सा के क्षेत्र में एक विशिष्ट पुस्तक मानी जाती है।
2. जल चिकित्सा के सिद्धांतों और तकनीकों को समझने में सहायता करती है।
3. जल चिकित्सा के अनुप्रयोगों को व्यापक बनाने में सहायता करती है।
4. जल चिकित्सा के क्षेत्र में शोध और अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है।
"रेशनल हाइड्रोथेरेपी" पुस्तक का जल चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है और आज भी जल चिकित्सा के छात्रों, शोधकर्ताओं और प्राकृतिक चिकित्सा के चिकित्सकों के लिए एक उपयोगी संसाधन है।
यहाँ विभिन्न तापमान के स्तर की सूची दी गई है, गर्म और ठंडा दोनों का स्तर:
*गर्म तापमान स्तर:*
1. हाइपरथेर्मिया या अत्यधिक गर्म (106°F - 110°F): अत्यधिक गर्म तापमान।
2. उष्ण तापमान (104°F - 106°F): अधिक गर्म तापमान
3. गर्म तापमान (98°F - 104°F): गर्म तापमान।
4. मध्यम गर्म तापमान (90°F - 98°F): लघु या सुषुम गर्म जल तापमान।
5. सामान्य तापमान (98.6°F): शरीर के सामान्य तापमानके बराबर।
*ठंडा तापमान स्तर:*
1. हाइपोथर्मिया या अत्यधिक ठंडा (32°F - 50°F): अत्यधिक ठंडा तापमान।
2. शीत तापमान (50°F - 55°F): बहुत ठंडा तापमान।
3. ठंडा तापमान (55°F - 65°F): ठंडा तापमान।
4. अल्प ठंडा तापमान (65°F - 70°F): हल्का ठंडा तापमान।
5. सामान्य तापमान (98.6°F): शरीर का सामान्य तापमान।
*जल के विशेष तापमान स्तर:*
1. क्रायोथेरेपी अति शीतल (50°F - 55°F): अति ठंडा तापमान चिकित्सा।
2. हिम या बर्फ चिकित्सा (32°F - 50°F): बर्फ की थेरेपी।
3. सॉना तापमान (150°F - 200°F): सॉना बाथ के लिए तापमान।
4. स्टीम तापमान (100°F - 120°F): भाप स्नान के लिए तापमान।
यह ध्यान रखें कि तापमान के स्तर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताओं पर निर्भर करते हैं। तापमान उपचार प्रारम्भ करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।
जल उपचार में विभिन्न तापमान डिग्री फॉरेनहाइट में प्रयुक्त होते हैं, जिनका चिकित्सकीय प्रभाव निम्नलिखित है:
*गर्म जल उपचार (98°F - 104°F)*
1. मांसपेशी शिथलीकरण या विश्रांति या रिलैक्सेशन करता है।
2. शूल प्रबंधन में।
3. रक्त संचार में वृद्धि करता है।
4. तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।
5. प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त करता है।
*उष्ण जल उपचार (104°F - 110°F)*
1. गहराई में स्थित मांसपेशी को विश्रांति या रिलैक्सेशन।
2. शूल प्रबंधन में वृद्धि।
3. रक्त संचार में वृद्धि।
4. तंत्रिका तंत्र को शांत करना।
5. प्रतिरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करना।
*क्रायोथेरेपी या अत्यधिक शीतल उपचार (50°F - 55°F)* तापमान पर।
1. शूल प्रबंधन में।
2. शोथ कम करता है।
3. मांसपेशी तनाव कम करता है।
4. तंत्रिका तंत्र को सक्रिय या उत्तेजित करता है।
5. प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त करता है।
*ठंडा जल उपचार (55°F - 65°F)* तापमान पर।
1. मांसपेशी तनाव कम करना।
2. शूल प्रबंधन।
3. रक्त संचार में कमी में।
4. तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित वा सक्रिय करना।
5. प्रतिरक्षा प्रणाली को बलवान करना।
*हिम या बर्फ से उपचार आइस थेरेपी (32°F - 50°F)*
1. शूल प्रबंधन में।
2. शोथ कम करने में।
3. मांसपेशी तनाव को कम करने में।
4. तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करने में।
5. प्रतिरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने में।
यह ध्यान रखें कि जल उपचार के तापमान और चिकित्सकीय प्रभाव व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताओं पर निर्भर करते हैं। जल उपचार प्रारम्भ करने से पूर्व चिकित्सक का परामर्श लेना आवश्यक है।
गर्म जल चिकित्सा एक प्राचीन और प्रभावी उपचार पद्धति है, जिसमें गर्म जल का उपयोग शरीर के विभिन्न रोगों और समस्याओं के उपचार के लिए किया जाता है। यहाँ गर्म जल चिकित्सा के भौतिक प्रभाव या फिजियोलॉजिकल प्रभाव और उपचार के नाम दिए गए हैं जो निम्न प्रकार से हैं:
*भौतिक प्रभाव:*
1. मांसपेशियों को विश्राम देना।
2. रक्त संचार बढ़ाना।
3. श्वसन प्रणाली को सुधारना।
4. तंत्रिका तंत्र को शांत करना।
5. शूल और तनाव कम करना।
6. प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त करना।
7. शरीर के विषाक्त पदार्थों को निकालना।
*उपचारो के नाम:*
1. विभिन्न प्रकार की जल चिकित्साएं (हाइड्रोथेरेपी)।
2. गर्म स्नान चिकित्सा।
3. स्पा थेरेपी।
4. जल धारा स्नान।
5. रिफ्लेक्सोलॉजी।
6. मांसपेशी विश्रांति उपचार या रिलैक्सेशन थेरेपी।
7. ऑस्टियोआर्थराइटिस के उपचार।
8. फाइब्रोमाइल्जिया का उपचार।
9. तनाव और चिंता उपचार।
10. नींद की समस्या उपचार।
*गर्म जल चिकित्सा के प्रकार:*
1. गर्म जल के विभिन्न स्नान।
2. स्टीम बाथ।
3. सॉना बाथ।
4. हाइड्रोथेरेपी पूल बाथ।
5. गर्म जल डुबकी स्नान।
6. विभिन्न प्रकार के गर्म जल स्प्रे।
7. विभिन्न प्रकार के गर्म जल पैक।
*सावधानियाँ:*
1. गर्म जल चिकित्सा के समय तापमान का ध्यान रखें।
2. गर्म जल चिकित्सा के समय शारीरिक गतिविधि न करें, शान्ति से उपचार लें।
3. गर्म जल चिकित्सा के बाद ठंडे पानी से स्नान खुले वातावरण में न करें, इसे केवल बन्द चिकित्सा कक्ष में ही करें।
4. गर्म जल चिकित्सा के समय सभी आवश्यक परीक्षण करें और चिकित्सक का परामर्श लें।
यह ठीक है कि ! गर्म जल चिकित्सा स्नान के उपरान्त ठंडे पानी से स्नान या सेंक करना वास्तव में अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। यह कई कारणों से लाभकारी है:
1. तापमान का संतुलन:
गर्म जल चिकित्सा के उपरान्त ठंडे पानी से स्नान करने से शरीर का तापमान संतुलित होता है।
2. रक्त संचार में सुधार:
ठंडे पानी से स्नान करने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त संचार में सुधार होता है।
3. मांसपेशियों स्फूर्तिवान होती हैं: ठंडे पानी से स्नान करने से मांसपेशियों को स्फूर्ति मिलती है और थकान दूर होती है।
4. तंत्रिका तंत्र को शांति या उत्तेजना को शांति:
ठंडे पानी से स्नान करने से तंत्रिका तंत्र को शांति मिलती है और तनाव कम होता है जिसे कहते हैं कि रिड्यूस्ड नर्व इरिटेशन।
5. प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त: ठंडे पानी से स्नान करने से प्रतिरक्षा प्रणाली सशक्त होती है और रोग प्रतिरोधक शक्ति में वृद्धि होती है।
"गर्म उपचार के समय के दसवें भाग के बराबर ठंडा उपचार " का सिद्धांत भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ है कि गर्म जल चिकित्सा के समय का दसवां भाग ठंडे पानी से स्नान में देना चाहिए। यह शरीर को धीरे-धीरे तापमान में परिवर्तन के लिए तैयार करता है और इससे शरीर को अधिक लाभ मिलता है।
ठंडे पानी का फिजियोलॉजिकल प्रभाव और उपचार के नाम निम्नलिखित हैं:
*फिजियोलॉजिकल प्रभाव:*
1. रक्त वाहिकाओं का संकुचन।
2. हृदय गति में वृद्धि।
3. श्वसन गति में वृद्धि।
4. मांसपेशियों में तनाव।
5. तंत्रिका तंत्र का उत्तेजन।
6. प्रतिरक्षा प्रणाली का सुदृढ़ होना।
7. शरीर के विषाक्त पदार्थों का निष्कासन में वृध्दि।
*उपचार के नाम:*
1. विभिन्न प्रकार के ठंडे जलोपचार या कोल्ड वाटर हाइड्रोथेरेपी।
2. क्रायोथेरेपी।
3. ठंडे पानी का स्नान।
4. ठंडे पानी का सेंक
5. आइस थेरेपी।
6. कोल्ड कंप्रेस थेरेपी।
7. ठंडे पानी की डुबकी।
*उपचार के क्षेत्र:*
1. शूल प्रबंधन में।
2. मांसपेशी तनाव में।
3. तंत्रिका तंत्र की समस्या में।
4. प्रतिरक्षा प्रणाली की समस्याएं।
5. रक्त संचार की समस्याएं।
6. हृदय रोग।
7. फाइब्रोमाइल्जिया।
8. ऑस्टियोआर्थराइटिस।
*सावधानियाँ:*
1. ठंडे पानी के संपर्क में आने से पहले चिकिसक का परामर्श लें।
2. ठंडे पानी के संपर्क में आने के समय हृदय गति और रक्तचाप की देखरेख करें।
3. ठंडे पानी के संपर्क में आने के उपरान्त गर्म पानी से स्नान न करें।
4. ठंडे पानी के संपर्क में आने के समय शारीरिक गतिविधि न करें।
यहाँ क्रमशः गर्म और ठंडे पानी का फिजियोलॉजिकल प्रभाव और उपचार के नाम दिए गए हैं:
*गर्म पानी*
_फिजियोलॉजिकल प्रभाव:_
1. रक्त वाहिकाओं का विस्तार।
2. हृदय गति में कमी।
3. श्वसन गति में कमी।
4. मांसपेशियों में विश्रांति।
5. तंत्रिका तंत्र का शांतिकरण।
6. प्रतिरक्षा प्रणाली का उत्तेजन।
7. शरीर के विषाक्त पदार्थों का निष्कासन।
_उपचार के नाम:_
1. जल चिकित्सा या हाइड्रोथेरेपी।
2. गर्म स्नान चिकित्सा।
3. स्पा थेरेपी।
4. गर्म जल धारा स्नान।
5. रिफ्लेक्सोलॉजी।
6. मांसपेशी रिलैक्सेशन थेरेपी।
7. ऑस्टियोआर्थराइटिस उपचार।
*ठंडा पानी*
_फिजियोलॉजिकल प्रभाव:_
1. रक्त वाहिकाओं का संकुचन।
2. हृदय गति में वृद्धि।
3. श्वसन गति में वृद्धि।
4. मांसपेशियों में तनाव।
5. तंत्रिका तंत्र का उत्तेजन।
6. प्रतिरक्षा प्रणाली का सुद्रणीकरण।
7. शरीर के विषाक्त पदार्थों का निष्कासन।
_उपचार के नाम:_
1. क्रायोथेरेपी।
2. ठंडे पानी का स्नान।
3. ठंडे पानी का सेंक।
4. आइस थेरेपी।
5. कोल्ड कंप्रेस थेरेपी।
6. शूल प्रबंधन।
7. फाइब्रोमाइल्जिया उपचार।
*क्रमशः गर्म और ठंडे पानी का प्रभाव*
1. गर्म पानी से प्रारम्भ करें और ठंडे पानी से समाप्त करें।
2. गर्म पानी से मांसपेशियों को विश्राम दें और ठंडे पानी से मांसपेशियों को स्फूर्ति दें।
3. गर्म पानी से रक्त संचार बढ़ाएं और ठंडे पानी से रक्त वाहिकाओं को संकुचित करें।
4. गर्म पानी से तंत्रिका तंत्र को शांत करें और ठंडे पानी से तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करें।
डॉ त्रिभुवन नाथ श्रीवास्तव, पूर्व प्राचार्य, विवेकानंद योग प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, बाजोर, सीकर, राजस्थान।

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