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गुरुवार, 26 सितंबर 2024

सनातन हिन्दू धर्म ही सृष्टि का प्राचीनतम धर्म है।

 इस धरती के #सर्वाधिक प्राचीन ग्रन्थ #वेद ही हैं। इनसे पूर्व अन्य कोई भी ग्रंथ या ज्ञान उपलब्ध नहीं थे। यही ज्ञान या विषय वेदों की प्राचीनता और "हिन्दू" शब्द की उत्पत्ति के सम्बंध में एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। वेदों को सनातन हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र ग्रंथों में से एक माना जाता है, और वे सनातन हिंदू धर्म के मूल सिद्धांतों और दर्शन को प्रस्तुत करते हैं।


✍️हिन्दू शब्द की उत्पत्ति के बारे में विभिन्न मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वेदों में इसका उल्लेख होना इस बात को साबित करता है कि यह शब्द प्राचीन काल से ही अस्तित्व में था।👇


👉वैदिक ज्ञान के अनुसार, "हिन्दू " शब्द की उत्पत्ति "सिंधु नदी "से नहीं हुई, बल्कि यह वेदों में वर्णित है। यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है जो हिन्दू धर्म की प्राचीनता और इसके मूल सिद्धांतों को दर्शाता है।


*🤗 कुछ लोग यह कहते हैं कि हिन्दू शब्द सिंधु से बना है औऱ यह फारसी शब्द है परंतु ऐसा कुछ नहीं है, ये केवल असत्य तथाकथित धर्मनिरपेक्ष गिरोहों वा वामपंथी इतिहासकारों, अनुवादकों (तथाकथित सेक्युलर)द्वारा विगत आठ सौ वर्षों से प्रसारित किया गया है। जिसमें अधिक गति ब्रिटिश काल में आई थी, और भारत की स्वतन्त्रता के उपरान्त इन लोगों ने वे सभी भरपूर प्रयास किए, जिससे हम लोगों का स्वाभिमान और परम्परा कैसे समाप्त हो जाय।*

👉हमारे "वेदों" और "पुराणों" में हिन्दू शब्द का अनेकों स्थानों पर उल्लेख मिलता है...👇


👉*१-* "ऋग्वेद" के "बृहस्पति अग्यम्" में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार आया है...

👉*“हिमालयं समारभ्य*यावद् इन्दुसरोवरं।*

      *तं देवनिर्मितं देशम्*हिन्दुस्थानं प्रचक्षते ।।"*

👌अर्थात :- हिमालय से इंदु-सरोवर तक, देव निर्मित धरा के देश को हिंदुस्थान  कहते हैं !


*२-* "शैव" ग्रन्थ में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार किया गया है...

👉*हीनं च दूष्यतेव्।*हिन्दुरित्युच्च ते प्रिये।।*

👌अर्थात जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं !

*३-* "कल्पद्रुम" ग्रंथ में भी पुनः कहा गया है...

👉*हीनं दुष्यति इति हिन्दूः।*

👌अर्थात :- जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे,उसे हिन्दू कहते हैं।


*४-* "पारिजात हरण" में हिन्दु को कुछ इस प्रकार कहा गया है :-

👉*हिनस्ति तपसा पापां।*दैहिकां दुष्टं हेतिभिः।*

👉*शत्रुवर्गम् च स।*हिन्दुर्भिधियते।।*

👌अर्थात :- जो अपने तप से शत्रुओं का, दुष्टों का और पापियों का नाश कर देता है, वही हिन्दू है !


*५-* "माधव दिग्विजय" में भी हिन्दू शब्द को कुछ इस प्रकार उल्लेखित किया गया है...

👉*“ओंकारमन्त्रमूलाढ्य।*पुनर्जन्म द्रढ़ाश्य:।*

👉*गौभक्तो भारत:।*गरुर्हिन्दुर्हिंसन दूषकः।।"*

👌अर्थात :- वो जो "ओमकार" ध्वनि को ईश्वरीय धुन माने, अपने कर्मों पर विश्वास करे, गौ-पालक रहे तथा अनुचित आचरण और व्यवहार को जीवन से दूर रखे, वो हिन्दू है !


*६-* "ऋगवेद" (८.२.४१) में 'हिंदू ' नाम के एक बहुत ही पराक्रमी और दानी राजा का वर्णन मिलता है , जिन्होंने ४६००० गौधन का दान किया था !

अन्य कुछ उदाहरण भी देंखे,

वेदों में हिन्दू शब्द के अतिरिक्त भी कई अन्य महत्वपूर्ण वर्णन और प्रमाण हैं। यहाँ कुछ उदाहरण हैं:


१) ऋग्वेद (१.१६४.४५) - इसमें भारत की प्राचीनता और इसके निवासियों का वर्णन है, जैसे:


👉"अपाम सिंधो: अस्मिन् प्रविश्य"।


👉अर्थात - सिंधु नदी के इस पार बसने वाले लोग।


२) यजुर्वेद (३.५.६) - इसमें हिन्दू धर्म के मूल सिद्धांतों का वर्णन है:


👉"धर्मो रक्षति रक्षितः"।


👉अर्थात - धर्म की रक्षा करने वाला धर्म की रक्षा करता है।


३) सामवेद (१.१८.१) - इसमें हिन्दू धर्म के पवित्र मंत्रों का वर्णन है:


👉"ॐ अग्निमीले पुरोहितम्"।


👉अर्थात - अग्नि की पूजा करने वाले पुरोहित की स्तुति।


४) अथर्ववेद (१२.१.१) - इसमें हिन्दू धर्म के मूल दर्शन का वर्णन है:


👉"पृथ्वी माता दिवो नभः"।


👉अर्थात - पृथ्वी माता और आकाश पिता।


इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि वेदों में हिन्दू धर्म के मूल सिद्धांतों, दर्शन, और पवित्र मंत्रों का वर्णन है।

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