✍️🙏👉सनातन संस्कृति की हिंदू लङकियाँ सतर्क भी रहें और सावधान भी...आजकल लड़कियों में ही नहीं बल्कि 40, 50 साल की प्रौढ़ महिलायें भी ये नौटंकी कर रही हैं...
सम्हल जाओ अन्यथा नई कठिनाई के लिए तैयार रहिएगा...
बहुतों को संभवतः ये पता न हो कि दरगाहो में एक बेड़ी बाँधने और काटने की प्रथा होती है, दरगाह में जाकर अपनी मांग माँगने वाली लड़की के पैर मे काले रंग के धागे से बेड़ी बाँध दी जाती है।
ये बेड़ी कथित मनौती के पूरा होने पर दरगाह मे जाकर खा
दिम से कटवाई जाती है, तब जाकर वो लड़की बेड़ी कटवा कर मुक्त होती है। ये मजारों के खादिमों का नया टंटा या पाखण्ड है, जिसमे अधिकतर हिन्दू लड़कियां दरगाहों पर बेड़ी बँधवा रही हैं, इसका प्रारम्भ"कलियर_शरीफ नामक मजार" से हुई थी।
यह भोली भाली हिन्दू लड़कियों को अपने माया जाल में उलझाने का टोटका है जो बहुत सीमा तक सफल हो रहा है।
आजकल हर छोटी बडी दरगाह मे यही बाँधने काटने का धंधा चल रहा है।पैर के पास जहां पायल या धागा पहनते है उस स्थान को मंगल ग्रह का निवास माना जाता है और सबसे बड़ी बात यह है कि मंगल ग्रह को काली चीज कभी नहीं भाती, केवल लाल रंग या चांदी की पायल ही प्रभावित करता है।
इसलिए काला धागा पैरों में नही पहनना चाहिए, इससे अशुभ हो सकता है।
मैंने कई लडकियों और स्त्रियों के पैर में ऐसा धागा देखा है पर तब मुझे पता नही था कि ये धागा किसलिए है...???मैंने सोचा कि पहनावा होगा।
यदि आप ऐसा धागा पहने किसी लडकी को देखें तो उसे समझाएं, अन्यथा वो भी अगली "श्रद्धा" बनने के मार्ग पर है और आगे सूटकेस में पैक होगी।
परंतु इसके उपरान्त भी कुछ लोग पैरों में काला धागा बांधने के पीछे अपने अज्ञानता पूर्ण तर्क देते है।
आंख कान खुला रखें सनातनी माता पिता, मेरा काम यहां तक का था, आगे आप जाने और आपकी लाडली या तो आपकी पढ़ी लिखी आधुनिक परिधान में खोई हुई पत्नी....✍️🙏✍️

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